तीन मुनिराजों का दीक्षा महोत्सव, गूंजा त्याग का संदेश
- धन्नाराम चौधरी

- 19 अग॰
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भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी
बेंगलुरु, 18 अगस्त 2026। बेंगलुरु। ज्ञानोदय परिसर, तुबरहल्ली में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज, मुनि श्री 108 विशालसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 धवलसागर जी महाराज के 23वें दीक्षा महोत्सव का भव्य आयोजन मुनि संघ के पावन सानिध्य में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अंतेवासी शिष्यों के दीक्षा दिवस पर देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बेंगलुरु पहुंचे और मुनिराजों के चरणों में नमोस्तु अर्पित कर संयममय जीवन से प्रेरणा ली।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की सहभागिता से ज्ञानोदय परिसर पूरे दिन जिनवाणी, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। समारोह केवल दीक्षा की स्मृति का उत्सव नहीं, बल्कि त्याग, संयम और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रेरणादायी अवसर बना।
नन्हे बच्चों ने दिया संयम का संदेश
महोत्सव का शुभारंभ प्रातःकालीन धार्मिक क्रियाओं, मंगलाचरण एवं जिनवाणी स्तुति से हुआ। जैन पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने संयम, वैराग्य और जैन दर्शन पर आधारित भावपूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। अभिनय एवं संगीतमय प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने संसार की असारता तथा आत्मकल्याण के लिए वीतरागता और संयम का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
समारोह में विभिन्न शहरों से आए समाजसेवियों एवं दानवीरों ने भी सहभागिता की। श्री महेश जी काला, श्री धन्य कुमार जी दिल्ली, श्री विजय कुमार जी दिल्ली, श्री भानुकरण जी दिल्ली, श्री वैभव जी परतवार पुणे, श्री नलिन जी मुंबई, श्री जिनेश जी जैन ग्रीन पार्क दिल्ली तथा छिपी टोला, आगरा की निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी श्री सुनील जी, श्री राजीव जी, श्री संजीव जी, श्री जितेंद्र जी, श्री बंटी जी, श्री मुकेश जी एवं श्री विमल जी ने अपनी श्रद्धा अर्पित की। सभी ने आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की।
परिजनों का हुआ भावपूर्ण सम्मान
समारोह का भावुक प्रसंग निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के माता-पिता एवं परिजनों के अभिनंदन का रहा। मंच पर मुनिश्री के भ्राता एवं परिजनों का श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र देकर भावभीना बहुमान किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि जब कोई संतान सांसारिक वैभव का त्याग कर संयम एवं मोक्षमार्ग को स्वीकार करती है तो उसका त्याग पूरे कुल और समाज के लिए गौरव का विषय बन जाता है। मुनिश्री के संयममय जीवन को जैन शासन की प्रभावना, आत्मकल्याण और प्राणिमात्र के मंगल के लिए समर्पित बताया गया।
अरविंद लिंबावली ने सराहा जैन समाज का सेवा भाव
समारोह में कर्नाटक के वरिष्ठ जननेता एवं पूर्व मंत्री अरविंद लिंबावली का गरिमापूर्ण स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। उन्होंने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि गोशाला की रक्षा एवं संरक्षण के लिए समाज द्वारा किया जा रहा सहयोग सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि जैन समाज अहिंसा, जीवदया और अपनी परंपराओं का दृढ़ता से पालन करते हुए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। चिकित्सा एवं जनसेवा के क्षेत्र में समाज की सक्रिय भूमिका को भी उन्होंने उल्लेखनीय बताया।
‘दीक्षा दिवस आत्मविशुद्धि का संकल्प दिवस’
धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने दीक्षा के वास्तविक स्वरूप, संयम, त्याग, गुरु भक्ति एवं आत्मविशुद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीक्षा दिवस केवल किसी तिथि का स्मरण नहीं, बल्कि आत्मा को संसार के बंधनों से ऊपर उठाकर निज स्वरूप की ओर लौटने का पावन संकल्प दिवस है।
मुनिश्री ने कहा कि धर्म बाहरी प्रदर्शन अथवा धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी वास्तविक अनुभूति अंतरंग विशुद्धि और सच्चे समर्पण से होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि 23वें दीक्षा महोत्सव को केवल उत्सव के रूप में न मनाएं, बल्कि अपने जीवन की किसी एक प्रिय वस्तु, बुरी आदत अथवा दुर्गुण का त्याग करने का संकल्प लें। यही दीक्षा महोत्सव की वास्तविक सार्थकता होगी।
‘डूबो मत, लगाओ डुबकी’ के स्वाध्याय का आह्वान
मंगल प्रवचन में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की कृति ‘डूबो मत लगाओ डुबकी’ के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं प्रत्येक जैन गृहस्थ के घर में इसकी स्थापना का संदेश दिया गया। मुनिश्री ने कहा कि यह कृति आत्मचिंतन और अध्यात्म की गहराइयों में उतरने की प्रेरणा देती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित स्वाध्याय का आग्रह करते हुए कहा कि इससे आचार्यश्री के विचार और संस्कार आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेंगे।
महोत्सव के दौरान मुनि संघ के दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजे इस आयोजन में समाजबंधुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। समापन अवसर पर अतिथियों एवं श्रद्धालुओं ने वात्सल्य भोजन में शामिल होकर सामूहिक आत्मीयता का अनुभव किया।
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