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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • बेंगलूरु में कचरा संकट गहराया, नागरिक खुद उतरे मैदान में

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। आईटी सिटी बेंगलूरु एक बार फिर कचरा संकट की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लगने से नाराज नागरिक अब खुद ही सफाई व्यवस्था संभालने को मजबूर हो गए हैं, जिससे नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि हफ्तों और कई जगहों पर महीनों से कचरा नहीं उठाया गया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर जेसीबी मशीनें और ट्रक किराए पर लेकर सड़कों किनारे जमा कचरे को हटाना शुरू कर दिया है। यह स्थिति नगर निगम की विफलता का खुला उदाहरण बनकर सामने आई है। इस पूरे मामले ने ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। देश की जानी-मानी उद्यमी किरण मजूमदार-शॉ ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए और इसे “बेहद शर्मनाक” बताया। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में जयनगर विधानसभा क्षेत्र के गुरप्पनपाल्या वार्ड नंबर 171 का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। यहां लंबे समय से कचरा नहीं उठाए जाने के कारण दुर्गंध और गंदगी ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों की निष्क्रियता से परेशान होकर सामाजिक कार्यकर्ता ने पहल करते हुए अपने निजी खर्च पर सफाई अभियान शुरू कराया। स्थानीय लोगों के सहयोग से कचरे के बड़े ढेर हटाए गए, लेकिन यह अस्थायी समाधान ही साबित हो रहा है। इसी बीच, आक्रोशित नागरिकों ने ओल्ड गुरप्पनपाल्या सर्कल पर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। निवासियों ने कचरे से फैलने वाली बीमारियों, बदबू और दैनिक जीवन में हो रही परेशानियों को गंभीर बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि केवल एक बार सफाई कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि नियमित कचरा संग्रहण और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू करना जरूरी है। बार-बार उभरता यह कचरा संकट बेंगलूरु की शहरी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहर में यदि ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत नहीं किया गया, तो यह समस्या आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकती है।

  • लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ाने की तैयारी, महिला आरक्षण 2029 से लागू संभव

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश की चुनावी राजनीति में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिए हैं। लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने, महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार संविधान संशोधन सहित तीन अहम विधेयक लाने जा रही है। इसके लिए संसद की विशेष बैठक भी बुलाई गई है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सरकार द्वारा सांसदों को भेजे गए विधेयकों के प्रारूप के अनुसार, प्रस्तावित 131वां संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ा है, जबकि अन्य दो विधेयक परिसीमन आयोग के गठन से संबंधित हैं। विपक्ष ने जहां पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार इसे जनसंख्या बदलाव और महिला सशक्तिकरण की दिशा में जरूरी कदम बता रही है। 2011 की जनगणना बनेगी आधार विधेयक में एक बड़ा बदलाव यह प्रस्तावित किया गया है कि परिसीमन के लिए 2026 के बाद होने वाली नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की अंतिम प्रकाशित जनगणना को आधार बनाया जाएगा। इससे महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी, जो अन्यथा कई वर्षों तक टल सकती थी। लोकसभा सीटों का ऐतिहासिक विस्तार स्वतंत्रता के बाद से लोकसभा सीटों की संख्या में कई बार वृद्धि हुई है। 1950 में यह संख्या 489 थी, जो समय-समय पर बढ़ते हुए 1973 में 545 तक पहुंची। बाद में एंग्लो-इंडियन सदस्यों के मनोनयन समाप्त होने के बाद यह संख्या 543 रह गई। अब प्रस्तावित संशोधन के तहत इसे बढ़ाकर 850 करने की तैयारी है, जो अब तक का सबसे बड़ा विस्तार होगा। संविधान में प्रमुख बदलाव प्रस्तावित प्रस्तावित संशोधन के तहत अनुच्छेद 81 में बदलाव कर राज्यों से अधिकतम 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्यों का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट किया जाएगा कि संसद द्वारा निर्धारित और प्रकाशित जनगणना के आंकड़े ही आधार होंगे। इसके अलावा परिसीमन आयोग को सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का अधिकार दिया जाएगा, जिससे प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाया जा सके। महिला आरक्षण: 15 साल के लिए लागू महिला आरक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। यह आरक्षण प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए लागू होगा, जिसे संसद आवश्यकता अनुसार आगे बढ़ा सकती है। आरक्षित सीटों का निर्धारण रोटेशन प्रणाली के तहत किया जाएगा, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों को समय-समय पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए आनुपातिक कोटा सुनिश्चित किया जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों में भी बदलाव विधेयक में अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण मानदंडों में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे स्थानीय जनसंख्या संरचना के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके। जनसांख्यिकीय बदलाव बना आधार सरकार का तर्क है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों को फ्रीज करने का उद्देश्य उस समय जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करना था, लेकिन अब देश की जनसांख्यिकीय स्थिति में बड़ा बदलाव आ चुका है। ऐसे में नई वास्तविकताओं के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है। राजनीतिक असर गहरा होगा लोकसभा सीटों में इतनी बड़ी वृद्धि और महिला आरक्षण के लागू होने से देश की राजनीति में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जहां एक ओर राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बदलेगा, वहीं महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में संसद में इन विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया देश की राजनीति की दिशा तय करेगी।

