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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • कर्नाटक में ‘गारंटी’ पर चुनाव आयोग की सख्ती

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। कर्नाटक में उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस सरकार की चर्चित ‘गारंटी योजनाएं’ राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गई हैं। भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई) ने इन योजनाओं के तहत कथित रूप से धन वितरण को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है, जिससे सियासी माहौल गरमा गया है। आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को 2 अप्रैल 2026 को पत्र भेजकर पूछा है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान बिना पूर्व अनुमति लाभार्थियों को धनराशि जारी करने का निर्णय किस स्तर पर और किन अधिकारियों द्वारा लिया गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी योजना के तहत धनराशि अभी तक वितरित नहीं हुई है, तो उसे आयोग की अनुमति के बिना जारी न किया जाए। मामला उस समय तूल पकड़ गया जब कांग्रेस ने मंगलवार को इस पत्र को सार्वजनिक किया। जानकारी के अनुसार, दावणगेरे और बागलकोट जिलों में ‘गृह लक्ष्मी’, ‘युवा निधि’, ‘शक्ति’, ‘गृह ज्योति’ और ‘अन्न भाग्य’ जैसी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को हाल में भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। चुनाव आयोग ने इसे आचार संहिता लागू होने के दौरान नई वित्तीय लाभ वितरण की श्रेणी में माना है, जो नियमों के विरुद्ध है। राजनीतिक मोर्चे पर भी इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ लिया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की साजिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा गरीबों, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को मिलने वाले लाभों को रोकने की कोशिश कर रही है। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि मार्च माह की किस्तें पहले ही समय पर वितरित की जा चुकी हैं और अप्रैल की राशि उपचुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जारी की जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता इस मुद्दे पर अपना निर्णय वोट के जरिए देगी। उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में ‘गारंटी योजनाएं’ कांग्रेस सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में रही हैं और इन पर चुनाव आयोग की सख्ती से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यह विवाद न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता बल्कि चुनावी नैतिकता पर भी व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। फिलहाल, सभी की नजरें चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई और राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि ‘गारंटी राजनीति’ का यह मुद्दा चुनावी नतीजों को किस हद तक प्रभावित करता है।

  • सीजफायर पर पाकिस्तान का दावा फेल, लेबनान पर जारी रहेगा इजरायल का एक्शन

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) इजरायल। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। जहां एक ओर पाकिस्तान खुद को इस संघर्षविराम का बड़ा मध्यस्थ बताने में जुटा था, वहीं इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीनी हकीकत इससे अलग है। दरअसल, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाइयों को 15 दिनों के लिए रोकने की घोषणा के बाद क्षेत्र में अस्थायी शांति की उम्मीद जगी है। इस प्रस्ताव को ईरान ने भी सशर्त स्वीकार करने के संकेत दिए हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यदि उन पर हमले बंद होते हैं, तो तेहरान भी सैन्य कार्रवाई रोक देगा। इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने दावा किया कि उनके प्रयासों से अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम संभव हो सका। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि यह सीजफायर लेबनान समेत पूरे क्षेत्र पर लागू होगा। हालांकि, पाकिस्तान का यह दावा ज्यादा देर टिक नहीं सका। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह संघर्षविराम केवल ईरान तक सीमित है और लेबनान पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजरायल, अमेरिका के उस निर्णय का समर्थन करता है जिसके तहत ईरान के खिलाफ हमलों को अस्थायी रूप से रोका गया है। लेकिन यह समर्थन कुछ शर्तों के साथ है, जिनमें प्रमुख रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना और क्षेत्र में सभी प्रकार के हमलों को रोकना शामिल है। बयान में यह भी साफ किया गया कि लेबनान के मोर्चे पर इजरायल की कार्रवाई जारी रहेगी और वहां किसी भी प्रकार का युद्धविराम लागू नहीं होगा। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है| विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा किया गया व्यापक सीजफायर का दावा जल्दबाजी और कूटनीतिक अतिशयोक्ति का उदाहरण है। इजरायल की स्पष्ट प्रतिक्रिया ने यह जाहिर कर दिया कि जमीनी हालात कहीं अधिक जटिल हैं और हर मोर्चे की स्थिति अलग-अलग है। कुल मिलाकर, जहां एक ओर अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की संभावना बनी है, वहीं दूसरी ओर लेबनान को लेकर इजरायल का सख्त रुख यह दर्शाता है कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति अभी दूर की बात है।

