top of page
भारतार्थ-logo

शिव महिमा के बीच गूंजा राम जन्मोत्सव

  • लेखक की तस्वीर: Ashok kumar Singh
    Ashok kumar Singh
  • 1 दिन पहले
  • 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता अशोक कुमार सिंह Bhaarataarth.com बेंगलुरु, 3 सितंबर 2026। फूलों की नगरी बेंगलुरु में प्रिंसेज श्राइन, पैलेस ग्राउंड के गेट नंबर-9 पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। परम पूज्य श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से भगवान शिव की महिमा और प्रभु श्रीराम के दिव्य जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य यजमान द्वारा व्यासपीठ के पूजन एवं आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात कथाव्यास ने गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के दोहों और चौपाइयों के माध्यम से भगवान शिव की महिमा तथा श्रीरामावतार के प्रसंगों का भावपूर्ण विवेचन किया।


भक्ति से निर्मल होता है मन


कथा के प्रथम सत्र में कथाव्यास ने भगवान शिव के अलौकिक स्वरूप और उनकी भक्ति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल से शरीर की बाहरी शुद्धि संभव है, लेकिन मन और अंतरात्मा की निर्मलता का मार्ग ईश्वर की सच्ची भक्ति से होकर गुजरता है।


उन्होंने कैलास पर्वत पर भगवान शिव द्वारा माता पार्वती के संशय का समाधान करते हुए श्रीराम कथा के रहस्य का वर्णन किए जाने वाले प्रसंग का उल्लेख किया। कथाव्यास ने कहा कि परमात्मा एक ही है, जो निर्गुण-निराकार स्वरूप में भी है और भक्तों के प्रेम से सगुण-साकार रूप भी धारण करता है। धर्म की रक्षा और सज्जनों के कल्याण के लिए भगवान समय-समय पर विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं।


पुत्रकामेष्टि यज्ञ से राम जन्म तक का भावपूर्ण प्रसंग


कथा के द्वितीय सत्र में अयोध्या नरेश राजा दशरथ के पुत्रकामेष्टि यज्ञ का प्रसंग सुनाया गया। संतान प्राप्ति की कामना से गुरु वशिष्ठ की प्रेरणा पर ऋष्यशृंग ऋषि के आचार्यत्व में यज्ञ का आयोजन किया गया।


कथा के अनुसार यज्ञ पूर्ण होने पर अग्निदेव दिव्य प्रसाद लेकर प्रकट हुए। राजा दशरथ ने प्रसाद स्वरूप प्राप्त चरु को माता कौशल्या, माता कैकेयी और माता सुमित्रा में श्रद्धापूर्वक वितरित किया। इसके बाद श्रीराम जन्म की कथा के साथ संपूर्ण पंडाल भक्ति और उल्लास के वातावरण में डूब गया।


सोहर गीतों से गूंज उठा कथा पंडाल


जैसे ही प्रभु श्रीराम के जन्म का प्रसंग आया, कथा स्थल भक्ति संगीत और मंगलध्वनियों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और सोहर गीतों की मधुर प्रस्तुतियों पर भक्तिमय उल्लास का वातावरण बन गया। अनेक श्रद्धालु भजन और मंगल गीतों की धुन पर झूमते नजर आए।


सांस्कृतिक चेतना और मर्यादित जीवन का संदेश


आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री शैलेश मिश्रा ने कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।


उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग की प्रेरणा देता है। युवाओं को इन आदर्शों से जोड़कर उन्हें जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से परिवार सहित कथा में शामिल होकर पुण्य लाभ लेने की अपील की।


ट्रस्ट के सचिव श्री रोहित उपाध्याय ने बताया कि कथा के दूसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा श्रवण किया। उनके अनुसार, लगभग 2,000 भक्तों की उपस्थिति ने आयोजन के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह को दर्शाया।


अगले दिनों में विवाह प्रसंगों की तैयारी


आयोजकों के अनुसार कथा के आगामी सत्रों में भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह प्रसंग सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। वहीं, श्रीराम कथा के चौथे दिन कथावाचक श्री प्रवीण पांडे जी द्वारा धनुष भंग एवं श्रीसीताराम विवाह प्रसंग का वर्णन किए जाने की जानकारी दी गई है।


आयोजन की व्यवस्थाओं में श्री शैलेश मिश्रा, श्री रोहित उपाध्याय, श्री धीरज राज, श्री आदेश, श्रीमती गौरी मिश्रा, श्री प्रवीण पांडेय, श्री लाल बाबू पांडेय, श्री संजय सिंह उज्जैन, श्री प्रेम प्रकाश पांडे सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page