  • वॉशिंगटन में भारत की प्रदर्शनी से उजागर होगा आतंक का सच

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत अगले सप्ताह वॉशिंगटन में एक विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से वैश्विक मंच पर आतंकवाद की भयावहता और उसके मानवीय प्रभाव को रेखांकित करेगा। ‘आतंकवाद की मानवीय कीमत’ विषय पर आयोजित यह प्रदर्शनी अमेरिका में पहलगाम आतंकी हमला की पहली बरसी के अवसर पर शुरू की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, यह प्रदर्शनी कैपिटल हिल के निकट सार्वजनिक स्थल पर आयोजित होगी, जिसमें 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले में मारे गए 26 निर्दोष लोगों को केंद्र में रखा जाएगा। इनमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। प्रदर्शनी में न केवल इस हमले के दर्दनाक पहलुओं को दर्शाया जाएगा, बल्कि इसके पीछे जिम्मेदार आतंकी नेटवर्क और उनकी पृष्ठभूमि पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इस पहल के जरिए भारत का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देना है कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद किस तरह मानवता के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रदर्शनी में पिछले वर्षों में हुए अन्य प्रमुख आतंकी हमलों को भी शामिल किया जाएगा, जिनका संबंध पाकिस्तान से संचालित आतंकी ढांचों से जोड़ा जाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब पाकिस्तान खुद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति समर्थक के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है, भारत की यह पहल वैश्विक समुदाय को वास्तविकता से अवगत कराने में अहम भूमिका निभाएगी। यह प्रदर्शनी न केवल आतंकवाद के खिलाफ जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि पीड़ितों की स्मृति को भी सम्मान देगी। गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में वह खुद भी आतंकी हिंसा से जूझ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, उसकी धरती से संचालित आतंकी गतिविधियां अब भी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इस प्रदर्शनी के जरिए भारत एक बार फिर यह स्पष्ट करना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।

  • बाबा साहेब के विजन को साकार करती बढ़ती महिला भागीदारी: ओम बिरला

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है और यह के समतामूलक समाज के सपने को साकार कर रही है। वे अंबेडकर जयंति के अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब का जीवन और उनके विचार आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि आंबेडकर का विजन केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक ऐसे समाज की परिकल्पना करते थे, जहां हर वर्ग—विशेषकर वंचित, दलित और पिछड़े तबकों—को समान अधिकार और अवसर मिलें। उन्होंने कहा, “बाबा साहेब के सिद्धांत आज भी सामाजिक न्याय, समानता और परिवर्तन की दिशा में मार्गदर्शन कर रहे हैं। यदि समाज में आत्मविश्वास, साहस और सेवा की भावना विकसित करनी है, तो हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करना होगा।” बिरला ने बाबा साहेब के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उच्चतम शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग कर राष्ट्र निर्माण को प्राथमिकता दी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। इस अवसर पर ओम बिरला ने इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा प्रकाशित ‘बाल संविधान पुस्तक श्रृंखला’ का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को संविधान के मूल्यों और प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है। बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से ही संविधान की समझ देना जरूरी है, ताकि वे जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान आधारित शिक्षा ही एक मजबूत, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