  • बंगाल चुनाव: कांग्रेस का बड़ा वादा, महिलाओं को ₹2000 और किसानों को ₹15000

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मंगलवार को अपना बहुप्रतीक्षित घोषणापत्र जारी कर दिया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में जारी इस घोषणापत्र में आर्थिक मजबूती, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा को मुख्य फोकस बनाया गया है। घोषणापत्र में कांग्रेस ने महिलाओं और किसानों के लिए सीधे आर्थिक सहायता का बड़ा वादा किया है। पार्टी ने सत्ता में आने पर महिलाओं को हर महीने ₹2000 और किसानों को सालाना ₹15,000 देने की घोषणा की है। इसके साथ ही किसानों के लिए बेहतर खरीद व्यवस्था और मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है। रोजगार और युवाओं पर फोकस कांग्रेस ने युवाओं को साधने के लिए बड़े स्तर पर रोजगार सृजन की बात कही है। घोषणापत्र में सभी सरकारी रिक्त पदों को भरने और नए अवसर पैदा करने का वादा किया गया है। पार्टी का दावा है कि इससे राज्य में बढ़ती बेरोजगारी पर लगाम लगेगी। AI और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देते हुए कांग्रेस ने हर जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर विकसित करने की योजना पेश की है। साथ ही स्थानीय स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप भी रखा गया है। कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पार्टी ने ‘कानून का राज’ स्थापित करने का संकल्प लिया है। घोषणापत्र में कहा गया है कि दोषी व्यक्ति को उसके पद या राजनीतिक संबद्धता के आधार पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट, मुफ्त शिक्षा और ₹10 लाख तक का सरकारी स्वास्थ्य बीमा देने का वादा भी किया गया है। भ्रष्टाचार पर सख्ती का दावा कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को गंभीर चुनौती बताते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। पार्टी का कहना है कि हालिया मामलों में बड़ी नकदी बरामदगी जैसे घटनाक्रम लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं, जिन पर कठोर कदम उठाए जाएंगे। स्टार प्रचारकों की सूची जारी चुनावी अभियान को धार देने के लिए कांग्रेस ने 40 स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी की है। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं, जो राज्यभर में प्रचार की कमान संभालेंगे। अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कांग्रेस ने इस बार पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी का मानना है कि पिछले चुनावों में गठबंधन का प्रयोग सफल नहीं रहा और इससे संगठन कमजोर हुआ। पार्टी प्रभारी गुलाम अहमद मीर के अनुसार, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। घटता जनाधार बनी चुनौती कांग्रेस के सामने राज्य में अपनी खोई जमीन वापस पाने की बड़ी चुनौती है। 2016 में 44 सीटें जीतने वाली पार्टी 2021 में शून्य पर सिमट गई थी। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने तेजी से उभरते हुए मुख्य विपक्ष की भूमिका हासिल कर ली है। ऐसे में कांग्रेस का यह घोषणापत्र न केवल चुनावी वादों का दस्तावेज है, बल्कि राज्य में अपनी राजनीतिक वापसी की रणनीति का अहम हिस्सा भी माना जा रहा है। अब देखना होगा कि मतदाता इन वादों पर कितना भरोसा जताते हैं और चुनावी नतीजों में इसका कितना असर दिखाई देता हैं।

