सूखे पर विशेष सत्र बुलाए सरकार : विजयेंद्र
- धन्नाराम चौधरी

- 1 दिन पहले
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5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने और नवली समानांतर जलाशय को प्राथमिकता देने की मांग

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com गुडादुर, 3 सितंबर 2026। कर्नाटक में सूखे और किसानों की समस्याओं को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति, किसानों की आत्महत्याओं और कृषि क्षेत्र की समस्याओं पर सदन में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। विजयेंद्र ने सूखा प्रभावित किसानों के 5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने की मांग भी सरकार के सामने रखी।
बेल्लारी चलो पदयात्रा के तीसरे दिन गुडादुर से यात्रा शुरू होने के बाद मीडिया से बातचीत में विजयेंद्र ने कहा कि सरकार को किसानों की मौजूदा स्थिति को प्राथमिकता के आधार पर देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पांच गारंटी योजनाओं को ही विकास का पर्याय मानकर चल रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आर्थिक और मौसम संबंधी संकट से जूझ रहे हैं।
190 से अधिक तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग
विजयेंद्र ने राज्य के 190 से अधिक तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सूखे की गंभीरता को देखते हुए किसानों को तत्काल राहत और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने कृषि ऋण माफी के साथ सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। विजयेंद्र ने नवली समानांतर जलाशय परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में सिंचाई और जल उपलब्धता की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है।
जलाशयों में गाद का मुद्दा उठाया
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने तुंगभद्रा क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि होस्पेट बांध में बड़ी मात्रा में गाद जमा होने से उसकी जलधारण क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के कार्यकाल में नवली समानांतर जलाशय के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की दिशा में धन उपलब्ध कराया गया था।
विजयेंद्र ने सरकार से इस परियोजना को आगे बढ़ाने और क्षेत्र के किसानों के लिए दीर्घकालिक सिंचाई समाधान तैयार करने की मांग की।
डी.के. शिवकुमार पर भी साधा निशाना

विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर किसानों की समस्याओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की वास्तविक परेशानियों को समझने के लिए सरकार को उनके बीच जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सूखे जैसी गंभीर परिस्थिति में सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को अपना अधिक समय किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए देना चाहिए। हालांकि, मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार पर लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का उल्लेख इस वक्तव्य में नहीं है।
किसानों की आत्महत्या के आंकड़ों का किया उल्लेख
विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की आत्महत्याओं के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि कर्नाटक में करीब 3,655 किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में 937, कलबुर्गी में करीब 294, रायचूर में 160 से अधिक, बीदर में 220 से अधिक और कोप्पल में 80 से अधिक किसानों की आत्महत्या का दावा किया।
इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और अवधि के संदर्भ को संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से देखना आवश्यक है। विजयेंद्र ने इन आंकड़ों का उल्लेख करते हुए सरकार से किसान संकट पर तत्काल गंभीर कदम उठाने की मांग की।
ज्वार उत्पादकों के भुगतान का मुद्दा
भाजपा नेता ने रायचूर क्षेत्र में खरीदे गए ज्वार के किसानों के कथित बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने रायथा मोर्चा के अध्यक्ष नादहल्ली के बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि किसानों का करीब 145 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है।
उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार के दौरान डेयरी फार्मिंग के लिए दी जाने वाली सब्सिडी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार किसानों को अपेक्षित सहायता उपलब्ध नहीं करा रही है।
एससीपी-टीएसपी निधि के इस्तेमाल पर सवाल
विजयेंद्र ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए निर्धारित एससीपी और टीएसपी निधि के इस्तेमाल को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन निधियों का उपयोग अन्य विभागों की योजनाओं में किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इन निधियों को उनके निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप खर्च करने की मांग की।
बेल्लारी चलो पदयात्रा में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक, सांसद, विधान परिषद सदस्य, प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। पदयात्रा का मुख्य मुद्दा सूखा, किसान संकट और राज्य सरकार की कृषि नीतियों को लेकर विपक्ष का विरोध है।
विजयेंद्र की मांगों के केंद्र में फिलहाल तीन प्रमुख मुद्दे हैं—सूखे पर विधानसभा का विशेष सत्र, किसानों के 5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण की माफी और सिंचाई परियोजनाओं को गति देना। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और किसानों को राहत देने के लिए कौन से ठोस कदम उठाती है।
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