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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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  • पवन खेड़ा को बड़ी राहत, कोर्ट ने NBW याचिका खारिज की

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में अहम राहत मिली है। गुवाहाटी की कामरूप मेट्रो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने असम पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने की मांग की गई थी। अदालत ने अपने 7 अप्रैल 2026 के आदेश में स्पष्ट कहा कि जांच अधिकारी द्वारा पेश किए गए आधार “सिर्फ अनुमान और अटकलों” पर आधारित हैं और उन्हें रिकॉर्ड में उपलब्ध किसी ठोस साक्ष्य का समर्थन नहीं मिला है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि चूंकि मामला संज्ञेय और गैर-जमानती प्रकृति का है, इसलिए जांच एजेंसी को कानून के तहत आवश्यक होने पर गिरफ्तारी करने का अधिकार पहले से प्राप्त है। ऐसे में इस स्तर पर गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग उचित नहीं ठहराई जा सकती। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने 6 अप्रैल 2026 को खेड़ा और अन्य के खिलाफ आरोप लगाया था कि 5 अप्रैल 2026 को आयोजित दो प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके बारे में लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे, निराधार और भ्रामक हैं। दरअसल, खेड़ा ने प्रेस वार्ता में दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट, ‘गोल्डन कार्ड’ और विदेशों में संपत्तियां हैं, जिनका उल्लेख मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इस पर रिनिकी सरमा ने पलटवार करते हुए कहा कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज “फर्जी, छेड़छाड़ किए गए और मनगढ़ंत” हैं। कानूनी मोर्चे पर भी मामला लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। पवन खेड़ा को 10 अप्रैल 2026 को तेलंगाना हाई कोर्ट से एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही, खेड़ा की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी खारिज कर दी गई और उन्हें असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया। फिलहाल, गुवाहाटी की निचली अदालत के ताजा फैसले से खेड़ा को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में उच्च अदालतों में इस प्रकरण की दिशा तय होगी।

  • सूरत के उधना स्टेशन पर उमड़ा सैलाब, मजदूरों का पलायन—भावुक वीडियो वायरल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) सूरत (गुजरात)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच तेल और एलपीजी आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता का असर अब देश के औद्योगिक शहरों में भी नजर आने लगा है। इसी कड़ी में रविवार को सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे हालात कुछ समय के लिए बेकाबू हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीट पाने के लिए हजारों की संख्या में लोग स्टेशन पर एकत्रित हो गए। सुबह करीब 11:30 बजे उधना-हसनपुर ट्रेन के लिए यात्रियों को कतार में लगाया जा रहा था, तभी कुछ लोग लाइन तोड़कर आगे बढ़ने लगे। इससे अफरा-तफरी मच गई और व्यवस्था चरमरा गई। मजदूरों का पलायन बना वजह मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमर्शियल एलपीजी की कथित कमी के चलते सूरत की कुछ फैक्टरियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसके कारण वहां कार्यरत बड़ी संख्या में मजदूर अपने गृह राज्यों की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि देश में गैस और तेल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। गर्मी की छुट्टियां भी एक बड़ा कारण विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भीड़ के पीछे केवल औद्योगिक कारण ही नहीं, बल्कि गर्मी की छुट्टियों का सीजन भी अहम भूमिका निभा रहा है। स्कूल-कॉलेजों की छुट्टियों के चलते बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे ट्रेनों में अचानक दबाव बढ़ गया है। 21 हजार से अधिक यात्री रवाना रेलवे अधिकारियों के अनुसार, रविवार दोपहर तक विशेष ट्रेनों के माध्यम से 21,000 से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य की ओर रवाना किया जा चुका है। इसके बावजूद स्टेशन पर भीड़ लगातार बढ़ती रही, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बन गया। भावुक वीडियो ने खींचा ध्यान इस बीच सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक भीड़भाड़ और अव्यवस्था से परेशान होकर कहता नजर आ रहा है—“अब कभी नहीं आऊंगा यहां।” यह वीडियो न केवल मौजूदा हालात की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि प्रवासी मजदूरों की पीड़ा को भी उजागर करता है। प्रशासन अलर्ट मोड पर घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और रेलवे विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने यात्रियों से संयम बनाए रखने और निर्धारित व्यवस्था का पालन करने की अपील की है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर महानगरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा और अनिश्चितता को उजागर कर दिया है, जो मामूली परिस्थितियों में भी बड़े पैमाने पर पलायन के लिए मजबूर हो जाते हैं।

