भारत का परमाणु छलांग: कल्पक्कम में स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर सफल
- धन्ना राम चौधरी

- 7 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
तमिलनाडु। भारत ने अपनी परमाणु ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए तमिलनाडु के कल्पक्कम परमाणु परिसर में देश का पहला स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करती है, जिनके पास यह उन्नत परमाणु तकनीक मौजूद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता को “देश के लिए गर्व का क्षण” बताते हुए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम भी है।
यह रिएक्टर अपनी विशेष “ब्रीडर” तकनीक के कारण पारंपरिक परमाणु रिएक्टरों से अलग है। जहां सामान्य रिएक्टर ईंधन का उपयोग कर उसे समाप्त कर देते हैं, वहीं फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ईंधन जलाने के साथ-साथ नया ईंधन भी तैयार करता है। इस कारण यह तकनीक ऊर्जा उत्पादन को अधिक टिकाऊ और दीर्घकालिक बनाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत का संकेत है। इस कार्यक्रम के अंतिम चरण में देश अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग कर सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकेगा। गौरतलब है कि भारत विश्व में थोरियम के सबसे बड़े भंडार वाले देशों में शामिल है।
इस स्वदेशी रिएक्टर के निर्माण में 200 से अधिक भारतीय कंपनियों का योगदान रहा है, जिनमें लघु एवं मध्यम उद्योग भी शामिल हैं। इससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिला है, बल्कि देश के औद्योगिक विकास को भी गति मिली है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह रिएक्टर अत्याधुनिक है। इसमें ‘पैसिव सेफ्टी फीचर्स’ लगाए गए हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में रिएक्टर को स्वतः सुरक्षित रूप से बंद कर सकते हैं। यह तकनीक मानव हस्तक्षेप के बिना दुर्घटनाओं के जोखिम को न्यूनतम करने में सक्षम है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस उपलब्धि के साथ भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बनने की ओर अग्रसर है, जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करेगा। यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि कोयले पर निर्भरता घटाकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, कल्पक्कम में हासिल यह सफलता भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और स्थिरता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।
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