सेंट पॉल्स महाविद्यालय में भाषा महोत्सव का भव्य आयोजन
- धन्ना राम चौधरी

- 14 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
बेंगलूरु। सेंट पॉल्स महाविद्यालय में 13 अप्रैल 2026 को भाषा महोत्सव का भव्य और उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विविध भाषाओं की समृद्धि और सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. तृप्ति शर्मा के स्वागत भाषण से हुई।
डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में भाषा महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और आपसी समझ का सेतु भी है। उन्होंने मुख्य अतिथि प्रोफेसर पी. वी. सुदर्शन, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. जे. थॉमस, विभिन्न विभागों के अध्यक्षों, शिक्षकों, गैर-शिक्षण स्टाफ, विद्यार्थियों एवं मीडिया टीम का हार्दिक स्वागत किया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर पी. वी. सुदर्शन ने अपने उद्बोधन में सभी भाषाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए बहुभाषिकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न भाषाओं में संवाद कर कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया और विद्यार्थियों को भाषाई विविधता को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. जे. थॉमस की अनुमति एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भाषाओं का भी सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव समाज में एकता और सौहार्द को मजबूत करता है। साथ ही भाषा विभाग को इस प्रकार के आयोजन निरंतर करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। महोत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न भाषाओं में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिससे कार्यक्रम में रंगारंग माहौल बना रहा। इसके अलावा रोचक खेलों का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। “मातृभाषा दिवस” के रूप में आयोजित इस महोत्सव ने भाषाई भेदभाव को समाप्त कर एकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के विद्यार्थियों आदित्य राज, रिजवाना, मदीहा और पवित्र ने कुशलतापूर्वक किया। अंत में छात्रा पवित्रा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर कार्यक्रम का समापन किया। यह भाषा महोत्सव न केवल विद्यार्थियों के लिए एक सांस्कृतिक मंच साबित हुआ, बल्कि समाज को भी यह संदेश देने में सफल रहा कि भाषाओं की विविधता में ही हमारी वास्तविक एकता निहित है।
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