top of page

“भारतार्थ खबर – खबर नहीं, उसका अर्थ”“हर खबर का सही विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“सच्ची खबर, सही अर्थ – भारतार्थ खबर”“जहाँ खबरों का होता है असली विश्लेषण”“ताज़ा खबरें, सटीक विश्लेषण – भारतार्थ खबर”“हर खबर की गहराई तक – भारतार्थ खबर”“Breaking News से लेकर विशेष रिपोर्ट तक”“देश-दुनिया की हर बड़ी खबर – भारतार्थ खबर”

नोएडा एयरपोर्ट का उद्घाटन: क्या “हर दो मिनट में उड़ान” भारत के विकास मॉडल की नई पहचान है?

बंगाल में कांग्रेस की नई चाल, टीएमसी पर सीधा वार

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 11 hours ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। केंद्र में विपक्षी एकता के बड़े मंच ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने अलग राह पकड़ ली है। राज्य की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस ने अपनी खोई जमीन वापस पाने की ठोस रणनीति तैयार कर ली है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है।


दरअसल, कांग्रेस अब बंगाल में ‘मित्र नहीं, मुकाबला’ की नीति पर काम कर रही है। पार्टी का फोकस उन क्षेत्रों पर है, जहां अल्पसंख्यक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली वोटबैंक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और पुरुलिया जैसे जिलों में कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंकने का निर्णय लिया है। इसके अलावा दार्जिलिंग जैसे संवेदनशील क्षेत्र को भी रणनीतिक रूप से टारगेट किया गया है।


राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच असदुद्दीन ओवैसी और स्थानीय नेताओं के गठजोड़ ने अल्पसंख्यक वोटों में नई हलचल पैदा कर दी है। वहीं वाम दल भी अपने पारंपरिक आधार को पुनर्जीवित करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह चुनाव खुद को पुनर्स्थापित करने का अहम अवसर बन गया है।

चुनावी अभियान को धार देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मैदान में उतरने वाले हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की कई बड़ी रैलियों की तैयारी है, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कोलकाता में पार्टी का घोषणापत्र जारी कर चुनावी बिगुल फूंकेंगे। खास बात यह है कि अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्रों में खरगे की सभाओं के जरिए कांग्रेस सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेगी।


कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए चार प्रमुख मुद्दों को केंद्र में रखा है—कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, महंगाई और केंद्र से बकाया राशि का मुद्दा। पार्टी का आरोप है कि राज्य में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और भ्रष्टाचार के मामलों में टीएमसी सरकार घिरी हुई है। वहीं महंगाई को लेकर कांग्रेस ने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। सबसे तीखा हमला उस आरोप को लेकर है जिसमें कांग्रेस, टीएमसी और भाजपा के बीच ‘अघोषित समझ’ होने की बात कह रही है। कांग्रेस का दावा है कि केंद्र द्वारा राज्य के करीब दो लाख करोड़ रुपये के बकाये को रोके जाने के बावजूद ममता बनर्जी चुप हैं, जिससे जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है।


गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस और टीएमसी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, हालांकि उस समय प्रचार में इतनी तीखी बयानबाजी देखने को नहीं मिली थी। इस बार कांग्रेस का आक्रामक रुख साफ संकेत दे रहा है कि वह बंगाल में टीएमसी को सीधी चुनौती देने के मूड में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह रणनीति जहां एक ओर राज्य में उसके पुनरुत्थान की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर ‘इंडिया’ गठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी टकराव गठबंधन की राष्ट्रीय राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page