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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • गोस्वामी तुलसीदास का काव्य में परिवार प्रबोधन

    डॉ. वीरमाराम पटेल लेखक एवं कवि, गुड़ामालानी, बालोतरा भारत की पहचान विश्व में परिवार व्यवस्था के कारण अनोखी है। परिवार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और वर्तमान में इसी धरोहर का आधार है महाकवि तुलसीदास के साहित्य में निहित परिवार भाव। उनके साहित्य में परिवार का आवरण केवल रक्त के रिश्ते से नहीं अपितु जड़-चेतन के प्रति परिवार भाव है। प्रभु श्री राम परिवार परिवेश को अगर आदर्श आमने तो आज वहीं भाव हमारे समाज के परिवारों का है लेकिन आज के परिवार बिखराव के दौर में है। प्रभु श्री का परिवार बिखकर भी एक है। यही भाव आज के समाज में कम होता जा रहा है। वर्तमान में एकल परिवारों, पीढ़ीगत अंतराल और पारिवारिक बिखराव के दौर में तुलसीदास का साहित्य अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। तुलसीदास रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने विभिन्न संबंधों—माता-पिता, भाई-भाई, पति-पत्नी और गुरु-शिष्य के आचरण को लेकर लिखते हैं कि जिस घर में सुमति (सद्भाव) होती है, वहाँ संपत्ति और सुख स्वतः निवास करते हैं- जहाँ सुमति तहँ संपत्ति नाना। जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥ आज हम परिवार में जमीन विवाद को लेकर मनमुटाव और रक्त-रंजीश आपसी भाइयों के झगड़े को समाचर-पत्रों में पढ़ते है, वहीं मानस के अयोध्याकाण्ड में भरत और राम का चरित्र 'अधिकार त्यागने' की प्रतिस्पर्धा दिखाता है- भरत प्राणप्रिय पावहिं राजू। विधि सब विधि मोहि दीन्ह सुकाजू॥ जौं अनीति कछु भाषौं भाई। तौ मोहि कोइ न कहौ भलाई॥ इस पद में श्रीराम भरत के राजा बनने की बात सुनकर अत्यंत हर्षित होते हैं। वे संपत्ति या पद को नहीं, बल्कि भाई के प्रेम और उसके आत्म-संतोष को सर्वोपरि मानते हैं। केवल भाई से झगड़ा ही नहीं अपितु माता-पिता से भी मतभेद होकर वृद्धाश्रम की ओर रूख अनेक युगल दिखायी देते हैं, तब रामचरितमानस समाज को माता-पिता के प्रति संतानों के कर्तव्यों से अवगत करवाता है। माता-पिता के वचन को अपना धर्म समझकर पालन करना संतानों का कर्तव्य है- बालकाण्ड में लिखा कि- प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥ आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मुनिराजा॥ पितु आयसु सब धरम कहुँ टीका। मातु पिता गुर बचन अमीका॥ (अयोध्याकाण्ड) अत: प्रातःकाल उठकर बड़ों को प्रणाम करना केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि परिवार के संस्कारों की नींव है। पिता के आदेश पर राज्य त्यागकर वन जाने में राम कोई कष्ट नहीं, अपितु परम धर्म देखते हैं। इसमें पिता का इतना बड़ा आदर्श है कि राम के बिना तीन दिन तक जीवित नहीं रह सके। आज के युग में राम और दशरथ जैसे चरित्रों के समन्वय से ही परिवार चल सकता हैं अगर एक में कमी है तो परिवार की नींव डगमगाने लगेगी। इसके अलावा आज दंपती के बीच के विवादों से न्यायालय में अनेक वाद के निपटारे बाकी है। दम्पति के बीच केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक-दूसरे के संकट में संबल बनने का भाव तुलसीदास का साहित्य देता है। जहँ तिय देह धरहि अनुगामी। सोइ सुखु सोइ सुहागु जग स्वामी॥ (अयोध्याकाण्ड-सीता-राम संवाद) सीता जी राम से कहती हैं कि जहाँ राम हैं, वही उनका महल और सुख है। तुलसीदास ने पति-पत्नी के रिश्ते को केवल 'सहमति' नहीं, बल्कि 'सह-अस्तित्व और सुख-दुःख के साझापन' का माध्यम माना है। सास बहू के झगड़े अक्सर आज परिवार टूटने के कारण बनते हैं। सुमित्रा जी अपनी बहुओं (सीता व उर्मिला) और पुत्रों को निःस्वार्थ सेवा का उपदेश देती हैं- तात ताव कहुँ मातु वैदेही। पिता रामु सब भांति सनेही॥ (अयोध्याकाण्ड) यहाँ माता सुमित्रा अपने पुत्र लक्ष्मण से कहती हैं कि वन में सीता ही तुम्हारी माता हैं और राम तुम्हारे पिता। यह पद दर्शाता है कि एक आदर्श सास-माता परिवार के व्यापक हित के लिए स्वार्थ से ऊपर उठकर संस्कार देती है। भारतीय संस्कारों एवं परिवार व्यवस्था में अधिकारों के स्थान पर कर्तव्यों की प्राथमिकता दी है। एक सशक्त परिवार का यही आधार है, लेकिन मूल्यहीनता के कारण आज परिवार टूट रहे हैं। तुलसीदास संवाद और त्याग को परिवार के लिए आवश्यक मानते हैं जिससे संस्कारों का हस्तांतरण होता है, जहाँ नई पीढ़ी बड़ों के आचरण को देखकर मर्यादा और शील सीखती है। डॉ. वीरमाराम पटेल लेखक एवं कवि, गुड़ामालानी, बालोतरा

