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केरल में कांग्रेस नेता के बयान पर बवाल

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 6 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोच्चि: केरल की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान सामने आया। वायरल वीडियो में नेता पार्टी कार्यकर्ताओं को सियासी संघर्ष के दौरान महिलाओं को “हथियार” की तरह इस्तेमाल करने की सलाह देते नजर आ रहे हैं। इस बयान के सामने आते ही राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्ष ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला इडुक्की जिले के वाझाथोप में आयोजित एक चुनावी रैली से जुड़ा है, जहां यूडीएफ उम्मीदवार रॉय के पॉलोस के समर्थन में कार्यक्रम रखा गया था। इसी दौरान जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्ष सीपी मैथ्यू ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कथित रूप से विवादित टिप्पणी की।

वायरल वीडियो में मैथ्यू कार्यकर्ताओं को यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि टकराव की स्थिति में महिलाओं को आगे लाया जाए और जरूरत पड़ने पर कपड़े फाड़कर शिकायत दर्ज कराई जाए, ताकि विरोधी दल के नेताओं के खिलाफ मामला मजबूत किया जा सके। उन्होंने कथित तौर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय की महिलाओं को भी इस तरह की रणनीति में शामिल करने की बात कही, जिससे एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत गंभीर मामले दर्ज हो सकें।


वीडियो में एक महिला नेता का उदाहरण देते हुए मैथ्यू कहते हैं कि पूर्व में भी ऐसी रणनीति अपनाई गई थी। उन्होंने कथित तौर पर यह तक कहा कि यदि विरोधी दल के कार्यकर्ता सामने आएं, तो महिला कार्यकर्ता “ब्लाउज फाड़कर” शिकायत दर्ज कराएं, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई का रुख प्रभावित हो सकता है। इस बयान के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर कानून के दुरुपयोग और चुनाव को प्रभावित करने की साजिश का आरोप लगाया है। विशेष रूप से सीपीआई(एम) ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ी निंदा की है। पार्टी का कहना है कि यह बयान दर्शाता है कि कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।


वहीं, कांग्रेस की ओर से इस मामले पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है और कांग्रेस को जवाबदेही के सवालों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राज्य में राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। चुनावी माहौल के बीच इस तरह के बयान ने न केवल राजनीतिक मर्यादा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज में संवेदनशील मुद्दों के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

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