पाकिस्तान में 100 साल पुराना मंदिर ढहाने पर भारत सख्त, जांच की मांग
- धन्नाराम चौधरी

- 1 दिन पहले
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पाकिस्तान में 100 साल पुराना मंदिर ढहाने पर भारत सख्त, जांच की मांग

भारतार्थ खबर Bhaarataarth.com नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में एक सौ वर्ष से अधिक पुराने हिंदू मंदिर के ढहाए जाने की खबरों पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारत ने पाकिस्तान सरकार से घटना की तत्काल जांच कराने और अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए नारोवाल के सिराज गांव स्थित ऐतिहासिक हिंदू पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत अल्पसंख्यक समुदाय के करीब एक सदी पुराने धार्मिक स्थल के साथ कथित तोड़फोड़ की स्पष्ट रूप से निंदा करता है।
धार्मिक स्थल की सुरक्षा पर उठे सवाल
जायसवाल के अनुसार, किसी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की सुरक्षा में स्थानीय प्रशासन की कथित विफलता गंभीर चिंता का विषय है। भारत ने कहा कि ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और उनके पूजा स्थलों के संरक्षण को लेकर सवाल खड़े करती हैं।
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मंदिर गिराने की वजह पर अलग-अलग दावे
लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर सिराज गांव में स्थित यह मंदिर 21 अगस्त को ढहाए जाने की जानकारी सामने आई है। घटना को लेकर पाकिस्तान में अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
अल्पसंख्यक संगठनों का आरोप है कि धार्मिक कट्टरपंथियों ने मंदिर की जमीन को कथित तौर पर पास स्थित मदरसे के परिसर में शामिल करने के उद्देश्य से इसे निशाना बनाया। हालांकि, पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) का दावा है कि भारी बारिश के कारण मंदिर की इमारत ढह गई।
इन परस्पर विरोधी दावों के कारण घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि मंदिर प्राकृतिक कारणों से क्षतिग्रस्त हुआ या उसे जानबूझकर गिराया गया।
अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकार का मुद्दा
भारत ने इस घटना को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों और पूजा स्थलों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक प्रश्न के रूप में उठाया है। नई दिल्ली का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा संबंधित सरकार की जिम्मेदारी है और ऐतिहासिक पूजा स्थलों को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाया जाना चाहिए।
फिलहाल घटना की परिस्थितियों और मंदिर के ढहने के कारणों को लेकर पाकिस्तान की ओर से सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। भारत ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा को लेकर वह अपनी चिंता पाकिस्तान के समक्ष उठाता रहेगा।
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