  • तमिलनाडु में सियासी गर्मी, मोदी सक्रिय—राहुल की दूरी पर सवाल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में आक्रामक चुनावी अभियान चलाते हुए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राज्य में अब तक की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मोदी का लगातार दौरा, प्रचार में तेजी पिछले दो महीनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन बार तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं। उनकी जनसभाओं में विकास, केंद्र की योजनाओं और क्षेत्रीय संतुलन को प्रमुख मुद्दा बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 को वे नागरकोइल में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में माहौल बनाने की रणनीति पर काम होगा। भाजपा इस बार दक्षिण भारत में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। राहुल की दूरी से उठे सवाल इसके विपरीत कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अब तक तमिलनाडु में चुनाव प्रचार से दूर रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति को लेकर यह अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक 2021 के विधानसभा चुनाव की तुलना करते हुए बताते हैं कि उस समय राहुल गांधी ने काफी पहले ही राज्य में सक्रियता दिखा दी थी और लगातार जनसभाएं की थीं। पुडुचेरी में दिखी दूरी हाल ही में पुडुचेरी में चुनाव प्रचार के दौरान यह दूरी और स्पष्ट नजर आई। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सहयोगी डीएमके और उसके नेता एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया। दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन एम.के. स्टालिन भी पुडुचेरी में मौजूद थे, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम इस तरह तय किए गए कि आमना-सामना न हो सके। राहुल गांधी ने सुबह प्रचार किया, जबकि स्टालिन शाम को पहुंचे—इस राजनीतिक दूरी ने गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीट बंटवारे से बढ़ी खटास? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दूरी सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच हुई खींचतान का परिणाम हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, चुनावी रणनीति और सीटों के बंटवारे पर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद सामने आए थे, जिनका असर अब सार्वजनिक रूप से दिखने लगा है। पार्टियों की सफाई हालांकि डीएमके ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि कार्यक्रम पहले से तय थे, इसलिए संयुक्त रैली संभव नहीं हो सकी। पार्टी के नेताओं का दावा है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के शीर्ष नेता एक साथ मंच साझा करेंगे। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का तमिलनाडु दौरा अभी तय होना बाकी है, लेकिन संभावना है कि वे 10 अप्रैल 2026 के बाद राज्य में चुनाव प्रचार शुरू करेंगे। चुनावी समीकरण पर असर तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस-डीएमके गठबंधन लंबे समय से प्रभावी रहा है, लेकिन इस बार दोनों दलों के बीच दिख रही दूरी विपक्षी गठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकती है। दूसरी ओर भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाकर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी और एम.के. स्टालिन एक साथ मंच पर नजर आते हैं या फिर यह दूरी चुनावी नतीजों पर भी असर डालती है। फिलहाल तमिलनाडु का सियासी रण पूरी तरह से गर्म हो चुका है और हर दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुका है।

  • खरगे पर टिप्पणी से सियासी बवाल, राहुल का तीखा हमला

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर न सिर्फ खरगे का, बल्कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों का भी अपमान किया है। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि एक वरिष्ठ दलित नेता के प्रति इस तरह की भाषा “निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य” है। उन्होंने लिखा कि खरगे देश के एक अनुभवी, सम्मानित और जनप्रिय नेता हैं, जिनका राजनीतिक कद और योगदान अतुलनीय है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि देश के करोड़ों एससी-एसटी समाज के लोगों का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा और सोच भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की “पुरानी और सुनियोजित मानसिकता” को दर्शाती है। उनके अनुसार, जब-जब कोई दलित नेता मुखर होकर अपनी बात रखता है, तब-तब उसे व्यक्तिगत हमलों का सामना करना पड़ता है। कांग्रेस नेताओं द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में असम के मुख्यमंत्री कथित तौर पर खरगे के लिए ‘पागल’ शब्द का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं, जिसे लेकर विवाद और गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप भी लगाया है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या वे अपने मुख्यमंत्री की इस भाषा का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की चुप्पी मजबूरी नहीं, बल्कि सहमति का संकेत है। यदि देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर हमला हो और प्रधानमंत्री मौन रहें, तो यह उनकी जिम्मेदारी से बचना ही नहीं, बल्कि उस अपमान में भागीदारी भी है।” इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां कांग्रेस इस मुद्दे को सामाजिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर उठा रही है, वहीं भाजपा की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई राज्यों में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं।