  • छोटे गांव की बेटी ललिता कुमारी बनीं एडवोकेट, बढ़ाया परिवार का मान

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी तिरुनेलवेली। 18 अगस्त 2026। छोटे से गांव से निकलकर बेटियां आज शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। इसी कड़ी में गांव नवापुरा चोपावतान की प्रतिभाशाली बेटी ललिता कुमारी पटेल ने कड़ी मेहनत और लगन के बल पर एडवोकेट बनकर अपने परिवार, गांव और समाज का नाम रोशन किया है। ललिता कुमारी चौधरी करतारामजी एवं जोगाजी कोदली परिवार की बेटी हैं। उनके पिता तिरुनेलवेली, तमिलनाडु में हार्डवेयर व्यवसाय करते हैं। ललिता ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा तमिलनाडु से पूरी की। इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित VELS कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी की और वहीं से एलएलबी की डिग्री हासिल कर अधिवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। ललिता की इस उपलब्धि के पीछे परिवार की मेहनत, संस्कार, शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच और उनके स्वयं के दृढ़ संकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि बेटियों को शिक्षा और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा सकती हैं। ललिता कुमारी के एडवोकेट बनने पर परिवार, रिश्तेदारों एवं समाज के लोगों ने खुशी जताते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी है।

  • कुर्सी नहीं मिली, 38 मिनट रुकी वैशाली एक्सप्रेस

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी गोरखपुर।18 अगस्त 2026। रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब गार्ड के लिए कुर्सी की व्यवस्था नहीं होने के कारण नई दिल्ली-ललितग्राम वैशाली एक्सप्रेस करीब 38 मिनट तक प्लेटफॉर्म पर खड़ी रही। गोरखपुर से ट्रेन को आगे रवाना करने वाले गार्ड ने आवश्यक व्यवस्था नहीं होने तक ट्रेन आगे ले जाने से इनकार कर दिया। जानकारी के अनुसार, लखनऊ से गोरखपुर तक ड्यूटी करने वाले गार्ड को रास्ते में कुर्सी उपलब्ध नहीं होने के कारण टूल-बॉक्स पर बैठकर सफर करना पड़ा। गोरखपुर पहुंचने के बाद जब नए गार्ड ने चार्ज संभाला तो उसने भी ड्यूटी के दौरान बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध नहीं होने पर आपत्ति जताई। गार्ड की शिकायत के बाद रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। ट्रेन को निर्धारित समय पर रवाना करने के बजाय करीब 38 मिनट तक स्टेशन पर खड़ा रहना पड़ा। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और ट्रेन के परिचालन पर भी असर पड़ा। घटना ने रेलवे की व्यवस्थाओं और कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रेन के सुरक्षित और सुचारु संचालन में गार्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं होने की शिकायत को रेलवे के लिए गंभीरता से लेना जरूरी माना जा रहा है। मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन की ओर से व्यवस्था को लेकर क्या कार्रवाई की गई, इस पर यात्रियों और रेल कर्मचारियों की नजर बनी हुई है।