  • मुंबई में ‘स्कूल जिहाद’ का आरोप, कार्रवाई की मांग तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई। महानगर की शिक्षा व्यवस्था और भूमि उपयोग को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा नेता किरिट सोमैया ने ‘स्कूल जिहाद’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हुए शहर में अवैध रूप से संचालित स्कूलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके इन बयानों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस को तेज कर दिया है। सोमैया ने दावा किया है कि मुंबई में कुल 164 स्कूल अवैध रूप से चल रहे हैं, जिनमें से 152 स्कूल मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में स्थित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन स्कूलों का उपयोग जमीन पर कब्जा करने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, “बच्चों के नाम पर लैंड जिहाद किया जा रहा है, जिसमें सरकारी जमीनों को हड़पने का प्रयास हो रहा है और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।” भाजपा नेता ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं कई स्कूलों का दौरा किया और वीडियो साक्ष्य भी सार्वजनिक किए हैं। उनके अनुसार, कुछ स्थानों पर पहले स्कूल के नाम पर भवन खड़ा किया गया और बाद में वहां अन्य धार्मिक ढांचे बना दिए गए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस पूरे मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सोमैया ने जिन क्षेत्रों का उल्लेख किया है, उनमें मानखुर्द, गोवंडी, कुर्ला और मालवणी शामिल हैं। उनका कहना है कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में अंग्रेजी माध्यम के 145, हिंदी और मराठी के 4-4 तथा 11 उर्दू माध्यम के स्कूल संचालित हो रहे हैं, जो कथित रूप से अवैध हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सोमैया ने कहा कि अवैध स्कूलों को तुरंत बंद किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो वे खुद बीएमसी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उधर, बीएमसी प्रशासन की ओर से प्रारंभिक स्तर पर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि स्कूलों के दस्तावेज और मान्यता में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है, जहां एक ओर भाजपा इसे अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

  • मेरठ जुलूस में ‘फरसा विवाद’ से तनाव

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मेरठ। परशुराम जयंती के अवसर पर मेरठ में निकाली गई भव्य शोभायात्रा के दौरान एक वीडियो वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जुलूस में प्रतीकात्मक रूप से फरसा और डंडा लहराने पर पुलिस की सख्ती ने ब्राह्मण और त्यागी समाज में रोष पैदा कर दिया है, जिससे मामला धार्मिक आस्था बनाम कानून व्यवस्था की बहस में बदल गया है। घटना चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (गढ़ रोड) के सामने की बताई जा रही है, जहां शोभायात्रा गुजर रही थी। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद डिप्टी एसपी शुचिता सिंह ने माइक संभालते हुए जुलूस को रुकवाया और फरसा व डंडा लिए युवकों को कड़ी चेतावनी दी। वायरल वीडियो में उन्हें कहते सुना जा रहा है कि “फरसा और डंडा लहराने वालों की पहचान की जा रही है, सभी पर मुकदमा दर्ज होगा।” वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। ब्राह्मण और त्यागी समाज के लोगों ने इसे धार्मिक प्रतीकों पर अनावश्यक हस्तक्षेप बताते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परशुराम जयंती जैसे धार्मिक आयोजनों में फरसा भगवान परशुराम का प्रतीक है, जिसे परंपरागत रूप से सम्मान के साथ प्रदर्शित किया जाता है। त्यागी समाज के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। मांगेराम त्यागी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण जुलूस में प्रतीकों को लेकर इस तरह की सख्ती प्रशासन की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न लगाती है। वहीं श्रीकांत त्यागी ने आरोप लगाया कि समाज विशेष के आयोजनों को अनुमति देने में भी प्रशासन भेदभाव कर रहा है। हालांकि, पुलिस का पक्ष साफ है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक आयोजनों में किसी भी प्रकार के हथियार या उनके प्रदर्शन से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए एहतियात के तौर पर सख्ती बरती गई। गौरतलब है कि मेरठ के विभिन्न क्षेत्रों में परशुराम जयंती के अवसर पर भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनमें झांकियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली। सोमेंद्र तोमर भी परतापुर क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। फिलहाल प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। लेकिन वायरल वीडियो के चलते यह मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

