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‘हरियालो राजस्थान’ से हरित भविष्य की ओर कदम : भजनलाल शर्मा

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 7 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जयपुर। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा चलाया जा रहा ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को हरित और समृद्ध बनाना है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान’ के तहत आगामी 5 वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी अभियान को नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरणा मिली है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता को नई दिशा दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के मानसून में 7 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य के मुकाबले 7.22 करोड़ पौधे लगाए गए, जबकि वर्ष 2025 में 10 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 11.74 करोड़ पौधारोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। इस प्रकार पिछले दो वर्षों में लगभग 19 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं, जिससे राज्य में हरियाली और जैव विविधता को मजबूती मिली है। इस अभियान के अंतर्गत फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल रहा है।

राज्य सरकार द्वारा हर जिले में ‘नमो नर्सरी’ की स्थापना और पंचायत समिति स्तर पर ‘नमो वन’ विकसित करने का कार्य भी तेज़ी से किया जा रहा है। साथ ही उदयपुर, सिरोही और बांसवाड़ा जिलों में चंदन वन विकसित करने की योजना पर भी काम जारी है, जो प्रदेश की पारिस्थितिकी को नई पहचान देगा। विशेष बात यह है कि वर्ष 2025-26 में राज्य का पहला ‘हरित बजट’ प्रस्तुत कर पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को नीति स्तर पर मजबूती दी गई है। मिशन के तहत मानसून से पूर्व ही पौधारोपण स्थलों का चयन, फेंसिंग, गड्ढों की तैयारी और नर्सरियों से पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इसके बाद जनसहभागिता और विभिन्न विभागों के समन्वय से व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जाता है।

पौधों के संरक्षण और निगरानी के लिए जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इस कार्य में ‘वन मित्र’ और ‘वृक्ष मित्र’ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर अभियान को स्थायी सफलता की दिशा में अग्रसर किया जा रहा है। सरकार ने आगामी मानसून सत्र में भी 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से कार्य जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में राजस्थान न केवल हरित प्रदेश के रूप में स्थापित होगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास के क्षेत्र में देश के लिए मिसाल बनेगा।

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