  • तीन मुनिराजों का दीक्षा महोत्सव, गूंजा त्याग का संदेश

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी बेंगलुरु, 18 अगस्त 2026। बेंगलुरु। ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज, मुनि श्री 108 विशालसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 धवलसागर जी महाराज के 23वें दीक्षा महोत्सव का भव्य आयोजन मुनि संघ के पावन सानिध्य में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अंतेवासी शिष्यों के दीक्षा दिवस पर देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बेंगलुरु पहुंचे और मुनिराजों के चरणों में नमोस्तु अर्पित कर संयममय जीवन से प्रेरणा ली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की सहभागिता से ज्ञानोदय परिसर पूरे दिन जिनवाणी, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। समारोह केवल दीक्षा की स्मृति का उत्सव नहीं, बल्कि त्याग, संयम और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रेरणादायी अवसर बना। नन्हे बच्चों ने दिया संयम का संदेश महोत्सव का शुभारंभ प्रातःकालीन धार्मिक क्रियाओं, मंगलाचरण एवं जिनवाणी स्तुति से हुआ। जैन पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने संयम, वैराग्य और जैन दर्शन पर आधारित भावपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। अभिनय एवं संगीतमय प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने संसार की असारता तथा आत्मकल्याण के लिए वीतरागता और संयम का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। समारोह में विभिन्न शहरों से आए समाजसेवियों एवं दानवीरों ने भी सहभागिता की। श्री महेश जी काला, श्री धन्य कुमार जी दिल्ली, श्री विजय कुमार जी दिल्ली, श्री भानुकरण जी दिल्ली, श्री वैभव जी परतवार पुणे, श्री नलिन जी मुंबई, श्री जिनेश जी जैन ग्रीन पार्क दिल्ली तथा छिपी टोला, आगरा की निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी श्री सुनील जी, श्री राजीव जी, श्री संजीव जी, श्री जितेंद्र जी, श्री बंटी जी, श्री मुकेश जी एवं श्री विमल जी ने अपनी श्रद्धा अर्पित की। सभी ने आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की। परिजनों का हुआ भावपूर्ण सम्मान समारोह का भावुक प्रसंग निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के माता-पिता एवं परिजनों के अभिनंदन का रहा। मंच पर मुनिश्री के भ्राता एवं परिजनों का श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र देकर भावभीना बहुमान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जब कोई संतान सांसारिक वैभव का त्याग कर संयम एवं मोक्षमार्ग को स्वीकार करती है तो उसका त्याग पूरे कुल और समाज के लिए गौरव का विषय बन जाता है। मुनिश्री के संयममय जीवन को जैन शासन की प्रभावना, आत्मकल्याण और प्राणिमात्र के मंगल के लिए समर्पित बताया गया। अरविंद लिंबावली ने सराहा जैन समाज का सेवा भाव समारोह में कर्नाटक के वरिष्ठ जननेता एवं पूर्व मंत्री अरविंद लिंबावली का गरिमापूर्ण स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। उन्होंने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि गोशाला की रक्षा एवं संरक्षण के लिए समाज द्वारा किया जा रहा सहयोग सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जैन समाज अहिंसा, जीवदया और अपनी परंपराओं का दृढ़ता से पालन करते हुए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। चिकित्सा एवं जनसेवा के क्षेत्र में समाज की सक्रिय भूमिका को भी उन्होंने उल्लेखनीय बताया। ‘दीक्षा दिवस आत्मविशुद्धि का संकल्प दिवस’ धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने दीक्षा के वास्तविक स्वरूप, संयम, त्याग, गुरु भक्ति एवं आत्मविशुद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीक्षा दिवस केवल किसी तिथि का स्मरण नहीं, बल्कि आत्मा को संसार के बंधनों से ऊपर उठाकर निज स्वरूप की ओर लौटने का पावन संकल्प दिवस है। मुनिश्री ने कहा कि धर्म बाहरी प्रदर्शन अथवा धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी वास्तविक अनुभूति अंतरंग विशुद्धि और सच्चे समर्पण से होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि 23वें दीक्षा महोत्सव को केवल उत्सव के रूप में न मनाएं, बल्कि अपने जीवन की किसी एक प्रिय वस्तु, बुरी आदत अथवा दुर्गुण का त्याग करने का संकल्प लें। यही दीक्षा महोत्सव की वास्तविक सार्थकता होगी। ‘डूबो मत, लगाओ डुबकी’ के स्वाध्याय का आह्वान मंगल प्रवचन में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की कृति ‘डूबो मत लगाओ डुबकी’ के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं प्रत्येक जैन गृहस्थ के घर में इसकी स्थापना का संदेश दिया गया। मुनिश्री ने कहा कि यह कृति आत्मचिंतन और अध्यात्म की गहराइयों में उतरने की प्रेरणा देती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित स्वाध्याय का आग्रह करते हुए कहा कि इससे आचार्यश्री के विचार और संस्कार आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेंगे। महोत्सव के दौरान मुनि संघ के दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजे इस आयोजन में समाजबंधुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। समापन अवसर पर अतिथियों एवं श्रद्धालुओं ने वात्सल्य भोजन में शामिल होकर सामूहिक आत्मीयता का अनुभव किया।

