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तीन राज्यों में चुनावी शोर थमा, 9 अप्रैल को मतदान

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए चल रहा जोरदार प्रचार अभियान आज शाम थम जाएगा। इसके साथ ही इन राज्यों में सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंचकर शांत हो जाएंगी और मतदाता अब अंतिम निर्णय लेने की ओर बढ़ेंगे। तीनों क्षेत्रों में मतदान गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में संपन्न होगा।

असम की 126, केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी मैदान पूरी तरह तैयार है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और अंतिम दिन तक मतदाताओं को साधने के लिए रैलियों, जनसभाओं और रोड शो का सिलसिला जारी रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम के बरपेटा, होजाई और डिब्रूगढ़ में जनसभाओं को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी की जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। अपने संबोधन में उन्होंने विकास, शांति और समृद्धि को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि बीते दस वर्षों में असम ने नई दिशा में प्रगति की है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य के हर जिले और क्षेत्र का संतुलित विकास एनडीए सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वहीं, केरल और पुडुचेरी में भी राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर पूरे चुनाव प्रचार के दौरान जारी रहा।

इधर, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आगामी चरणों के चुनाव को लेकर भी चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। नामांकन पत्रों की जांच आज की जाएगी, जबकि उम्मीदवार गुरुवार तक अपने नाम वापस ले सकेंगे। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की 152 सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण में 29 अप्रैल 2026 को 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।

चारों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए मतदान की मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। चुनाव आयोग की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अब सबकी निगाहें 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हैं, जो इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

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