  • बंगाल में “विकास बनाम ध्रुवीकरण” की जंग तेज, कांग्रेस ने पेश किया नया मॉडल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच सियासी बयानबाज़ी अपने चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि बंगाल को अब विकास और रोजगार केंद्रित मॉडल की जरूरत है। घोषणापत्र जारी करते हुए खरगे ने कहा कि राज्य की जनता के सामने तीन विकल्प हैं—तृणमूल कांग्रेस का “भ्रष्टाचार आधारित शासन”, भाजपा की “ध्रुवीकरण की राजनीति” और कांग्रेस का “कल्याण, रोजगार व सुधार आधारित मॉडल”। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीति समुदायों के बीच विभाजन पर आधारित है और वे इसी आधार पर सत्ता हासिल करना चाहते हैं। खड़गे ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि वह बंगाल की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार जैसे मुद्दों पर बात नहीं करती, बल्कि डर और नफरत की राजनीति पर निर्भर है। वहीं, उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस सरकार को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 15 वर्षों के शासन के बावजूद राज्य में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। घोषणापत्र के प्रमुख वादे कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कई लोकलुभावन और विकासोन्मुखी योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें महिलाओं को प्रतिमाह 2,000 रुपये का अनुदान, किसानों को सालाना 15,000 रुपये की सहायता, प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन शामिल हैं। पार्टी ने हर जिले में कृत्रिम मेधा (AI) प्रशिक्षण केंद्र खोलने और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए “बंगाल रोजगार गारंटी मिशन” शुरू करने का भी वादा किया है। आर्थिक गिरावट और पलायन पर चिंता खड़गे ने कहा कि कभी निवेश और रोजगार का केंद्र रहा कोलकाता आज युवाओं के पलायन का प्रतीक बन गया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के युवा बेहतर अवसरों की तलाश में बेंगलूरु, पुणे, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर जा रहे हैं, जो राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ने का दांव करीब दो दशकों बाद कांग्रेस ने बंगाल में सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इसे “नई ऊर्जा का संचार” बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के साथ-साथ जनता के सामने कांग्रेस को एक मजबूत विकल्प के रूप में प्रस्तुत करेगा। सांस्कृतिक मुद्दों पर भी टकराव रमेश ने भाजपा पर सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी राष्ट्रगान और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। इस संदर्भ में उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला तय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल में मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है, जहां सत्तारूढ़ टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। ऐसे में “विकास बनाम ध्रुवीकरण” का मुद्दा चुनावी विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है।

  • ड्राफ्ट ट्वीट से घिरा पाकिस्तान, सीजफायर के बीच उठे बड़े सवाल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) इस्लामाबाद। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अचानक घोषित सीजफायर ने जहां दुनिया को राहत दी है, वहीं पाकिस्तान की कूटनीतिक साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जिनका एक सोशल मीडिया पोस्ट अब अंतरराष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। सीजफायर की घोषणा और पाकिस्तान की सक्रियता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निर्धारित समयसीमा समाप्त होने से पहले ईरान-अमेरिका विवाद पर सीजफायर का ऐलान किया। ट्रंप के अनुसार, कई प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और आगे की बातचीत इस्लामाबाद में होने की संभावना है। इस बीच पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ की भूमिका में पेश करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप से अपील की कि ईरान को दी गई डेडलाइन बढ़ाई जाए और कूटनीति को अवसर दिया जाए। साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की भी अपील की, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। ‘ड्राफ्ट’ शब्द ने बढ़ाया विवाद विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया यूजर्स ने शरीफ के पोस्ट की एडिट हिस्ट्री में एक चौंकाने वाला विवरण देखा। शुरुआती संस्करण में पोस्ट के शीर्ष पर लिखा था—“ड्राफ्ट - पाकिस्तान के पीएम का संदेश एक्स पर”। यह एक साधारण तकनीकी भूल थी या कुछ और—यही अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है। कूटनीतिक हलकों में इस ‘ड्राफ्ट’ शब्द ने संदेह को जन्म दिया। आलोचकों का कहना है कि किसी प्रधानमंत्री के आधिकारिक संदेश में इस तरह का लेबल होना असामान्य है और यह संकेत दे सकता है कि संदेश पहले से तैयार या कहीं और से निर्देशित था। बाहरी प्रभाव के आरोप तेज सोशल मीडिया पर कई यूजर्स और विश्लेषकों ने आरोप लगाया कि यह संदेश संभवतः किसी बाहरी शक्ति—यहां तक कि अमेरिकी तंत्र—द्वारा तैयार किया गया हो सकता है। कुछ ने इसे पाकिस्तान की “स्क्रिप्टेड डिप्लोमेसी” का उदाहरण बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा ड्राफ्ट में करना असामान्य है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि संदेश किसी टीम या बाहरी स्रोत द्वारा तैयार किया गया था। पाकिस्तान की छवि पर असर हालांकि इस बात का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है कि यह संदेश पाकिस्तान के बाहर लिखा गया था, लेकिन इस घटना ने उसकी कूटनीतिक विश्वसनीयता को झटका जरूर दिया है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल वास्तविकता ही नहीं, बल्कि धारणा भी महत्वपूर्ण होती है। विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला पाकिस्तान के भीतर लंबे समय से चले आ रहे सत्ता संतुलन—सिविलियन सरकार, सैन्य प्रतिष्ठान और बाहरी प्रभावों—पर फिर से बहस छेड़ रहा है। ईरान-अमेरिका सीजफायर के बीच पाकिस्तान खुद को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता था, लेकिन एक ‘ड्राफ्ट’ शब्द ने उसकी रणनीति पर पानी फेर दिया। अब सवाल केवल एक पोस्ट का नहीं, बल्कि उस नियंत्रण का है, जो किसी देश की विदेश नीति और संदेश पर होना चाहिए। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल युग में एक छोटी सी चूक भी वैश्विक स्तर पर बड़े राजनीतिक अर्थ निकाल सकती है।