  • नेमिनाथ कल्याणक पर उमड़ी आस्था

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी बेंगलुरु, 18 अगस्त 2026। श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी ट्रस्ट, बसवनगुडी के तत्वावधान में बाईसवें तीर्थंकर परमात्मा श्री नेमिनाथ का जन्म एवं दीक्षा कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। प. पूज्य मलयप्रभ सागर जी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा तथा प. पूज्य साध्वी जी श्री प्रियश्रद्धांजना श्री जी म.सा. आदि ठाणा की सान्निध्यता में आयोजित महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। दादावाड़ी परिसर में आयोजित समारोह की शुरुआत मंगलमय धार्मिक अनुष्ठानों से हुई। ट्रस्ट अध्यक्ष तेजराज मालानी ने सकल संघ को जन्म कल्याणक की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए भगवान नेमिनाथ के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। महामंत्री कुशलराज गुलेच्छा ने कहा कि भगवान नेमिनाथ का जीवन त्याग, वैराग्य, संयम और करुणा का अनुपम संदेश देता है, जो आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करता है। प्रचार-प्रसार संयोजक ललित डाकलिया ने बताया कि मुख्य वेदिका पर परमात्मा का सुगंधित औषधियों से अभिषेक करने का लाभ उपाध्यक्ष बाबूलाल-प्रवीण कुमार भन्साली परिवार को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही 27 जोड़ों ने सामूहिक अभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भगवान नेमिनाथ की विशाल प्रतिमा पर पुष्पों का भव्य अभिषेक रहा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं उत्साह के साथ पुष्प अर्पित कर परमात्मा के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने जीवदया, अहिंसा, त्याग, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया। धार्मिक आयोजन को और अधिक भक्तिमय बनाने में श्री जिनदत्त कुशल सूरी जैन सेवा एवं संगीत मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंडल के सनी रांका, नितेश बोहरा, ललिता पालरेचा एवं मनन बोहरा ने भावपूर्ण भजनों और मधुर संगीत की प्रस्तुति देकर संपूर्ण वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। अभिषेक के पश्चात श्रीमती पूनम कौशिक खिंवसरा परिवार द्वारा परमात्मा की आरती की गई। इस अवसर पर साध्वीवर्या ने भगवान नेमिनाथ के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए गत चौवीशी के तीसरे तीर्थंकर सगर भगवान के समय में पांचवें देवलोक के इन्द्र द्वारा भराई गई विश्व की अति प्राचीन प्रतिमा का ऐतिहासिक महत्व भी बताया। महोत्सव के दौरान तपोनिधि साध्वी जी श्री सुलक्षणा श्री जी म.सा. के 75वें जन्मदिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष रनजीत ललवानी, सहमंत्री धर्मेन्द्र संकलेचा सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि मंगलवार को खरतरगच्छ दिवस के उपलक्ष्य में ‘खरतरगच्छ के गौरवशाली गौत्र’ विषयक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

