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बंगाल में “विकास बनाम ध्रुवीकरण” की जंग तेज, कांग्रेस ने पेश किया नया मॉडल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 8
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच सियासी बयानबाज़ी अपने चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि बंगाल को अब विकास और रोजगार केंद्रित मॉडल की जरूरत है।

घोषणापत्र जारी करते हुए खरगे ने कहा कि राज्य की जनता के सामने तीन विकल्प हैं—तृणमूल कांग्रेस का “भ्रष्टाचार आधारित शासन”, भाजपा की “ध्रुवीकरण की राजनीति” और कांग्रेस का “कल्याण, रोजगार व सुधार आधारित मॉडल”। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीति समुदायों के बीच विभाजन पर आधारित है और वे इसी आधार पर सत्ता हासिल करना चाहते हैं। खड़गे ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि वह बंगाल की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार जैसे मुद्दों पर बात नहीं करती, बल्कि डर और नफरत की राजनीति पर निर्भर है। वहीं, उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस सरकार को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 15 वर्षों के शासन के बावजूद राज्य में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया।

घोषणापत्र के प्रमुख वादे

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कई लोकलुभावन और विकासोन्मुखी योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें महिलाओं को प्रतिमाह 2,000 रुपये का अनुदान, किसानों को सालाना 15,000 रुपये की सहायता, प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन शामिल हैं। पार्टी ने हर जिले में कृत्रिम मेधा (AI) प्रशिक्षण केंद्र खोलने और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए “बंगाल रोजगार गारंटी मिशन” शुरू करने का भी वादा किया है।

आर्थिक गिरावट और पलायन पर चिंता

खड़गे ने कहा कि कभी निवेश और रोजगार का केंद्र रहा कोलकाता आज युवाओं के पलायन का प्रतीक बन गया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के युवा बेहतर अवसरों की तलाश में बेंगलूरु, पुणे, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर जा रहे हैं, जो राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ने का दांव

करीब दो दशकों बाद कांग्रेस ने बंगाल में सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इसे “नई ऊर्जा का संचार” बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के साथ-साथ जनता के सामने कांग्रेस को एक मजबूत विकल्प के रूप में प्रस्तुत करेगा।

सांस्कृतिक मुद्दों पर भी टकराव

रमेश ने भाजपा पर सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी राष्ट्रगान और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। इस संदर्भ में उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।

चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला तय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल में मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है, जहां सत्तारूढ़ टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। ऐसे में “विकास बनाम ध्रुवीकरण” का मुद्दा चुनावी विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है।

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