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पवन खेड़ा को बड़ी राहत, कोर्ट ने NBW याचिका खारिज की

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 20
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

गुवाहाटी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में अहम राहत मिली है। गुवाहाटी की कामरूप मेट्रो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने असम पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने की मांग की गई थी।


अदालत ने अपने 7 अप्रैल 2026 के आदेश में स्पष्ट कहा कि जांच अधिकारी द्वारा पेश किए गए आधार “सिर्फ अनुमान और अटकलों” पर आधारित हैं और उन्हें रिकॉर्ड में उपलब्ध किसी ठोस साक्ष्य का समर्थन नहीं मिला है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि चूंकि मामला संज्ञेय और गैर-जमानती प्रकृति का है, इसलिए जांच एजेंसी को कानून के तहत आवश्यक होने पर गिरफ्तारी करने का अधिकार पहले से प्राप्त है। ऐसे में इस स्तर पर गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग उचित नहीं ठहराई जा सकती। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने 6 अप्रैल 2026 को खेड़ा और अन्य के खिलाफ आरोप लगाया था कि 5 अप्रैल 2026 को आयोजित दो प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके बारे में लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे, निराधार और भ्रामक हैं। दरअसल, खेड़ा ने प्रेस वार्ता में दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट, ‘गोल्डन कार्ड’ और विदेशों में संपत्तियां हैं, जिनका उल्लेख मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इस पर रिनिकी सरमा ने पलटवार करते हुए कहा कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज “फर्जी, छेड़छाड़ किए गए और मनगढ़ंत” हैं।


कानूनी मोर्चे पर भी मामला लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। पवन खेड़ा को 10 अप्रैल 2026 को तेलंगाना हाई कोर्ट से एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही, खेड़ा की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी खारिज कर दी गई और उन्हें असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया। फिलहाल, गुवाहाटी की निचली अदालत के ताजा फैसले से खेड़ा को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में उच्च अदालतों में इस प्रकरण की दिशा तय होगी।

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