  • सेवा, करुणा और स्वावलंबन का संदेश

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी बेंगलुरु। 18 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर के दिव्य सभा मंडप में विद्या ग्रेस फाउंडेशन का वार्षिक अधिवेशन-2026 भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य एवं मंगल आशीर्वाद में आयोजित अधिवेशन में देशभर से समाजश्रेष्ठियों, समाजसेवियों, युवा कार्यकर्ताओं, विद्वानों एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। नागपुर, पुणे, दिल्ली, हिसार, मुंबई, सूरत, इंदौर और जयपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों तथा दक्षिण भारत से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अधिवेशन में भाग लेकर शिक्षा, जीवदया, करुणा, स्वास्थ्य सेवा, हथकरघा एवं स्वावलंबन के माध्यम से समाजसेवा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी महाराज, आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं शिरोमणि नव आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के चित्रों का श्रद्धापूर्वक अनावरण किया गया। इस अवसर पर श्री राकेश जी बरया, श्री मुकेश भाईजी, श्री वैभव जी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। अधिवेशन में सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं पूर्व सांसद राज बब्बर की गरिमामय उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। उन्होंने विद्या ग्रेस फाउंडेशन द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवदया एवं सामुदायिक कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित सेवा समाज में स्थायी एवं सार्थक परिवर्तन का आधार बन सकती है। पूज्य मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज की गृहस्थ अवस्था की पूज्य मातोश्री श्रीमती सुषमा जी, नागपुर, समाजश्रेष्ठी श्री महेश जी काला, श्री अनिल जी सेठी, श्री दीपक जी सेठी एवं श्री दिवाकर जी चित्तौड़ा सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। दीप प्रज्वलन के माध्यम से अज्ञान से ज्ञान, अंधकार से प्रकाश तथा स्वार्थ से परमार्थ की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया। इसके बाद पूज्य मुनिश्री के पावन चरणों का पाद प्रक्षालन किया गया। हिसार, हरियाणा से पधारे समाजश्रेष्ठी श्री आदित्य जी एवं उनके परिवार को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रद्धा और विनय से संपन्न इस मंगल अवसर ने समारोह को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। सेवा कार्यों को विस्तार देने का संकल्प अधिवेशन में विद्या ग्रेस फाउंडेशन की वार्षिक गतिविधियों, उपलब्धियों एवं आगामी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। संस्था ने शिक्षा, जीवदया एवं गौ-संरक्षण, स्वास्थ्य सेवा तथा हथकरघा एवं स्वावलंबन को प्रमुख सेवा क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में सहयोग, जरूरतमंद जीवों के संरक्षण, वंचित वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने तथा स्थानीय कारीगरों एवं महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। आगामी वर्षों में सेवा गतिविधियों को विभिन्न राज्यों तक विस्तार देने तथा अधिक से अधिक युवाओं को इन अभियानों से जोड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। पूज्य मुनिश्री ने अपने मंगल आशीर्वचन में अहंकार के स्थान पर समर्पण तथा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के स्थान पर निःस्वार्थ भावना अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने आचार्य भगवंत 108 श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणाओं का स्मरण करते हुए शिक्षा, जीवदया, गौ-संरक्षण, हथकरघा, स्वदेशी एवं स्वावलंबन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। ‘सुख की खोज’ ग्रंथ का विमोचन अधिवेशन में ‘सुख की खोज’ ग्रंथ का विशेष विमोचन भी किया गया। यह ग्रंथ पूज्य मुनिश्री के पुणे प्रवास के दौरान दिए गए जीवनोपयोगी प्रवचनों का संकलन है। इसमें वास्तविक सुख की खोज को आध्यात्मिक दृष्टि से समझाते हुए आत्मसंतोष, संयम, अपरिग्रह, आत्मानुशासन एवं निःस्वार्थ सेवा को स्थायी सुख की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रनिर्माण का संदेश 15 अगस्त के अवसर पर आयोजित अधिवेशन में स्वतंत्रता दिवस की भावना भी प्रमुखता से दिखाई दी। वक्ताओं ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वावलंबन, श्रम का सम्मान, नैतिक जीवन, सामाजिक उत्तरदायित्व और जीवमात्र के प्रति करुणा भी सशक्त राष्ट्र की आधारशिलाएं हैं। जैन दर्शन के अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम एवं करुणा जैसे मूल्यों को सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन से जोड़ते हुए राष्ट्रनिर्माण में चरित्र एवं आचरण की भूमिका पर जोर दिया गया। स्वावलंबन और सेवा को देश की प्रगति की महत्वपूर्ण शक्तियां बताया गया। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजे इस अधिवेशन को लेकर समाजबंधुओं में विशेष उत्साह रहा। समारोह के पश्चात अतिथियों एवं श्रद्धालुओं ने वात्सल्य भोजन में सहभागिता की।

