top of page
भारतार्थ-logo

तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के संकेत, सर्वे ने बढ़ाई सियासी हलचल

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सामने आए ताजा जनमत सर्वेक्षण ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सर्वे के संकेत बताते हैं कि इस बार सत्ता परिवर्तन की संभावना मजबूत हो रही है और मौजूदा सत्तारूढ़ दल को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। राज्य में मुख्य मुकाबला दो बड़े गठबंधनों के बीच सिमटता नजर आ रहा है, जिससे चुनावी परिदृश्य और भी दिलचस्प हो गया है।


सर्वे के मुताबिक द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के नेतृत्व वाला गठबंधन इस बार पिछड़ता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गठबंधन बढ़त बनाता दिख रहा है। वोट प्रतिशत के अनुमान में एआईएडीएमके गठबंधन को करीब 41.4 प्रतिशत समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि डीएमके गठबंधन लगभग 39.3 प्रतिशत पर सिमट सकता है। यह अंतर भले ही मामूली प्रतीत हो, लेकिन सीटों के लिहाज से इसका असर निर्णायक हो सकता है।


सीटों के अनुमान पर नजर डालें तो एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन को 130 से 140 सीटें मिलने का आकलन किया गया है, जो स्पष्ट बहुमत की ओर इशारा करता है। वहीं डीएमके गठबंधन 90 से 100 सीटों के बीच सिमट सकता है। यदि ये आंकड़े वास्तविक परिणामों में तब्दील होते हैं, तो राज्य में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है।


मुख्यमंत्री पद की पसंद को लेकर भी तस्वीर बेहद रोचक बनी हुई है। वर्तमान मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को 39.0 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है, जबकि एआईएडीएमके नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी 38.7 प्रतिशत के साथ बेहद करीबी मुकाबले में हैं। दोनों नेताओं के बीच यह मामूली अंतर चुनाव को और अधिक रोमांचक बना रहा है। इस बीच अभिनेता से नेता बने विजय भी 14.3 प्रतिशत समर्थन के साथ तीसरे विकल्प के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं, जो पारंपरिक राजनीति में नए समीकरण बना सकते हैं।


तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से सत्ता परिवर्तन का एक चक्र देखने को मिलता रहा है, जहां मतदाता अक्सर एक कार्यकाल के बाद सरकार बदलने का रुझान दिखाते हैं। इस बार भी सर्वे में इसी प्रवृत्ति के दोहराए जाने के संकेत मिल रहे हैं, हालांकि अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में ही होगा। कुल मिलाकर, चुनावी मुकाबला बेहद कांटे का होता जा रहा है और आने वाले समय में राजनीतिक दलों की रणनीतियां, गठबंधन समीकरण और जमीनी प्रचार इस तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे। फिलहाल, इस सर्वे ने इतना जरूर तय कर दिया है कि तमिलनाडु में 2026 का चुनाव बेहद दिलचस्प और निर्णायक होने वाला है।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page