  • गुजरात में ओवैसी का हमला: बंटवारे के लिए कांग्रेस जिम्मेदार, AIMIM ही BJP को दे सकती है चुनौती

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) सूरत। असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात के लिंबायत में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर तीखा हमला बोला। AIMIM प्रमुख ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के बंटवारे के लिए मुसलमान जिम्मेदार नहीं थे, बल्कि Indian National Congress की भूमिका पर सवाल उठाए जाने चाहिए। ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि “वोट एक अमानत है” और इसका उपयोग समुदाय के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने नेतृत्व को मजबूत करें, क्योंकि “आवाज उसी की सुनी जाती है, जिसका नेतृत्व होता है।” गुजरात की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई पार्टी Bharatiya Janata Party को संविधान के दायरे में रहते हुए चुनौती दे सकती है, तो वह AIMIM ही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को वोट देकर बीजेपी को रोकने की धारणा गलत साबित हो चुकी है। ओवैसी ने उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें कहा जाता है कि AIMIM के चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस, टीएमसी और अन्य दल सैकड़ों सीटों पर चुनाव लड़ते हैं, जबकि उनकी पार्टी सीमित सीटों पर ही उतरती है। “अगर आप सच में बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो 11 सीटों की बात छोड़िए, 270 सीटें जीतकर दिखाइए,” उन्होंने चुनौती दी। इतिहास के संदर्भ में बोलते हुए ओवैसी ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की किताब ‘India Wins Freedom’ का उल्लेख किया और कहा कि आजाद ने स्वयं लिखा है कि उन्होंने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से देश के विभाजन को रोकने की अपील की थी। अपने भाषण के अंत में ओवैसी ने युवाओं से संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का आह्वान किया और कहा कि यह समय है जब समुदाय खुद अपना नेतृत्व तैयार करे और अपनी आवाज को मजबूती से देश के सामने रखे।

  • बंगाल चुनाव में सुरक्षा का कड़ा पहरा, 2193 QRT तैनात

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। आयोग ने साफ संदेश दिया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में पूरे राज्य में 2,193 क्विक रिस्पांस टीमों (QRT) की तैनाती की गई है, जो किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहेंगी। 23 अप्रैल 2026 को होने वाले पहले चरण के मतदान में 152 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस दौरान संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार की गई यह विशेष सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से सुसज्जित है। इस बार QRT की संरचना में भी अहम बदलाव किया गया है। प्रत्येक टीम में राज्य पुलिस के सब-इंस्पेक्टर (SI) या असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) स्तर के अधिकारी के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के 4 से 6 जवान शामिल किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में इनकी संख्या और बढ़ाई जा सकती है। यह व्यवस्था कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। तकनीकी निगरानी को भी इस बार प्राथमिकता दी गई है। QRT की गाड़ियों में आधुनिक कैमरे लगाए गए हैं, जो सीधे सेक्टर ऑफिस और कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे। इससे हर गतिविधि पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकेगी और किसी भी घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकेगी। जिलावार तैनाती पर नजर डालें तो मुर्शिदाबाद में सबसे अधिक 288 QRT तैनात की गई हैं, जिसमें मुर्शिदाबाद पुलिस जिला में 219 और जंगीपुर में 69 टीमें शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व मेदिनीपुर में 253, पश्चिम मेदिनीपुर में 248, बांकुड़ा में 180, बीरभूम में 161, मालदा में 157, पुरुलिया में 139, कूचबिहार में 133 तथा आसनसोल-दुर्गापुर कमिश्नरेट में 113 टीमें तैनात की गई हैं। उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर और रायगंज क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर भी फेरबदल किया गया है। आयोग ने हल्दिया के एसडीपीओ पद पर आईपीएस आलोक कुमार और कांथी में अतनु घोषाल की नियुक्ति की है। दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में भी प्रशासनिक बदलाव किया गया था। निर्वाचन आयोग के इन सख्त और व्यापक इंतजामों से यह स्पष्ट है कि इस बार चुनाव को पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। मतदाताओं में भी इन सुरक्षा उपायों के चलते विश्वास का माहौल मजबूत होने की उम्मीद है।

