खरगे के बयान से सियासत गरम, कांग्रेस पर ‘सेल्फगोल’ का आरोप
- धन्ना राम चौधरी

- 6 अप्रैल
- 3 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। चुनावी मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात के लोगों को लेकर की गई टिप्पणी अब कांग्रेस के लिए राजनीतिक ‘सेल्फगोल’ साबित होती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे मुद्दा बनाकर कांग्रेस पर तीखा हमला शुरू कर दिया है, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों पर असर डालने वाला मान रहे हैं।
क्या कहा खरगे ने?
केरल के इडुक्की में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी “गुजरात और अन्य जगहों के अशिक्षित लोगों को गुमराह कर सकते हैं, लेकिन केरल की जनता शिक्षित और जागरूक है।” इसके साथ ही उन्होंने मोदी के ‘56 इंच सीने’ वाले बयान पर भी तंज कसते हुए इसे महत्वहीन बताया।
इतना ही नहीं, खरगे ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को भी निशाने पर लेते हुए उनकी कार्यशैली की तुलना मोदी से की और आरोप लगाया कि एलडीएफ और भाजपा मिलकर कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं।
अस्मिता की राजनीति या रणनीतिक चूक?
भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय अस्मिता लंबे समय से प्रभावी हथियार रही है। ममता बनर्जी ने बंगाली अस्मिता, नीतीश कुमार ने बिहारी स्वाभिमान और स्वयं मोदी ने गुजराती गौरव को चुनावी मुद्दा बनाकर सफलता हासिल की है। विश्लेषकों का मानना है कि खरगे का बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें केरल की ‘शिक्षित पहचान’ को उभारने की कोशिश की गई। लेकिन यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने इस बयान को तुरंत लपकते हुए कांग्रेस पर “विभाजनकारी राजनीति” का आरोप लगाया है। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने पर जनता का अपमान करती है और समाज को बांटने की कोशिश करती है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि यह बयान न केवल गुजरात बल्कि उत्तर भारत के लोगों का भी अपमान है।
कांग्रेस के लिए क्यों नुकसानदेह?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बयान कांग्रेस को कई स्तरों पर नुकसान पहुंचा सकता है—
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया: मोदी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी अक्सर भाजपा के पक्ष में माहौल बना देती है।
गुजरात और उत्तर भारत में असर: गुजरातियों को ‘अशिक्षित’ बताने का नैरेटिव विपक्ष के खिलाफ जा सकता है।
आगामी चुनावों पर प्रभाव: पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बना सकती है। गठबंधन राजनीति पर दबाव: सहयोगी दलों को भी इस बयान पर सफाई देनी पड़ सकती है।
पार्टी के भीतर असंतोष: अन्य राज्यों के कांग्रेस नेताओं के लिए यह बयान बचाव की स्थिति पैदा कर सकता है।
पुरानी गलतियों की पुनरावृत्ति?
राजनीति में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब विपक्षी नेताओं के व्यक्तिगत हमले भाजपा के लिए फायदे का सौदा साबित हुए। “चाय वाला”, “मौत का सौदागर” या “चौकीदार चोर है” जैसे नारों के बाद भाजपा को चुनावी मजबूती मिली। ऐसे में खरगे का बयान भी उसी श्रेणी में देखा जा रहा है, जो कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
केरल में चुनावी लाभ के उद्देश्य से दिया गया बयान अब राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। जहां भाजपा इसे बड़े राजनीतिक हथियार में बदलने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस के सामने अपने शब्दों के प्रभाव को संभालने की चुनौती है। आने वाले चुनावों में यह विवाद कितना असर डालेगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल सियासी गलियारों में इसे कांग्रेस का “सेल्फगोल” माना जा रहा है।
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