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मोदी का अधूरे एजेंडों पर आगे बढ़ने का संकेत

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ‘समान नागरिक संहिता’ और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को पार्टी के दो महत्वपूर्ण लेकिन अधूरे एजेंडे बताते हुए कहा कि इन पर देश में गंभीर और सकारात्मक विचार-विमर्श जारी है और सरकार इन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।


सोमवार को वर्चुअल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा का मिशन केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि देश में स्थायी और व्यापक सुधार लाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान कानून लागू करना है, जबकि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का मकसद लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराकर संसाधनों की बचत और प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।


प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने आपातकाल जैसे कठिन दौर में संघर्ष किया और कांग्रेस शासन के दौरान उत्पीड़न सहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में राजनीतिक हिंसा को संस्कृति बना दिया गया है, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल और केरल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए बलिदान दिया है। “भाजपा कार्यकर्ता पार्टी को अपनी मां मानते हैं और देश सेवा को सर्वोच्च मानते हैं,” उन्होंने कहा।


प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने ब्रिटिश काल के सैकड़ों अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया, देश को नया संसद भवन दिया, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया और तीन तलाक जैसी कुप्रथा पर कानून बनाकर महिलाओं को न्याय दिलाया। इसके अलावा उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण जैसे निर्णयों को भी सरकार की प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा हर चुनौती का सामना पूरी ईमानदारी से करती रही है और भविष्य में भी करती रहेगी। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पार्टी की विचारधारा और देश सेवा के संकल्प को और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि हर कार्यकर्ता के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक अवसर है, जो उन्हें राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की याद दिलाता है।

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