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बंगाल चुनाव में सियासी चुनौती, टीएमसी नेता का बीजेपी को खुला ऐलान

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 4 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। चुनावी सरगर्मियों के बीच अब जुबानी जंग ने नया मोड़ ले लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भारतीय जनता पार्टी को एक बेहद असामान्य और चर्चित चुनौती दे डाली है।

कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान ओ'ब्रायन ने दावा किया कि राजधानी की सभी 11 विधानसभा सीटों पर टीएमसी की जीत पूरी तरह तय है। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी इन सीटों में से एक भी सीट जीतने में कामयाब होती है, तो उनकी पार्टी का एक सांसद सार्वजनिक रूप से अपना सिर मुंडवा लेगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह शर्त कौन सा सांसद पूरी करेगा।

कोलकाता से आगे बढ़ी चुनौती

ओ'ब्रायन का यह आत्मविश्वास सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जिलों को भी अपनी चुनौती में शामिल करते हुए दावा किया कि इन क्षेत्रों की क्रमशः 16 और 31 सीटों पर भी बीजेपी खाता नहीं खोल पाएगी। उनका कहना है कि यदि इन इलाकों में भी बीजेपी एक सीट जीत लेती है, तो वही शर्त लागू होगी।

हालांकि उत्तर 24 परगना को लेकर उन्होंने थोड़ा अलग रुख अपनाया और माना कि वहां बीजेपी को 3-4 सीटें मिल सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने हालिया ओपिनियन पोल्स को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोप लगाया कि ये सर्वे जानबूझकर टीएमसी की स्थिति को कमजोर दिखाने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।

मतदाता सूची पर भी गरमाया विवाद

चुनावी बयानबाजी के बीच टीएमसी ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। पार्टी का आरोप है कि नई मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। टीएमसी का दावा है कि यह कदम कुछ विशेष वर्गों को मतदान से वंचित करने की साजिश है।

इस मुद्दे को लेकर डेरेक ओ'ब्रायन और सागरिका घोष के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने की तैयारी में है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि आयोग से मिलने का समय नहीं दिया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

चुनाव से पहले तेज होती बयानबाजी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीखे बयान और आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार चुनाव से पहले इस तरह की खुली चुनौती ने सियासी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी नतीजे इस दावे और चुनौती को किस हद तक सही या गलत साबित करते हैं।

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