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चुनावी विज्ञापनों पर सख्ती: प्रिंट मीडिया में प्री-सर्टिफिकेशन अनिवार्य

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 23 hours ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और संतुलित बनाने के उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग ने प्रिंट मीडिया में प्रकाशित होने वाले राजनीतिक विज्ञापनों पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान से ठीक पहले और मतदान के दिन अखबारों में प्रकाशित होने वाले किसी भी राजनीतिक विज्ञापन के लिए पूर्व-प्रमाणन (प्री-सर्टिफिकेशन) अनिवार्य होगा।


आयोग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और सभी राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके तहत कोई भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी, संगठन या व्यक्ति मतदान से एक दिन पहले या मतदान के दिन तक बिना पूर्व स्वीकृति के कोई भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकेगा। निर्देशों के मुताबिक, ऐसे सभी विज्ञापनों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित राज्य या जिला स्तर की मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी समिति (एमसीएमसी) से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। जहां उम्मीदवार और व्यक्तिगत आवेदक जिला स्तरीय एमसीएमसी के माध्यम से आवेदन करेंगे, वहीं मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को राज्य स्तरीय समिति से स्वीकृति लेनी होगी।


चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान के लिए 8 और 9 अप्रैल 2026 को प्रकाशित विज्ञापनों पर यह नियम लागू रहेगा। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है, जिसके लिए 22 और 23 अप्रैल 2026 को प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों के लिए प्री-सर्टिफिकेशन जरूरी होगा। वहीं पश्चिम बंगाल में दो चरणों—23 अप्रैल और 29 अप्रैल—में मतदान होगा, जिसके लिए क्रमशः 22-23 अप्रैल और 28-29 अप्रैल 2026 को प्रकाशित विज्ञापनों पर यह नियम प्रभावी रहेगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि विज्ञापन के प्री-सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन प्रकाशन की निर्धारित तिथि से कम से कम दो दिन पहले जमा कराना होगा, ताकि सामग्री की गहन जांच सुनिश्चित की जा सके।


इसके साथ ही, एमसीएमसी समितियों को सक्रिय कर दिया गया है, जो न केवल विज्ञापनों के प्रमाणन की प्रक्रिया को तेज करेंगी, बल्कि ‘पेड न्यूज़’ जैसे मामलों पर भी कड़ी नजर रखेंगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चुनावी प्रचार में पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाताओं को भ्रामक या पक्षपातपूर्ण जानकारी से बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

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