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अमरावती बनी आंध्र की आधिकारिक राजधानी

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 hours ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

अमरावती। आंध्र प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक भविष्य से जुड़ी एक लंबी प्रतीक्षा आखिरकार समाप्त हो गई। लगभग 12 वर्षों के वनवास के बाद अमरावती को आधिकारिक रूप से राज्य की राजधानी घोषित कर दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा 6 अप्रैल 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के साथ इस निर्णय को कानूनी मान्यता मिल गई, जिससे 2014 में राज्य के विभाजन के बाद से जारी अनिश्चितता का दौर समाप्त हो गया।


अधिसूचना के अनुसार, अमरावती को 2 जून 2024 से प्रभावी रूप से राज्य की राजधानी माना जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य शासन में निरंतरता बनाए रखना और प्रशासनिक ढांचे को स्थिरता प्रदान करना बताया गया है। गौरतलब है कि तेलंगाना के गठन के बाद हैदराबाद को एक निश्चित अवधि तक संयुक्त राजधानी के रूप में रखा गया था, जिससे आंध्र प्रदेश के लिए स्थायी राजधानी का मुद्दा लगातार चर्चा में बना रहा।


मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि “अमरावती ही आंध्र प्रदेश की राजधानी है।” उन्होंने इस निर्णय को राज्य की जनता, विशेषकर अमरावती क्षेत्र के किसानों की जीत बताया। नायडू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय राज्य के विकास को नई दिशा देगा।


इस फैसले की पृष्ठभूमि में हाल के घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहे हैं। 28 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा ने अमरावती के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद 1 अप्रैल को लोकसभा और 2 अप्रैल को राज्यसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पारित हुआ, जिसने इस घोषणा का मार्ग प्रशस्त किया।


हालांकि, इस निर्णय पर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं। विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे “राजनीतिक नाटक” करार दिया। पार्टी के नेताओं का कहना है कि राजधानी से जुड़े किसी भी फैसले में सभी क्षेत्रों और वर्गों के हितों को समान रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।


फिलहाल, अमरावती को राजधानी घोषित किए जाने के साथ ही राज्य में प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्रीकरण और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह निर्णय न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आंध्र प्रदेश के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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