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तमिलनाडु में सियासी गर्मी, मोदी सक्रिय—राहुल की दूरी पर सवाल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 4 days ago
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य में आक्रामक चुनावी अभियान चलाते हुए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राज्य में अब तक की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

मोदी का लगातार दौरा, प्रचार में तेजी

पिछले दो महीनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन बार तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं। उनकी जनसभाओं में विकास, केंद्र की योजनाओं और क्षेत्रीय संतुलन को प्रमुख मुद्दा बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 को वे नागरकोइल में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में माहौल बनाने की रणनीति पर काम होगा। भाजपा इस बार दक्षिण भारत में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

राहुल की दूरी से उठे सवाल

इसके विपरीत कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अब तक तमिलनाडु में चुनाव प्रचार से दूर रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति को लेकर यह अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषक 2021 के विधानसभा चुनाव की तुलना करते हुए बताते हैं कि उस समय राहुल गांधी ने काफी पहले ही राज्य में सक्रियता दिखा दी थी और लगातार जनसभाएं की थीं।

पुडुचेरी में दिखी दूरी

हाल ही में पुडुचेरी में चुनाव प्रचार के दौरान यह दूरी और स्पष्ट नजर आई। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सहयोगी डीएमके और उसके नेता एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया। दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन एम.के. स्टालिन भी पुडुचेरी में मौजूद थे, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम इस तरह तय किए गए कि आमना-सामना न हो सके।

राहुल गांधी ने सुबह प्रचार किया, जबकि स्टालिन शाम को पहुंचे—इस राजनीतिक दूरी ने गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीट बंटवारे से बढ़ी खटास?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह दूरी सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच हुई खींचतान का परिणाम हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, चुनावी रणनीति और सीटों के बंटवारे पर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद सामने आए थे, जिनका असर अब सार्वजनिक रूप से दिखने लगा है।

पार्टियों की सफाई

हालांकि डीएमके ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि कार्यक्रम पहले से तय थे, इसलिए संयुक्त रैली संभव नहीं हो सकी। पार्टी के नेताओं का दावा है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के शीर्ष नेता एक साथ मंच साझा करेंगे।

वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का तमिलनाडु दौरा अभी तय होना बाकी है, लेकिन संभावना है कि वे 10 अप्रैल 2026 के बाद राज्य में चुनाव प्रचार शुरू करेंगे।

चुनावी समीकरण पर असर

तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस-डीएमके गठबंधन लंबे समय से प्रभावी रहा है, लेकिन इस बार दोनों दलों के बीच दिख रही दूरी विपक्षी गठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकती है। दूसरी ओर भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाकर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी और एम.के. स्टालिन एक साथ मंच पर नजर आते हैं या फिर यह दूरी चुनावी नतीजों पर भी असर डालती है। फिलहाल तमिलनाडु का सियासी रण पूरी तरह से गर्म हो चुका है और हर दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुका है।

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