  • महिला आरक्षण पर मोदी की रणनीति उलटी पड़ी: स्टालिन

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) होसुर/चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने की उनकी कोशिश अब उन्हीं पर भारी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में दिया गया प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन “सरकारी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक भाषण” था, जो आदर्श आचार संहिता की भावना के विपरीत है। रविवार को होसुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि 18 अप्रैल 2026 को महिला आरक्षण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री का भाषण विपक्ष पर निशाना साधने के लिए दिया गया था। “जिस बात को चुनावी मंच से कहा जाना चाहिए था, उसे सरकारी मंच से कहना नियमों का खुला उल्लंघन है,” उन्होंने कहा। स्टालिन ने दावा किया कि संसद में संविधान संशोधन विधेयक की हार से केंद्र सरकार दबाव में है और इसी कारण प्रधानमंत्री विपक्षी दलों को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने सोचा था कि चुनाव के बीच यह मुद्दा उठाकर विपक्ष का ध्यान भटकाया जा सकता है, लेकिन इसका असर उल्टा हुआ। दक्षिण भारत के लोगों में नाराज़गी बढ़ी है और एनडीए की हार तय हो गई है।” डीएमके अध्यक्ष ने कहा कि अब ‘डैमेज कंट्रोल’ के तहत विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाया जा रहा है, लेकिन जनता इसे समझ चुकी है। “जो हथियार विपक्ष के खिलाफ चलाया गया, वही अब भाजपा पर उल्टा पड़ गया है,” उन्होंने तंज कसा। इस दौरान स्टालिन ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तमिलनाडु की पहचान और अधिकारों को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को राज्य में अवसर मिला, तो वह “धार्मिक आधार पर विभाजन, हिंदी थोपने और परिसीमन के जरिए तमिलनाडु की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने” का प्रयास करेगी। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि इससे राज्य की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए स्टालिन ने विपक्षी एकता को मजबूत बताया। उन्होंने खड़गे की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में “सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस” मजबूत आधार पर आगे बढ़ रहा है। चुनावी अभियान को धार देते हुए स्टालिन ने बताया कि राज्यभर में डीएमके सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को व्यापक समर्थन मिल रहा है। “जहां भी जा रहा हूं, वहां योजनाओं के लाभार्थी मिल रहे हैं। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है,” उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार प्रचार कर रहे हैं, जिससे गठबंधन को मजबूती मिल रही है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव होने हैं, और चुनावी माहौल में सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा भी अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है, जिस पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं।