  • तुकाराम मुंडे से क्यों नाराज़ थे गडकरी? पीएमओ तक पहुंचा था मामला

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी दिनांक: 18 अगस्त 2026 नागपुर। महाराष्ट्र की प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी सख्त कार्यशैली और बेबाक फैसलों के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे का कार्यकाल कई बार विवादों में रहा है। नागपुर में उनके कार्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुंडे के बीच मतभेद का मामला इतना बढ़ा कि इसकी गूंज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई थी। मामला वर्ष 2020 का है, जब नागपुर स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर गडकरी ने मुंडे की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई थी। रिपोर्टों के अनुसार, गडकरी ने पीएमओ को पत्र लिखकर तुकाराम मुंडे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। गडकरी की आपत्ति मुख्य रूप से नागपुर स्मार्ट एंड सस्टेनेबल सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद से जुड़ी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मुंडे ने इस पद का कार्यभार नियमों के विपरीत या अवैध तरीके से संभाला था। यह विवाद ऐसे समय सामने आया था, जब नागपुर में स्मार्ट सिटी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं चल रही थीं। प्रशासनिक निर्णयों और परियोजनाओं के संचालन को लेकर मतभेद ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी। मामले ने तूल पकड़ा तो मुंडे का नागपुर से तबादला कर दिया गया। उनके स्थानांतरण को लेकर भी उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हुई। तुकाराम मुंडे अपनी कड़क प्रशासनिक शैली, नियमों के सख्त पालन और अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए जाने जाते रहे हैं। वहीं, नितिन गडकरी नागपुर के विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्टों में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर दोनों के बीच पैदा हुआ विवाद विशेष रूप से चर्चा का विषय बना। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में सामने आए आरोप-प्रत्यारोप को उसी समय के प्रशासनिक एवं राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। मुंडे के खिलाफ लगाए गए आरोपों को उनके विरुद्ध अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

  • हर दिल तिरंगा, हर मन तिरंगा

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी शिमोगा। 18 अगस्त 2026। परोपकारम परिवार टीम की ओर से देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस शनिवार सुबह सूर्य पार्क योग मंदिर, रामा राव लेआउट, गुंडाप्पा शेड, शिमोगा में भक्तिभाव, उत्साह एवं देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों ने स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय पर्व के साथ-साथ परिवार एवं समाज के उत्सव के रूप में मनाते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता का संकल्प लिया। इस अवसर पर परोपकारम परिवार की ओर से एकजुट समाज, संस्कारी युवा और देशभक्ति से ओत-प्रोत नागरिक तैयार करने के संकल्प को दोहराया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव धीरे-धीरे देश की सोच को बदल सकता है। जाति, स्वार्थ, धन, पद, प्रतिष्ठा और अन्य सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान सबसे पहले एक भारतीय के रूप में करनी चाहिए। कार्यक्रम में कहा गया कि देश सुरक्षित है तो समाज, परिवार और हमारा भविष्य भी सुरक्षित है। स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान से प्राप्त आजादी को सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध के साथ जीवन जीना है। परोपकारम परिवार ने संदेश दिया कि स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रगान गाने और मिठाई बांटने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह उन वीर सपूतों को याद करने और उनके आदर्शों पर चलने का अवसर है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि तिरंगे के नीचे सभी भारतीय समान हैं। आपसी भेदभाव भूलकर मित्रता, भाईचारे और सहयोग की भावना से कंधे से कंधा मिलाकर भारत की एकता एवं अखंडता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष के साथ देशभक्ति का वातावरण बना रहा। परोपकारम परिवार का उद्देश्य समाज में बिना किसी भेदभाव के एकजुटता, संस्कार और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना तथा अखंड, सशक्त और महान भारत के निर्माण में योगदान देना है। कार्यक्रम का संदेश रहा—हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा और सबसे पहले भारतीय होने का गौरव। प्रेषक: शांतिलाल साकरिया, शिमोगा