  • आरोपी का नाम उजागर करना गलत नहीं: सिक्किम हाईकोर्ट

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गंगटोक। सिक्किम हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में मीडिया की भूमिका और उसकी सीमाओं को स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी आरोपी के नाम का खुलासा करना कानूनन गलत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर की सामग्री को रिपोर्ट करना “मीडिया ट्रायल” की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह प्रेस के कर्तव्यों का हिस्सा है। यह फैसला जस्टिस भास्कर राज प्रधान की एकल पीठ ने ‘रबदेन शेरपा बनाम सिक्किम राज्य’ मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और समाज के प्रहरी के रूप में अपराध से संबंधित सटीक और तथ्यात्मक जानकारी जनता तक पहुंचाना उसका दायित्व है। याचिका का आधार मामले में याचिकाकर्ता रबदेन शेरपा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं—68, 75, 64 और 351—के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शेरपा ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि एक स्थानीय समाचार पत्र ने पुलिस की डेली सिचुएशन रिपोर्ट के आधार पर उनके और उनके नाबालिग पुत्र का नाम प्रकाशित कर उनकी निजता का उल्लंघन किया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की थी कि पुलिस को जांच से संबंधित सामग्री मीडिया को साझा करने से रोका जाए और संबंधित समाचार को हटाने का निर्देश दिया जाए। कोर्ट का स्पष्ट रुख हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर एक सार्वजनिक दस्तावेज है। एक बार जब कोई अपराध सार्वजनिक क्षेत्र में आ जाता है, तो आरोपी की निजता का अधिकार सीमित हो जाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर की सामग्री पर आधारित रिपोर्टिंग को “मीडिया ट्रायल” नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित समाचार में आरोपी के बेटे का पत्र भी प्रकाशित किया गया था, जिससे मामले के दोनों पक्ष सामने आए। इसे अदालत ने संतुलित और निष्पक्ष पत्रकारिता का उदाहरण माना। मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। अपराध से जुड़ी सच्ची और प्रमाणिक जानकारी जनता तक पहुंचाना मीडिया का अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है। इस फैसले को मीडिया की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

  • सम्राट चौधरी आज लेंगे शपथ, बिहार में नई सरकार का आगाज़

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना। बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी आज सुबह 11 बजे राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। राजधानी पटना स्थित लोकभवन के जर्मन हैंगर में आयोजित भव्य समारोह में नई सरकार का औपचारिक गठन होगा। सूत्रों के अनुसार, इस नई सरकार में सहयोगी दल जनता दल (यूनाइटेड) को भी अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। जेडीयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे गठबंधन संतुलन और राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय राजनीति के कई दिग्गज नेताओं की उपस्थिति रहेगी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके अलावा पार्टी संगठन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी और सहयोगी दलों के नेता भी इस ऐतिहासिक मौके के साक्षी बनेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बिहार की सियासत में बड़े फेरबदल का संकेत है। नई सरकार के सामने विकास कार्यों को गति देना, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना प्रमुख चुनौतियां होंगी। समारोह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए हैं, ताकि आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हो सके। बिहार की जनता अब नई सरकार से बेहतर शासन और तेज विकास की उम्मीद लगाए बैठी है। आज का यह शपथ ग्रहण समारोह राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता हैं।

  • बिहार में ‘सम्राट युग’ की शुरुआत

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना। बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होती दिखाई दे रही है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा दांव खेलते हुए सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुन लिया है। इसके साथ ही उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। एनडीए अब राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी में है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में हलचल तेज कर दी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर बीजेपी ने सम्राट चौधरी पर ही भरोसा क्यों जताया। इसके पीछे कई ठोस राजनीतिक और सामाजिक समीकरण काम कर रहे हैं। पार्टी में तेजी से बढ़ता कद बना निर्णायक साल 2018 में बीजेपी में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी ने संगठन में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। 2019 में जब नित्यानंद राय प्रदेश अध्यक्ष थे, तब उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2020 में वे विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बने। 2022 में जब नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर सरकार बनाई, तब बीजेपी ने बिहार में नई रणनीति तैयार की। इसी कड़ी में सम्राट चौधरी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया, जिससे उनका कद और मजबूत हुआ। राजनीतिक अनुभव और मजबूत पृष्ठभूमि सम्राट चौधरी का राजनीतिक अनुभव भी उनके पक्ष में गया। उनकी शुरुआती राजनीतिक प्रशिक्षण लालू प्रसाद यादव के मार्गदर्शन में हुआ। उनके पिता शकुनी चौधरी भी बिहार की राजनीति में प्रभावशाली रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठनात्मक अनुभव और विभिन्न दलों के साथ काम करने की क्षमता ने उन्हें एक संतुलित और स्वीकार्य चेहरा बनाया है। साथ ही, नीतीश कुमार की सहमति को भी इस फैसले में अहम माना जा रहा है। ‘लव-कुश’ समीकरण साधने की रणनीति बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोईरी) समाज से आते हैं, जबकि नीतीश कुमार कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। बीजेपी ने सम्राट चौधरी को आगे कर ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) समीकरण को साधने की रणनीति अपनाई है। यह वर्ग राज्य की राजनीति में एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में बीजेपी का यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया एक दूरगामी राजनीतिक निर्णय माना जा रहा है। नई सरकार से उम्मीदें और चुनौतियां सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनने वाली सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी, जिनमें आर्थिक स्थिति, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास की रफ्तार को बनाए रखना प्रमुख है। वहीं, बीजेपी के लिए यह एक अवसर भी है कि वह बिहार में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करे। कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री पद पर आना सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और रणनीतियों की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