  • तमिलनाडु में राहुल-स्टालिन दूरी के सियासी मायने

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। राहुल गांधी के तमिलनाडु दौरे ने जहां चुनावी माहौल को गरमाया, वहीं उनकी और M. K. स्टालिन के बीच मंच साझा न करने को लेकर नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। गठबंधन की मजबूती के दावों के बीच दोनों नेताओं का अलग-अलग सभाएं करना कई संकेत दे रहा है। शनिवार को राहुल गांधी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाएं कर (डीएमके), कांग्रेस और (वीसीके) के उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए स्थानीय मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया। हालांकि, इन सभाओं में मुख्यमंत्री स्टालिन की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े कर दिए। चुनाव से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर दिखी विपक्षी एकजुटता तमिलनाडु में भी दिखाई देगी। माना जा रहा था कि राहुल और स्टालिन का साझा मंच गठबंधन के लिए बड़ा संदेश देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के मुताबिक, सीट बंटवारे को लेकर पहले से ही कांग्रेस और डीएमके के बीच खींचतान रही है। इस विवाद में मणिक्कम टैगोर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जाता है कि स्टालिन ने राहुल गांधी को संदेश भेजकर स्थिति संभालने का आग्रह किया था, लेकिन इस पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि टैगोर अब राहुल गांधी के करीबी सलाहकार के रूप में उभर रहे हैं और संगठनात्मक निर्णयों में उनकी भूमिका बढ़ गई है। यहां तक कि K. C. वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ नेता भी कई मामलों में टैगोर के जरिए संवाद कर रहे हैं। ऐसे में यदि टैगोर मंच साझा करने के पक्ष में नहीं थे, तो राहुल का रुख भी उसी दिशा में रहने की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता इसे भविष्य की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं, जहां पार्टी राज्य में अपनी स्वतंत्र पहचान मजबूत करना चाहती है। वहीं, डीएमके खेमे में इसे गठबंधन के भीतर बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु की राजनीति में क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व अब भी कायम है और एआईएडीएमके और डीएमके के बीच मुख्य मुकाबला रहता है। राष्ट्रीय पार्टियां अभी तक राज्य में निर्णायक विकल्प के रूप में पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई हैं। ऐसे में राहुल गांधी और स्टालिन का अलग-अलग मंचों से प्रचार करना केवल एक घटनाक्रम नहीं, बल्कि गठबंधन की आंतरिक रणनीति और शक्ति संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह दूरी महज रणनीतिक है या इसके पीछे गहरे राजनीतिक मतभेद छिपे हैं।

  • इरोड में प्रवासियों ने राज्यसभा सांसद नीरज डांगी का किया सम्मान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) इरोड (तमिलनाडु)। विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र इरोड पूर्व विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में कांग्रेस प्रत्याशी गोपीनाथ पलानियप्पन के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान राज्यसभा सांसद नीरज डांगी के इरोड आगमन पर प्रवासी समाज ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए सम्मान किया। इरोड के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में प्रवासी समाज के प्रमुख प्रतिनिधि रमेशचंद बाफना एवं संतोषकुमार मेहता ने सांसद डांगी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उपस्थित प्रवासी समुदाय के लोगों ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए आगामी चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में समर्थन का भरोसा भी जताया। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में चुनावी माहौल और विकास के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रवासी समाज के सदस्यों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएंगे। प्रवासी प्रवक्ता दिनेश सालेचा (मदुराई) ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सांसद डांगी का इरोड दौरा सफल रहा और प्रवासी समाज का उत्साह देखने लायक था। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आपसी समन्वय और राजनीतिक जागरूकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समारोह में बड़ी संख्या में प्रवासी समाज के लोग उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम का माहौल उत्साहपूर्ण और प्रभावशाली बना रहा।

  • धर्मनिष्ठा सेवा ट्रस्ट का शुभारंभ, लोगो व वेबसाइट लॉन्च

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती के पावन अवसर पर “धर्मनिष्ठा सेवा ट्रस्ट” का विधिवत पंजीकरण एवं भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर ट्रस्ट का आधिकारिक लोगो एवं वेबसाइट भी लॉन्च की गई, जिससे संस्था के उद्देश्यों और गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अनिल सिंह सिकरवार, निशु कमल, राजेश्वर कुमार एवं अनिल कुमार सिंह उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने ट्रस्ट की पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम बताया। कार्यक्रम के दौरान प्रवीण पांडेय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह ट्रस्ट समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित रहेगा। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म एवं हिंदू परंपराओं के संरक्षण और प्रसार को बढ़ावा देना है। संस्था द्वारा नियमित रूप से पूजा-अर्चना, यज्ञ, भजन, कीर्तन एवं आध्यात्मिक सभाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे समाज में श्रद्धा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया जा सके। इसके साथ ही मंदिरों की गतिविधियों, धार्मिक उत्सवों एवं तीर्थ यात्राओं में सहयोग प्रदान करने की भी योजना है। ट्रस्ट धर्मग्रंथों के प्रति जागरूकता फैलाने, नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा धर्म आधारित जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य करेगा। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए परंपराओं की निरंतरता बनाए रखना है। इस अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की घोषणा भी की गई। प्रवीण कुमार पांडे को अध्यक्ष, श्याम मुरारी को उपाध्यक्ष, राजमणि कुमार सिन्हा को महासचिव, राम मोहन पाठक को सचिव एवं प्रभात मिश्रा को संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया। शैलेश मिश्रा को सलाहकार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, नीरज कुमार शर्मा को कोषाध्यक्ष और सतीश मिश्रा को संयुक्त कोषाध्यक्ष बनाया गया। सुस्मिता पाठक को प्रवक्ता तथा कमलेश यादव को मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। प्रशासनिक एवं प्रबंधन टीम में नितीन शर्मा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), राजेश कुमार को मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ), राहुल पांडे को मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) तथा मनोज गुप्ता को मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) की जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्यक्रम का समापन भक्तिमय वातावरण में हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने ट्रस्ट के माध्यम से समाज सेवा, धर्म प्रचार और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण हेतु सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

