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खरगे पर टिप्पणी से सियासी बवाल, राहुल का तीखा हमला

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 4 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर न सिर्फ खरगे का, बल्कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों का भी अपमान किया है।

मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि एक वरिष्ठ दलित नेता के प्रति इस तरह की भाषा “निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य” है। उन्होंने लिखा कि खरगे देश के एक अनुभवी, सम्मानित और जनप्रिय नेता हैं, जिनका राजनीतिक कद और योगदान अतुलनीय है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि देश के करोड़ों एससी-एसटी समाज के लोगों का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा और सोच भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की “पुरानी और सुनियोजित मानसिकता” को दर्शाती है। उनके अनुसार, जब-जब कोई दलित नेता मुखर होकर अपनी बात रखता है, तब-तब उसे व्यक्तिगत हमलों का सामना करना पड़ता है।


कांग्रेस नेताओं द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में असम के मुख्यमंत्री कथित तौर पर खरगे के लिए ‘पागल’ शब्द का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं, जिसे लेकर विवाद और गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप भी लगाया है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या वे अपने मुख्यमंत्री की इस भाषा का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की चुप्पी मजबूरी नहीं, बल्कि सहमति का संकेत है। यदि देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर हमला हो और प्रधानमंत्री मौन रहें, तो यह उनकी जिम्मेदारी से बचना ही नहीं, बल्कि उस अपमान में भागीदारी भी है।” इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां कांग्रेस इस मुद्दे को सामाजिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर उठा रही है, वहीं भाजपा की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई राज्यों में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं।

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