  • 15 वर्षों से हरियाली की मिसाल: सालावास रोड पर जनसेवा का अनूठा अभियान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जोधपुर। सांगरिया क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और जनसेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आ रहा है, जहां स्थानीय विकास समिति के सदस्यों द्वारा बीते 15 वर्षों से निरंतर हरियाली को संवारने का कार्य किया जा रहा है। भीषण गर्मी के इस मौसम में भी समिति के सदस्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पेड़-पौधों की देखभाल में जुटे हुए हैं। सांगरिया विकास समिति के सदस्य लक्ष्मण चौधरी, गंगाराम, बद्रीराम नैण, भंवराराम सैवर और घेवरराम मिलकर सालावास रोड के डिवाइडर पर लगाए गए पीपल और शीशम के वृक्षों के साथ-साथ सड़क के दोनों किनारों पर रोपे गए कनेर के पौधों को नियमित रूप से पानी दे रहे हैं। तपती गर्मी में जब पौधों का जीवित रहना चुनौतीपूर्ण होता है, तब इन समाजसेवियों का यह प्रयास उन्हें जीवनदान देने जैसा साबित हो रहा है। विशेष बात यह है कि यह अभियान कोई नया नहीं, बल्कि पिछले डेढ़ दशक से लगातार जारी है। पेड़ लगाना, उनका संरक्षण करना और समय-समय पर उनकी देखभाल करना—इन सभी जिम्मेदारियों को समिति के सदस्य बिना किसी अपेक्षा के निभा रहे हैं। उनके इस समर्पण ने सालावास रोड को हरियाली से आच्छादित कर क्षेत्र के पर्यावरण को भी संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन समाजसेवियों के प्रयासों से न केवल सड़क की सुंदरता बढ़ी है, बल्कि गर्मी के मौसम में राहगीरों को छाया और शुद्ध वायु भी मिल रही है। यह पहल समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। आज जब पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है, ऐसे में सांगरिया विकास समिति के इन सदस्यों का यह अथक प्रयास वास्तव में सराहनीय और अनुकरणीय है।

  • विजयनगर में अंबेडकर जयंती पर भव्य आयोजन

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। विजयनगर क्लब रोड पर विश्व मानव डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर युवक संघ के तत्वावधान में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर के महान व्यक्तित्व, उनके संघर्षमय जीवन और भारतीय संविधान के निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी समाज को समानता, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक करने की प्रेरणा देते हैं। संघ के सदस्य भास्कर एवं अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का पुष्पमाला व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, शिक्षा के महत्व और युवाओं की जिम्मेदारी पर भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को अपनाने के संकल्प के साथ किया गया।

  • बेंगलूरु–मुंबई वंदे भारत स्लीपर पर सांसद पी.सी. मोहन का सम्मान

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। भाजपा राजस्थान प्रवासी प्रकोष्ठ द्वारा बेंगलूरु से मुंबई के लिए प्रस्तावित नई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को मंजूरी दिलाने के प्रयासों के लिए सांसद पी.सी. मोहन का सम्मान कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान प्रकोष्ठ के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को एक ज्ञापन सौंपते हुए राजस्थान से जुड़े रेल नेटवर्क के विस्तार और सुविधाओं में बढ़ोतरी की महत्वपूर्ण माँगें रखीं। ज्ञापन में प्रमुख रूप से बेंगलूरु से भीलड़ी, जालोर और मोकलसर होते हुए जोधपुर तक नई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस शुरू करने की मांग की गई। साथ ही ट्रेन संख्या 14805/14806 यशवंतपुर-बाड़मेर एक्सप्रेस को साप्ताहिक के स्थान पर दैनिक करने, ट्रेन संख्या 22689/20690 बेंगलूरु-अहमदाबाद एक्सप्रेस का विस्तार भीलड़ी-जालोर मार्ग से जोधपुर तक करने तथा बेंगलूरु से जोधपुर/बाड़मेर के लिए एक नई दैनिक एक्सप्रेस ट्रेन शुरू करने की भी मांग रखी गई। सांसद पी.सी. मोहन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इन जनहितकारी मांगों को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा करेंगे और इन्हें पूरा कराने का हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रवासी राजस्थानियों की सुविधा के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर भाजपा राजस्थान प्रवासी प्रकोष्ठ के सह-संयोजक भरत जैन, महासचिव नरेंद्र भीरांदवाल, भाजपा मध्य जिला उपाध्यक्ष शैतान सिंह राजपुरोहित, भाजपा गांधीनगर उपाध्यक्ष कांतिलाल राजपुरोहित, डीआरयूसीसी सदस्य अश्विन सेमलाणी, बेंगलूरु शहर प्रवासी अध्यक्ष रमेश पटेल, रामाराम देवासी, रविंद्रसिंह राजपूत, धनाराम पटेल, विनोद चौहान, अचलाराम पटेल, सगनराम पटेल सहित बड़ी संख्या में प्रवासी सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि ये मांगें पूरी होती हैं तो बेंगलूरु और राजस्थान के बीच आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे हजारों प्रवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