  • बंगाल चुनाव में सियासी चुनौती, टीएमसी नेता का बीजेपी को खुला ऐलान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। चुनावी सरगर्मियों के बीच अब जुबानी जंग ने नया मोड़ ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भारतीय जनता पार्टी को एक बेहद असामान्य और चर्चित चुनौती दे डाली है। कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान ओ'ब्रायन ने दावा किया कि राजधानी की सभी 11 विधानसभा सीटों पर टीएमसी की जीत पूरी तरह तय है। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी इन सीटों में से एक भी सीट जीतने में कामयाब होती है, तो उनकी पार्टी का एक सांसद सार्वजनिक रूप से अपना सिर मुंडवा लेगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह शर्त कौन सा सांसद पूरी करेगा। कोलकाता से आगे बढ़ी चुनौती ओ'ब्रायन का यह आत्मविश्वास सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जिलों को भी अपनी चुनौती में शामिल करते हुए दावा किया कि इन क्षेत्रों की क्रमशः 16 और 31 सीटों पर भी बीजेपी खाता नहीं खोल पाएगी। उनका कहना है कि यदि इन इलाकों में भी बीजेपी एक सीट जीत लेती है, तो वही शर्त लागू होगी। हालांकि उत्तर 24 परगना को लेकर उन्होंने थोड़ा अलग रुख अपनाया और माना कि वहां बीजेपी को 3-4 सीटें मिल सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने हालिया ओपिनियन पोल्स को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोप लगाया कि ये सर्वे जानबूझकर टीएमसी की स्थिति को कमजोर दिखाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। मतदाता सूची पर भी गरमाया विवाद चुनावी बयानबाजी के बीच टीएमसी ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। पार्टी का आरोप है कि नई मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। टीएमसी का दावा है कि यह कदम कुछ विशेष वर्गों को मतदान से वंचित करने की साजिश है। इस मुद्दे को लेकर डेरेक ओ'ब्रायन और सागरिका घोष के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने की तैयारी में है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि आयोग से मिलने का समय नहीं दिया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। चुनाव से पहले तेज होती बयानबाजी पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीखे बयान और आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार चुनाव से पहले इस तरह की खुली चुनौती ने सियासी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी नतीजे इस दावे और चुनौती को किस हद तक सही या गलत साबित करते हैं।

