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सेवा, करुणा और स्वावलंबन का संदेश

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 19 अग॰
  • 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी बेंगलुरु। 18 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर के दिव्य सभा मंडप में विद्या ग्रेस फाउंडेशन का वार्षिक अधिवेशन-2026 भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य एवं मंगल आशीर्वाद में आयोजित अधिवेशन में देशभर से समाजश्रेष्ठियों, समाजसेवियों, युवा कार्यकर्ताओं, विद्वानों एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।


नागपुर, पुणे, दिल्ली, हिसार, मुंबई, सूरत, इंदौर और जयपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों तथा दक्षिण भारत से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अधिवेशन में भाग लेकर शिक्षा, जीवदया, करुणा, स्वास्थ्य सेवा, हथकरघा एवं स्वावलंबन के माध्यम से समाजसेवा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी महाराज, आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं शिरोमणि नव आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के चित्रों का श्रद्धापूर्वक अनावरण किया गया। इस अवसर पर श्री राकेश जी बरया, श्री मुकेश भाईजी, श्री वैभव जी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।


अधिवेशन में सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं पूर्व सांसद राज बब्बर की गरिमामय उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। उन्होंने विद्या ग्रेस फाउंडेशन द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवदया एवं सामुदायिक कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित सेवा समाज में स्थायी एवं सार्थक परिवर्तन का आधार बन सकती है।


पूज्य मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज की गृहस्थ अवस्था की पूज्य मातोश्री श्रीमती सुषमा जी, नागपुर, समाजश्रेष्ठी श्री महेश जी काला, श्री अनिल जी सेठी, श्री दीपक जी सेठी एवं श्री दिवाकर जी चित्तौड़ा सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। दीप प्रज्वलन के माध्यम से अज्ञान से ज्ञान, अंधकार से प्रकाश तथा स्वार्थ से परमार्थ की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया।


इसके बाद पूज्य मुनिश्री के पावन चरणों का पाद प्रक्षालन किया गया। हिसार, हरियाणा से पधारे समाजश्रेष्ठी श्री आदित्य जी एवं उनके परिवार को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रद्धा और विनय से संपन्न इस मंगल अवसर ने समारोह को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।


सेवा कार्यों को विस्तार देने का संकल्प


अधिवेशन में विद्या ग्रेस फाउंडेशन की वार्षिक गतिविधियों, उपलब्धियों एवं आगामी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। संस्था ने शिक्षा, जीवदया एवं गौ-संरक्षण, स्वास्थ्य सेवा तथा हथकरघा एवं स्वावलंबन को प्रमुख सेवा क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया।


आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में सहयोग, जरूरतमंद जीवों के संरक्षण, वंचित वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने तथा स्थानीय कारीगरों एवं महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। आगामी वर्षों में सेवा गतिविधियों को विभिन्न राज्यों तक विस्तार देने तथा अधिक से अधिक युवाओं को इन अभियानों से जोड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।


पूज्य मुनिश्री ने अपने मंगल आशीर्वचन में अहंकार के स्थान पर समर्पण तथा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के स्थान पर निःस्वार्थ भावना अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने आचार्य भगवंत 108 श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणाओं का स्मरण करते हुए शिक्षा, जीवदया, गौ-संरक्षण, हथकरघा, स्वदेशी एवं स्वावलंबन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।


‘सुख की खोज’ ग्रंथ का विमोचन


अधिवेशन में ‘सुख की खोज’ ग्रंथ का विशेष विमोचन भी किया गया। यह ग्रंथ पूज्य मुनिश्री के पुणे प्रवास के दौरान दिए गए जीवनोपयोगी प्रवचनों का संकलन है। इसमें वास्तविक सुख की खोज को आध्यात्मिक दृष्टि से समझाते हुए आत्मसंतोष, संयम, अपरिग्रह, आत्मानुशासन एवं निःस्वार्थ सेवा को स्थायी सुख की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।


स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रनिर्माण का संदेश


15 अगस्त के अवसर पर आयोजित अधिवेशन में स्वतंत्रता दिवस की भावना भी प्रमुखता से दिखाई दी। वक्ताओं ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वावलंबन, श्रम का सम्मान, नैतिक जीवन, सामाजिक उत्तरदायित्व और जीवमात्र के प्रति करुणा भी सशक्त राष्ट्र की आधारशिलाएं हैं।


जैन दर्शन के अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम एवं करुणा जैसे मूल्यों को सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन से जोड़ते हुए राष्ट्रनिर्माण में चरित्र एवं आचरण की भूमिका पर जोर दिया गया। स्वावलंबन और सेवा को देश की प्रगति की महत्वपूर्ण शक्तियां बताया गया।


धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजे इस अधिवेशन को लेकर समाजबंधुओं में विशेष उत्साह रहा। समारोह के पश्चात अतिथियों एवं श्रद्धालुओं ने वात्सल्य भोजन में सहभागिता की।

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