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तमिलनाडु में सियासी मुकाबला तेज, बढ़त की दौड़ में एनडीए

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 hours ago
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सामने आए ताज़ा ओपिनियन पोल ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब तक इंडिया गठबंधन का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस राज्य में मुकाबला बेहद कांटे का हो गया है और रुझान सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहे हैं।


एम. के. स्टालिन के नेतृत्व में सत्तारूढ़ गठबंधन को इस बार कड़ी चुनौती मिलती दिखाई दे रही है। वहीं एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने चुनावी मैदान में मजबूत पकड़ बनानी शुरू कर दी है।


सीएम चेहरे पर कांटे की टक्कर

ओपिनियन पोल के अनुसार मुख्यमंत्री पद की पसंद में मुकाबला लगभग बराबरी पर है। स्टालिन को 39.0 प्रतिशत और पलानीस्वामी को 38.7 प्रतिशत समर्थन मिलता दिख रहा है। यह मामूली अंतर चुनाव को पूरी तरह खुला और अनिश्चित बना देता है। इस बीच अभिनेता विजय भी 14.3 प्रतिशत समर्थन के साथ उभरते विकल्प के रूप में सामने आए हैं, खासकर युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ती दिख रही है।


सरकार के प्रदर्शन पर बंटी राय

राज्य सरकार के कामकाज को लेकर जनता की राय स्पष्ट रूप से बंटी हुई है।

करीब 35.8 प्रतिशत लोग सरकार के प्रदर्शन को अच्छा मानते हैं, जबकि 39 प्रतिशत इसे खराब या बहुत खराब बताते हैं। वहीं 16.9 प्रतिशत मतदाता अब भी निर्णायक राय नहीं बना पाए हैं। महिलाओं में सरकार के प्रति अपेक्षाकृत सकारात्मक रुख देखा जा रहा है, जबकि पुरुष मतदाताओं में असंतोष अधिक नजर आता है। उम्र के आधार पर बुज़ुर्ग मतदाता सरकार के साथ खड़े दिखते हैं, जबकि युवा वर्ग में नाराज़गी प्रमुख रूप से सामने आई है।


चुनाव के प्रमुख मुद्दे

इस बार का चुनाव मुद्दा-प्रधान होता दिख रहा है।

कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा (23 प्रतिशत )

शराब और नशे की समस्या (20.4 प्रतिशत)

बेरोज़गारी (18.5 प्रतिशत)

महंगाई और भ्रष्टाचार इन मुद्दों ने लगभग सभी वर्गों और क्षेत्रों में असर डाला है। खासतौर पर युवाओं में रोजगार और ग्रामीण इलाकों में सामाजिक सुरक्षा प्रमुख चिंता बनी हुई है।


सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय प्रभाव

सर्वे के अनुसार दलित और मुस्लिम समुदाय सरकार के प्रति अपेक्षाकृत सकारात्मक हैं, जबकि ओबीसी और सवर्ण वर्गों में असंतोष अधिक देखा गया है। उत्तरी तमिलनाडु में सत्ता विरोधी रुझान मजबूत है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सत्तारूढ़ गठबंधन की पकड़ अभी भी कायम है।


सीटों का अनुमान और गठबंधन की स्थिति

ओपिनियन पोल के मुताबिक एनडीए गठबंधन 130-140 सीटों के साथ बढ़त बनाता दिख रहा है, जबकि डीएमके-कांग्रेस वाला इंडिया गठबंधन 90-100 सीटों तक सिमट सकता है।

एआईएडीएमके को पीएमके के साथ गठबंधन का लाभ मिल रहा है, जिससे खासकर वन्नियार वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है। वहीं बीजेपी के साथ तालमेल शहरी और युवा मतदाताओं को आकर्षित करता दिख रहा है। दूसरी ओर, डीएमके गठबंधन में आंतरिक असंतोष और घोषणापत्र जारी करने में देरी ने उसकी चुनावी रणनीति को प्रभावित किया है।


घोषणापत्र और महिला वोट निर्णायक

एआईएडीएमके के घोषणापत्र में महिलाओं के लिए ₹2000 मासिक सहायता, मुफ्त रेफ्रिजरेटर और “अम्मा 2 व्हीलर” जैसी योजनाओं ने खासा प्रभाव डाला है। इसके चलते महिला मतदाताओं में एनडीए गठबंधन की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। तमिलनाडु की राजनीति इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। अब तक एकतरफा माने जाने वाले समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। हालांकि अंतिम परिणाम जातीय समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों और चुनावी गठबंधनों के अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेगा। फिलहाल संकेत साफ हैं—तमिलनाडु में इस बार मुकाबला सीधा, कड़ा और पूरी तरह खुला है, जहां हर वोट सत्ता की दिशा तय करेगा।

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