  • बिहार का नया सीएम कौन? 15 को शपथ की तैयारी, सम्राट नाम पर चर्चा तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना। बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सियासी गलियारों से मिल रही जानकारी के मुताबिक राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। सूत्रों का दावा है कि खरमास समाप्त होने के बाद 15 तारीख को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम को भव्य स्वरूप देने की योजना है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है। आयोजन के स्तर से संकेत मिलते हैं कि भाजपा इस मौके को राजनीतिक संदेश देने के रूप में भी देख रही है। सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे? सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा नेतृत्व के बीच हुई बातचीत के बाद सम्राट चौधरी का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है। कहा जा रहा है कि दोनों दलों के बीच इस नाम पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं। नीतीश कुमार भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में सम्राट चौधरी के प्रति भरोसा जताते दिखाई दिए हैं, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और जदयू के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसा चेहरा चुना जा सकता है, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो। सम्राट चौधरी को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। स्टार प्रचारक सूची में भी संकेत हाल ही में जारी चुनावी गतिविधियों में बिहार भाजपा की ओर से सम्राट चौधरी को प्रमुख चेहरा बनाकर पेश किया गया है। उन्हें स्टार प्रचारकों में शामिल किया जाना भी राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। इससे यह चर्चा और तेज हो गई है कि पार्टी उन्हें बड़े रोल के लिए तैयार कर रही है। सोशल मीडिया पर ‘दावेदारी’ पर रोक इसी बीच भाजपा ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताकर सोशल मीडिया पर प्रचार न करे। पार्टी ने इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए अनुशासन बनाए रखने को कहा है। ‘सरप्राइज फैक्टर’ अब भी कायम हालांकि, भाजपा के पिछले फैसलों को देखते हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है। पार्टी कई राज्यों में अप्रत्याशित चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर सभी को चौंकाती रही है। ऐसे में बिहार में भी अंतिम क्षण तक स्थिति बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, बिहार की राजनीति में उत्सुकता चरम पर है। सबकी निगाहें अब आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं कि क्या सम्राट चौधरी ही राज्य के नए मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर भाजपा एक बार फिर चौंकाने वाला फैसला करेगी।

  • विधानसभा सुरक्षा चूक पर सख्ती

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। राजधानी में विधानसभा सुरक्षा में हालिया चूक को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उच्च स्तरीय बैठक में कई अहम निर्देश जारी किए। मंगलवार को आयोजित इस बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक व सुरक्षा अधिकारियों ने भाग लिया और पूरे घटनाक्रम की गहन समीक्षा की गई। बैठक के दौरान अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सतर्कता, स्पष्ट जवाबदेही और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय ही मजबूत सुरक्षा तंत्र की आधारशिला है। इस दौरान उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई, जिसे फिलहाल तकनीकी परीक्षण के अधीन रखा गया है। अध्यक्ष ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने पर दिल्ली पुलिस की सराहना भी की। एकीकृत कमान और आधुनिक सुरक्षा तंत्र पर जोर समीक्षा बैठक में अध्यक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के लिए सभी प्रवेश द्वारों पर हाइड्रोलिक रोड ब्लॉकर्स लगाने, एंट्री कंट्रोल सिस्टम को मजबूत करने और परिसर में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और दिल्ली पुलिस के बीच एकीकृत कमान स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि आपात स्थिति में बिना देरी के प्रभावी कार्रवाई की जा सके। साथ ही, सभी एजेंसियों को रीयल-टाइम सूचना साझा करने के निर्देश दिए गए, जिससे संभावित खतरों से समय रहते निपटा जा सके। प्रवेश-निकास व्यवस्था होगी और सख्त विधानसभा परिसर की एंट्री और एग्जिट व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। प्रत्येक गेट पर दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के कम से कम दो प्रशिक्षित जवानों की तैनाती अनिवार्य की गई है। बिना पूरी जांच और अनुमति के किसी भी वाहन या व्यक्ति को परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा। अध्यक्ष ने यह भी निर्देश दिया कि सभी सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएं और उन्हें आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी भी स्थिति में तत्परता बनी रहे। मोबाइल पेट्रोलिंग और रैपिड रिस्पॉन्स व्यवस्था स्थिर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ गतिशील निगरानी को बढ़ावा देते हुए परिसर में मोबाइल पेट्रोलिंग वाहन तैनात करने का निर्देश दिया गया है। यह वाहन लगातार निगरानी करेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, सभी प्रवेश द्वारों को इतना मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है कि किसी भी प्रकार के जबरन प्रवेश को रोका जा सके। इसके लिए अतिरिक्त भौतिक सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे। नियमित समीक्षा और मॉक ड्रिल की तैयारी अध्यक्ष ने सुरक्षा को एक निरंतर प्रक्रिया बताते हुए नियमित समीक्षा बैठकों के आयोजन और सभी अवलोकनों का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए। बैठक में पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारियों ने मासिक मॉक ड्रिल आयोजित करने और केंद्रीकृत अलार्म सिस्टम स्थापित करने का सुझाव भी दिया, जिससे आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सके। वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने प्रवेश द्वारों पर कोलेप्सिबल गेट लगाने की सिफारिश की, ताकि भौतिक पहुंच नियंत्रण को और मजबूत किया जा सके। खुफिया एजेंसियों ने किया सुरक्षा आकलन इस बीच, खुफिया ब्यूरो के संयुक्त निदेशक नवीन वर्मा ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ विधानसभा परिसर का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत आकलन किया। टीम ने मौके पर निरीक्षण करते हुए कई अहम सुधारात्मक बिंदुओं की पहचान की। बैठक के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष ने दोहराया कि सुरक्षित और अनुशासित वातावरण बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी एजेंसियों से जिम्मेदारी, समन्वय और सतर्कता के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि सुरक्षा केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी है।