  • तिरंगा उत्सव में गूंजे देशभक्ति के स्वर

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी बेंगलुरु। 18 अगस्त 2026। श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी ट्रस्ट के तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘तिरंगा उत्सव’ का आयोजन श्रद्धा, उत्साह और देशभक्ति के वातावरण में किया गया। गुरुदेव प. पूज्य श्री मलयप्रभ सागर जी म. सा. आदि ठाणा एवं पूज्य साध्वी जी डॉ. प्रियश्रद्धांजना श्री जी म. सा. आदि ठाणा की निश्रा में आयोजित समारोह में सकल संघ ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय ध्वजारोहण के साथ हुआ। अध्यक्ष तेजराज मालानी, तेजराज गुलेच्छा, उपाध्यक्ष बाबूलाल भन्साली, तनसुख राज गुलेच्छा, कोषाध्यक्ष रनजीत ललवानी, सहमंत्री धर्मेन्द्र संकलेचा एवं ललित डाकलिया सहित अनेक गणमान्यजनों ने ध्वजारोहण कर सकल संघ को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर महामंत्री कुशलराज गुलेच्छा ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व हमें सौहार्द, सद्भावना, एकता और देशप्रेम की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की सकारात्मक भूमिका महत्वपूर्ण है। देशभक्ति गीतों ने बांधा समां श्री जिनदत्त कुशल सूरी जैन सेवा एवं संगीत मंडल की ओर से सनी रांका, राजेन्द्र गुलेच्छा, नितेश बोहरा एवं मनन बोहरा ने देशभक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत गीतों से पूरा वातावरण देशप्रेम की भावना से सराबोर हो गया। फैंसी ड्रेस में दिखा वीरों का शौर्य समारोह में संघ के परिवारों के बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों ने जवाहरलाल नेहरू, रानी लक्ष्मीबाई, वीर योद्धा सिपाही, रानी अब्बक्का और सरदार वल्लभभाई पटेल का रूप धारण कर देश के वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं के जीवन, त्याग और शौर्य को मंच पर जीवंत कर दिया। बच्चों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह की खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम में दादावाड़ी ट्रस्ट से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समारोह का समापन राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना के साथ हुआ।

  • दिवान्दी ने जीता क्रिकेट का खिताब, 21 हजार का पुरस्कार

    भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी पाली/रोहट | 18 अगस्त 2026।पाली जिले के रोहट क्षेत्र के दिवान्दी-मुरडिया गांव में युवा गौ भगत संगठन की ओर से आयोजित तीन दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता का रोमांचक समापन हुआ। फाइनल मुकाबले में दिवान्दी की टीम ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए जोधपुर जिले की लूणी तहसील के सर गांव की टीम को हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। प्रतियोगिता में कुल 16 टीमों ने हिस्सा लिया और तीन दिनों तक खिलाड़ियों ने खेल प्रतिभा, अनुशासन एवं खेल भावना का शानदार परिचय दिया। फाइनल मुकाबले को लेकर ग्रामीणों और क्रिकेट प्रेमियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। खिताबी मुकाबले में दिवान्दी टीम की जीत में सोहन जोधा ने शानदार 50 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर निर्णायक भूमिका निभाई। उनके साथ ताराराम प्रजापत, महेंद्र गोयल, राकेश गोयल, राजेंद्र गोयल, गौतम दमामी, अशोक ढाका, मानु हंस, सम्पत बामनिया, ओमी मीणा और मुकेश पटेल सहित खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए टीम को विजयी बनाने में अहम योगदान दिया। विजेता दिवान्दी टीम को ट्रॉफी के साथ 21 हजार रुपये नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन के दौरान खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं खेलप्रेमी मौजूद रहे। आयोजकों ने प्रतियोगिता को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों, खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों का आभार जताया। समापन अवसर पर विजेता टीम सहित सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी गई।

