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बंगाल में धामी का हमला: TMC पर ‘सिंडिकेट’ की तरह काम करने का आरोप

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 6 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव क्षेत्र में रोड शो और जनसभा कर भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में जोरदार प्रचार किया।


रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी देखने को मिली। जनसभा को संबोधित करते हुए धामी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस एक राजनीतिक दल की तरह नहीं, बल्कि “सिंडिकेट” की तरह काम कर रही है, जहां कट-मनी और कमीशनखोरी व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। धामी ने कहा कि यदि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, तो भ्रष्टाचार और अपराध पर कड़ा प्रहार किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की “डबल इंजन सरकार” बनने पर विकास कार्यों को गति मिलेगी और राज्य में निवेश का माहौल बेहतर होगा। इस दौरान उन्होंने बनगांव दक्षिण से स्वप्न मजूमदार, बनगांव उत्तर से अशोक कीर्तनिया, बगदा से सोमा ठाकुर और गोघाटा से सुब्रत ठाकुर के नामांकन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया और मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने की अपील की।


मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और भय का माहौल व्याप्त है, जिससे आम जनता त्रस्त है। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से विकास को नई गति मिली है और बंगाल में भी ऐसा ही परिवर्तन संभव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा द्वारा बाहरी राज्यों के नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारना उसकी सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए पार्टी न केवल संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, बल्कि मतदाताओं पर व्यापक प्रभाव डालने का भी प्रयास कर रही है। धामी का यह दौरा भी इसी रणनीति के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनसभा में उमड़ी भीड़ को लेकर भाजपा नेताओं ने इसे परिवर्तन की लहर का संकेत बताया, जबकि विपक्ष इसे महज चुनावी रणनीति करार दे रहा है। ऐसे में आगामी चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसके दावों पर मुहर लगाती है।

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