  • ‘हरियालो राजस्थान’ से हरित भविष्य की ओर कदम : भजनलाल शर्मा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जयपुर। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को हरित और समृद्ध बनाना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान’ के तहत आगामी 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी अभियान को नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरणा मिली है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता को नई दिशा दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के मानसून में 7 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य के मुकाबले 7.22 करोड़ पौधे लगाए गए, जबकि वर्ष 2025 में 10 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 11.74 करोड़ पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। इस प्रकार पिछले दो वर्षों में लगभग 19 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे राज्य में हरियाली और जैव विविधता को मजबूती मिली है। इस अभियान के अंतर्गत फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा हर जिले में ‘नमो नर्सरी’ की स्थापना और पंचायत समिति स्तर पर ‘नमो वन’ विकसित करने का कार्य भी तेज़ी से किया जा रहा है। साथ ही उदयपुर, सिरोही और बांसवाड़ा जिलों में चंदन वन विकसित करने की योजना पर भी काम जारी है, जो प्रदेश की पारिस्थितिकी को नई पहचान देगा। विशेष बात यह है कि वर्ष 2025-26 में राज्य का पहला ‘हरित बजट’ प्रस्तुत कर पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को नीति स्तर पर मजबूती दी गई है। मिशन के तहत मानसून से पूर्व ही पौधारोपण स्थलों का चयन, फेंसिंग, गड्ढों की तैयारी और नर्सरियों से पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इसके बाद जनसहभागिता और विभिन्न विभागों के समन्वय से व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जाता है। पौधों के संरक्षण और निगरानी के लिए जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इस कार्य में ‘वन मित्र’ और ‘वृक्ष मित्र’ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर अभियान को स्थायी सफलता की दिशा में अग्रसर किया जा रहा है। सरकार ने आगामी मानसून सत्र में भी 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से कार्य जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में राजस्थान न केवल हरित प्रदेश के रूप में स्थापित होगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के क्षेत्र में देश के लिए मिसाल बनेगा।

  • तीन राज्यों में चुनावी शोर थमा, 9 अप्रैल को मतदान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए चल रहा जोरदार प्रचार अभियान आज शाम थम जाएगा। इसके साथ ही इन राज्यों में सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंचकर शांत हो जाएंगी और मतदाता अब अंतिम निर्णय लेने की ओर बढ़ेंगे। तीनों क्षेत्रों में मतदान गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में संपन्न होगा। असम की 126, केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी मैदान पूरी तरह तैयार है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और अंतिम दिन तक मतदाताओं को साधने के लिए रैलियों, जनसभाओं और रोड शो का सिलसिला जारी रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम के बरपेटा, होजाई और डिब्रूगढ़ में जनसभाओं को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी की जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। अपने संबोधन में उन्होंने विकास, शांति और समृद्धि को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि बीते दस वर्षों में असम ने नई दिशा में प्रगति की है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य के हर जिले और क्षेत्र का संतुलित विकास एनडीए सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं, केरल और पुडुचेरी में भी राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर पूरे चुनाव प्रचार के दौरान जारी रहा। इधर, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आगामी चरणों के चुनाव को लेकर भी चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। नामांकन पत्रों की जांच आज की जाएगी, जबकि उम्मीदवार गुरुवार तक अपने नाम वापस ले सकेंगे। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण में 29 अप्रैल 2026 को 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। चारों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए मतदान की मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। चुनाव आयोग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अब सबकी निगाहें 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हैं, जो इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

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