  • स्वतंत्रता दिवस पर 200 जरूरतमंदों की हुई मुफ्त जांच

    भारतार्थ खबर। बेंगलुरु संवाददाता: धन्नाराम चौधरी बेंगलुरु 18 अगस्त 2026। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन एवं धर्मनिष्ठा सेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आरटी नगर, बेंगलुरु में निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर स्पर्श अस्पताल, हेनूर रोड, अमाया डेंटल क्लिनिक एवं ऑप्टिकल स्क्वायर कॉन्टैक्ट लेंस आई क्लिनिक के सहयोग से संपन्न हुआ। शिविर में करीब 200 लोगों ने निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन के संस्थापक प्रवीण पांडेय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व को जनसेवा और स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ने का उद्देश्य लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग करना है। शिविर में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, मजदूरों, ऑटो चालकों, घरेलू कामगारों और अन्य जरूरतमंद लोगों को विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। शिविर में बीएमआई, रक्तचाप, रैंडम ब्लड शुगर, ईसीजी, दंत जांच, नेत्र जांच तथा सामान्य चिकित्सकीय परामर्श जैसी सुविधाएं प्रदान की गईं। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर लोगों को आवश्यक परामर्श और मार्गदर्शन भी दिया। फाउंडेशन के उपाध्यक्ष राजमणि कुमार सिन्हा ने बताया कि शिविर में करीब 200 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। उन्होंने कहा कि समाज के ऐसे वर्गों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना संस्था की प्राथमिकता है, जिन्हें व्यस्त जीवन, आर्थिक कठिनाइयों या अन्य कारणों से नियमित स्वास्थ्य जांच का अवसर नहीं मिल पाता। आयोजन की व्यवस्थाओं में कोषाध्यक्ष राजेश कुमार, सीओओ नीरज शर्मा और भोलाशंकर पांडेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंजीकरण, लोगों के सहयोग और शिविर के सुचारु संचालन की जिम्मेदारियां स्वयंसेवकों ने संभालीं। सामाजिक कार्यकर्ता ए.आर. किरण एवं डॉ. कार्तिक ए. ने आयोजन स्थल उपलब्ध कराने के साथ मेडिकल स्टाफ एवं स्वयंसेवकों के लिए भोजन की व्यवस्था में भी सहयोग किया। संस्था की ओर से स्पर्श अस्पताल के नवीन, अमाया डेंटल क्लिनिक की डॉ. खुशबू एवं डॉ. शबनूर तथा ऑप्टिकल स्क्वायर आई क्लिनिक के राहिल सहित सहयोगी टीम का आभार व्यक्त किया गया। प्रवीण पांडेय ने बताया कि सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन पिछले तीन वर्षों में 15 हजार से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कर चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समय पर उपचार शुरू कराने में मददगार साबित होते हैं। फाउंडेशन के अध्यक्ष नितिन शर्मा ने कहा कि भविष्य में भी सेवा ब्रिगेड फाउंडेशन एवं धर्मनिष्ठा सेवा ट्रस्ट समाज के जरूरतमंद वर्गों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनकल्याणकारी सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि गरीब और प्रवासी मजदूरों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना संस्था की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • व्हाइटफील्ड में तिरंगे को सलामी, गूंजा ‘जय हिंद’

    भारतार्थ खबर। बेंगलुरु संवाददाता: धन्नाराम चौधरी बेंगलुरु/व्हाइटफील्ड। 18 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय राजपूताना सेवा संगठन की ओर से व्हाइटफील्ड स्थित संगठन कार्यालय में भव्य ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। समारोह में देशभक्ति, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय गौरव का उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला। मातृशक्ति सदस्यों, संगठन के राष्ट्रीय महासचिव प्रेम सिंह एवं बेंगलुरु अध्यक्ष सुनील सिंह ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के बाद उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान के साथ तिरंगे को सलामी दी और देश के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन बेंगलुरु अध्यक्ष सुनील सिंह एवं व्हाइटफील्ड टीम ने किया। समारोह में बेंगलुरु उपाध्यक्ष परमेश्वर सिंह, उत्तरी बेंगलुरु अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह, गोपाल सिंह, रिंकी सिंह, पिंकी सिंह, सुनीता सिंह, नीरज सिंह, आशुतोष सिंह, रोहन सिंह सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों के अमूल्य बलिदान और शहादत को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी असंख्य वीरों के संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कठिन संघर्ष से प्राप्त स्वतंत्रता की कीमत समझना और उसकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अभिभावकों से बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास तथा देश के वीर जवानों और शहीदों के बलिदान से परिचित कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारे, एकता और सद्भाव बनाए रखने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने देशहित एवं संगठनहित से जुड़े विचार साझा किए। समारोह के दौरान देशभक्ति गीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण में उत्साह भर दिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था की गई। समारोह का समापन “जय हिंद, वंदे मातरम्” के नारों के साथ हुआ।

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