बेंगलूरु में कचरा संकट गहराया, नागरिक खुद उतरे मैदान में
- धन्ना राम चौधरी

- 15 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
बेंगलूरु। आईटी सिटी बेंगलूरु एक बार फिर कचरा संकट की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लगने से नाराज नागरिक अब खुद ही सफाई व्यवस्था संभालने को मजबूर हो गए हैं, जिससे नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि हफ्तों और कई जगहों पर महीनों से कचरा नहीं उठाया गया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर जेसीबी मशीनें और ट्रक किराए पर लेकर सड़कों किनारे जमा कचरे को हटाना शुरू कर दिया है। यह स्थिति नगर निगम की विफलता का खुला उदाहरण बनकर सामने आई है।
इस पूरे मामले ने ग्रेटर बेंगलूरु अथॉरिटी और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। देश की जानी-मानी उद्यमी किरण मजूमदार-शॉ ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए और इसे “बेहद शर्मनाक” बताया। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में जयनगर विधानसभा क्षेत्र के गुरप्पनपाल्या वार्ड नंबर 171 का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। यहां लंबे समय से कचरा नहीं उठाए जाने के कारण दुर्गंध और गंदगी ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों की निष्क्रियता से परेशान होकर सामाजिक कार्यकर्ता ने पहल करते हुए अपने निजी खर्च पर सफाई अभियान शुरू कराया। स्थानीय लोगों के सहयोग से कचरे के बड़े ढेर हटाए गए, लेकिन यह अस्थायी समाधान ही साबित हो रहा है।
इसी बीच, आक्रोशित नागरिकों ने ओल्ड गुरप्पनपाल्या सर्कल पर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। निवासियों ने कचरे से फैलने वाली बीमारियों, बदबू और दैनिक जीवन में हो रही परेशानियों को गंभीर बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि केवल एक बार सफाई कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि नियमित कचरा संग्रहण और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू करना जरूरी है। बार-बार उभरता यह कचरा संकट बेंगलूरु की शहरी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहर में यदि ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत नहीं किया गया, तो यह समस्या आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकती है।
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