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हर दिल तिरंगा, हर मन तिरंगा

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 19 अग॰
  • 2 मिनट पठन
विषाला सूर्य पार्क में पारोपकारम 1015 के लोग तिरंगे संग समूह फोटो, नीचे Independence Day 2026 लिखा है

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी शिमोगा। 18 अगस्त 2026। परोपकारम परिवार टीम की ओर से देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस शनिवार सुबह सूर्य पार्क योग मंदिर, रामा राव लेआउट, गुंडाप्पा शेड, शिमोगा में भक्तिभाव, उत्साह एवं देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में परिवार के सदस्यों ने स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय पर्व के साथ-साथ परिवार एवं समाज के उत्सव के रूप में मनाते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता का संकल्प लिया।


इस अवसर पर परोपकारम परिवार की ओर से एकजुट समाज, संस्कारी युवा और देशभक्ति से ओत-प्रोत नागरिक तैयार करने के संकल्प को दोहराया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव धीरे-धीरे देश की सोच को बदल सकता है। जाति, स्वार्थ, धन, पद, प्रतिष्ठा और अन्य सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान सबसे पहले एक भारतीय के रूप में करनी चाहिए।


कार्यक्रम में कहा गया कि देश सुरक्षित है तो समाज, परिवार और हमारा भविष्य भी सुरक्षित है। स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान से प्राप्त आजादी को सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध के साथ जीवन जीना है।


परोपकारम परिवार ने संदेश दिया कि स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रगान गाने और मिठाई बांटने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह उन वीर सपूतों को याद करने और उनके आदर्शों पर चलने का अवसर है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।


वक्ताओं ने कहा कि तिरंगे के नीचे सभी भारतीय समान हैं। आपसी भेदभाव भूलकर मित्रता, भाईचारे और सहयोग की भावना से कंधे से कंधा मिलाकर भारत की एकता एवं अखंडता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष के साथ देशभक्ति का वातावरण बना रहा।


परोपकारम परिवार का उद्देश्य समाज में बिना किसी भेदभाव के एकजुटता, संस्कार और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना तथा अखंड, सशक्त और महान भारत के निर्माण में योगदान देना है। कार्यक्रम का संदेश रहा—हर घर तिरंगा, हर मन तिरंगा और सबसे पहले भारतीय होने का गौरव।


प्रेषक: शांतिलाल साकरिया, शिमोगा

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