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मेरठ जुलूस में ‘फरसा विवाद’ से तनाव

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 20
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

मेरठ। परशुराम जयंती के अवसर पर मेरठ में निकाली गई भव्य शोभायात्रा के दौरान एक वीडियो वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जुलूस में प्रतीकात्मक रूप से फरसा और डंडा लहराने पर पुलिस की सख्ती ने ब्राह्मण और त्यागी समाज में रोष पैदा कर दिया है, जिससे मामला धार्मिक आस्था बनाम कानून व्यवस्था की बहस में बदल गया है।


घटना चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (गढ़ रोड) के सामने की बताई जा रही है, जहां शोभायात्रा गुजर रही थी। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद डिप्टी एसपी शुचिता सिंह ने माइक संभालते हुए जुलूस को रुकवाया और फरसा व डंडा लिए युवकों को कड़ी चेतावनी दी। वायरल वीडियो में उन्हें कहते सुना जा रहा है कि “फरसा और डंडा लहराने वालों की पहचान की जा रही है, सभी पर मुकदमा दर्ज होगा।” वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। ब्राह्मण और त्यागी समाज के लोगों ने इसे धार्मिक प्रतीकों पर अनावश्यक हस्तक्षेप बताते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परशुराम जयंती जैसे धार्मिक आयोजनों में फरसा भगवान परशुराम का प्रतीक है, जिसे परंपरागत रूप से सम्मान के साथ प्रदर्शित किया जाता है। त्यागी समाज के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। मांगेराम त्यागी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण जुलूस में प्रतीकों को लेकर इस तरह की सख्ती प्रशासन की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न लगाती है। वहीं श्रीकांत त्यागी ने आरोप लगाया कि समाज विशेष के आयोजनों को अनुमति देने में भी प्रशासन भेदभाव कर रहा है।


हालांकि, पुलिस का पक्ष साफ है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक आयोजनों में किसी भी प्रकार के हथियार या उनके प्रदर्शन से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए एहतियात के तौर पर सख्ती बरती गई। गौरतलब है कि मेरठ के विभिन्न क्षेत्रों में परशुराम जयंती के अवसर पर भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनमें झांकियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली। सोमेंद्र तोमर भी परतापुर क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। फिलहाल प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। लेकिन वायरल वीडियो के चलते यह मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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