  • मदुरै साउथ भाजपा प्रत्याशी श्रीनिवासन का भव्य स्वागत, रेल सेवा की मांग उठी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मदुरै (तमिलनाडु)। मदुरै साउथ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी श्रीरामा श्रीनिवासन के जैन तेरापंथ भवन पहुंचने पर समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में मदुरै तेरापंथ सभा, जैन समाज, कपड़ा मार्केट एवं राजस्थानी समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मदुरै प्रवासी प्रवक्ता दिनेश सालेचा के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान मुकेश राजपुरोहित एवं जेठूसिंह राजपुरोहित ने माल्यार्पण कर श्रीनिवासन का स्वागत किया। वहीं अभिषेक कोठारी, विनीत बोथरा, राजकुमार नाहटा एवं अक्षय लोढ़ा ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। रतनलाल गुर्जर एवं ईश्वर सिंह ने साल भेंट कर सम्मान प्रकट किया, जबकि महेंद्र छाजेड़, प्रदेशाध्यक्ष दिनेश सालेचा, अनिल श्रीमाल एवं महावीर श्रीश्रीमाल ने दुपट्टा पहनाकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में मारवाड़ की परंपरा के प्रतीक साफा पहनाकर नितेश कोठारी एवं तेरापंथ सभा के निवर्तमान अध्यक्ष अशोक जीरावला ने विशेष सम्मान किया। इस अवसर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं आईसीएआई डिजिटल बोर्ड के सदस्य डी.सी. जैन भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान मदुरै उत्तर भारतीय यात्री सेवा संघ एवं जैन तेरापंथ सभा द्वारा मदुरै से जोधपुर के लिए सीधी रेल सेवा प्रारंभ करने की मांग को लेकर एक लिखित ज्ञापन भी श्रीनिवासन को सौंपा गया। ज्ञापन में ट्रेन संख्या 06067 मदुरै–भगत की कोठी (जोधपुर) को नियमित रूप से संचालित करने तथा ट्रेन संख्या 20626 भगत की कोठी–चेन्नई सेंट्रल को मदुरै तक विस्तारित करने की प्रमुख मांग रखी गई। भाजपा प्रत्याशी श्रीनिवासन ने इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि वे इस दिशा में पूर्ण प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भाजपा के पक्ष में मतदान कर उन्हें विजयी बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन तेरापंथ सभा के निवर्तमान अध्यक्ष अशोक जीरावला ने किया, जबकि संचालन नितेश कोठारी ने कुशलतापूर्वक किया। अंत में सभा के मंत्री अभिषेक कोठारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

  • गरवलिया धाम में प्रथम बरसी महोत्सव की तैयारियां तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) रोहट। क्षेत्र के गरवलिया स्थित राजेश्वर भगवान अर्बुदा देवी शक्तिपीठ, गरवलिया धाम में सोमवार को प्रथम पाटोत्सव, बरसी महोत्सव एवं वार्षिक मेले की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। साध्वी चम्पाबाई महाराज के सानिध्य में आयोजित इस बैठक में समाजबंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आयोजन को भव्य बनाने की रूपरेखा तैयार की। बैठक में मंदिर ट्रस्ट पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 22 अप्रैल 2026 को भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा, जबकि 23 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है। दो दिवसीय इस धार्मिक महोत्सव को सुव्यवस्थित एवं आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया। समारोह की सफलता सुनिश्चित करने हेतु आवास, भोजन, यातायात, स्वागत-सत्कार तथा समस्त व्यवस्थाओं की जिम्मेदारियां अलग-अलग समाजबंधुओं को सौंपी गईं। बैठक में उपस्थित लोगों ने अपने-अपने सुझाव रखते हुए आयोजन को अधिक से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुंचाने और इसे यादगार बनाने पर जोर दिया। चौराई सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में समाजबंधु बैठक में शामिल हुए। सभी ने एकमत से महोत्सव को भव्य एवं सफल बनाने का संकल्प लिया। बैठक के दौरान आयोजन से जुड़ी तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई और कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। गरवलिया धाम में आयोजित यह महोत्सव क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बनेगा, जिसे लेकर समाज में विशेष उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

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