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छोटे गांव की बेटी ललिता कुमारी बनीं एडवोकेट, बढ़ाया परिवार का मान

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 19 अग॰
  • 1 मिनट पठन
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान और फूलों की मालाओं में मुस्कुराती युवती, सफेद शर्ट वाला पुरुष साथ, भीतर का दृश्य

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी

तिरुनेलवेली। 18 अगस्त 2026। छोटे से गांव से निकलकर बेटियां आज शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। इसी कड़ी में गांव नवापुरा चोपावतान की प्रतिभाशाली बेटी ललिता कुमारी पटेल ने कड़ी मेहनत और लगन के बल पर एडवोकेट बनकर अपने परिवार, गांव और समाज का नाम रोशन किया है।


ललिता कुमारी चौधरी करतारामजी एवं जोगाजी कोदली परिवार की बेटी हैं। उनके पिता तिरुनेलवेली, तमिलनाडु में हार्डवेयर व्यवसाय करते हैं। ललिता ने अपनी 12वीं तक की शिक्षा तमिलनाडु से पूरी की। इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित VELS कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी की और वहीं से एलएलबी की डिग्री हासिल कर अधिवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।


ललिता की इस उपलब्धि के पीछे परिवार की मेहनत, संस्कार, शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच और उनके स्वयं के दृढ़ संकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि बेटियों को शिक्षा और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा सकती हैं।


ललिता कुमारी के एडवोकेट बनने पर परिवार, रिश्तेदारों एवं समाज के लोगों ने खुशी जताते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी है।

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