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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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9 अप्रैल को केरल में मतदान, 4 मई को नतीजे

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
7 अप्रैल
2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में कराया जाएगा, जबकि चुनाव प्रचार का शोर मंगलवार शाम थम जाएगा। राज्य के करीब 2.7 करोड़ मतदाता इस बार अपने मताधिकार का प्रयोग कर नई सरकार की दिशा तय करेंगे। मतगणना 4 मई 2026 को होगी, जिसके साथ ही चुनावी तस्वीर साफ हो जाएगी।


राज्य की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, ऐसे में चुनाव आयोग ने समयबद्ध तरीके से पूरी तैयारियां सुनिश्चित कर ली हैं। केरल के साथ-साथ असम और पुडुचेरी में भी 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल 2026 से चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी। सभी राज्यों के नतीजे एक साथ 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।


जनता के मुद्दों पर टिका चुनाव

इस बार का चुनाव पूरी तरह जनसरोकारों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। महंगाई राज्य के मतदाताओं के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है, जिसने आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा बेरोजगारी, खासकर 18 से 34 वर्ष के युवाओं के बीच, एक गंभीर मुद्दा बनकर उभरी है। भ्रष्टाचार को लेकर भी लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। वहीं, शराब और नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग ने सामाजिक चिंता को जन्म दिया है। कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षा का सवाल भी मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है।


सियासी दलों ने झोंकी ताकत

चुनावी रण में सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक प्रचार अभियान चला रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में केरल में रैली कर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोझिकोड में रोड शो कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।


त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार केरल में मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प और कांटे का हो सकता है। राज्य में पिछले एक दशक से सत्ता पर काबिज वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) आमने-सामने हैं। वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) भी मजबूती के साथ मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहा है।


देश की नजर केरल पर

केरल विधानसभा चुनाव को इस बार राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। मतदाता 9 अप्रैल 2026 को ईवीएम के जरिए अपना फैसला सुनाएंगे और 4 मई 2026 को नतीजों के साथ यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथों में जाएगी। चुनाव परिणाम न केवल केरल की राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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