  • विजयनगर में रामोत्सव पर भव्य शोभा यात्रा, उमड़ा जनसैलाब

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु (विजयनगर)। रामोत्सव के पावन अवसर पर विजयनगर क्षेत्र रविवार को श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल एवं विजयनगर निवासी क्षेमा अभिवृद्धि संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशाल शोभा यात्रा का शुभारंभ हिंदू ध्वज लहराकर किया गया। इस अवसर पर सदाशिवानंदाचार्य स्वामी ने विधिवत पूजा-अर्चना कर यात्रा को रवाना किया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा, पूर्व विधान परिषद सदस्य अश्वत नारायण, पूर्व पार्षद एच. रविंद्र, समाजसेवी महेंद्र मुणोत, आयोजक एम.एल. शिवकुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और हिंदू कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने और समाज में एकता व संस्कारों के प्रसार का संदेश दिया। शोभा यात्रा में सुसज्जित झांकियां, भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान के रूप में सजे कलाकारों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरे मार्ग में “जय श्रीराम” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। यात्रा विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए विजयनगर क्षेत्र का भ्रमण करती रही, जहां जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभा यात्रा का स्वागत किया। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आयोजकों द्वारा विशेष इंतजाम किए गए थे। आयोजकों ने बताया कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में एकजुटता, संस्कार और धार्मिक चेतना को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का समापन भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। रामोत्सव के इस भव्य आयोजन ने विजयनगर में धार्मिक उत्साह और सामाजिक समरसता का अनूठा संदेश दिया।

  • इंदिरानगर में अवैध फ्लेक्स पर चला निगम का बुलडोज़र

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने की दिशा में कड़ा कदम उठाते हुए Bengaluru Central City Corporation ने इंदिरानगर इलाके में बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स बैनरों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लगे दर्जनों अवैध बैनरों को हटाया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार, इंदिरानगर जैसे व्यस्त और प्रमुख क्षेत्र में अवैध फ्लेक्स बैनर न केवल शहर की सौंदर्यता को प्रभावित कर रहे थे, बल्कि यातायात व्यवस्था में भी बाधा उत्पन्न कर रहे थे। कई स्थानों पर ये बैनर बिजली के खंभों और पेड़ों पर लगाए गए थे, जिससे सुरक्षा संबंधी खतरे भी पैदा हो रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। साथ ही स्पष्ट किया गया कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार के होर्डिंग, पोस्टर या फ्लेक्स लगाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। स्थानीय निवासियों ने निगम की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र की साफ-सफाई और सुंदरता में सुधार होगा तथा सार्वजनिक स्थानों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। निगम ने नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के प्रचार-प्रसार के लिए निर्धारित नियमों का पालन करें और आवश्यक अनुमति लेकर ही बैनर या होर्डिंग लगाएं, अन्यथा कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। यह अभियान आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी जारी रहेगा, जिससे बेंगलुरु को एक स्वच्छ और अनुशासित महानगर के रूप में स्थापित किया जा सके।

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