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नोएडा हिंसा: वॉट्सऐप साजिश से भड़की भीड़, 150 हिरासत में

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 14
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सोमवार को भड़की हिंसा ने प्रशासन को चौंका दिया। शुरुआती जांच में यह मामला केवल श्रमिक असंतोष नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश के संकेत दे रहा है। पुलिस का दावा है कि हिंसा में शामिल कई लोग वास्तविक फैक्ट्री कर्मचारी नहीं, बल्कि बाहरी उपद्रवी थे, जिन्होंने माहौल को जानबूझकर बिगाड़ा।


पुलिस का खुलासा: शांत माहौल में अचानक भड़की आग

गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि प्रदर्शन पहले ही शांत हो चुका था, लेकिन अचानक बाहरी तत्व सक्रिय हो गए। ये लोग आसपास के गांवों से संगठित रूप से पहुंचे और उन्होंने ही तोड़फोड़ व आगजनी को हवा दी। पुलिस के अनुसार, श्रमिकों की आड़ में घुसे इन तत्वों ने भीड़ को उकसाकर स्थिति को हिंसक बना दिया।


वॉट्सऐप ग्रुप बना हथियार

जांच में सामने आया है कि हिंसा भड़काने के लिए रातों-रात कई वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए। क्यूआर कोड के जरिए लोगों को इन ग्रुप्स से जोड़ा गया और उनमें भड़काऊ संदेश प्रसारित किए गए। पुलिस इसे एक संगठित डिजिटल साजिश मान रही है, जिसका मकसद शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उग्र बनाना था।


सतर्कता के बावजूद बिगड़े हालात

हरियाणा में हालिया घटनाओं के बाद प्रशासन पहले से अलर्ट था और संवेदनशील क्षेत्रों में फोर्स तैनात की गई थी। बावजूद इसके, बाहरी भीड़ के अचानक शामिल होने से हालात कुछ समय के लिए नियंत्रण से बाहर हो गए। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर स्थिति को काबू में कर लिया।


150 से अधिक हिरासत में, जांच तेज

अब तक 150 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनमें वास्तविक कर्मचारी कितने हैं और बाहरी उपद्रवी कितने। साथ ही इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सक्रिय संगठनों या नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।


बिना नेतृत्व के बढ़ती गई भीड़

सूत्रों के अनुसार, पिछले चार दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन का कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं था। अलग-अलग कंपनियों के कर्मचारी इकट्ठा होते गए और भीड़ स्वतः बढ़ती चली गई। प्रशासन के बातचीत प्रयासों के दौरान भी कोई सामने आकर नेतृत्व करने को तैयार नहीं हुआ, जिससे समाधान में बाधा आई।


मजदूरों की मांगें बनीं मूल मुद्दा

श्रमिकों ने न्यूनतम मजदूरी, 8 घंटे की शिफ्ट, ओवरटाइम भुगतान और नाइट ड्यूटी अलाउंस जैसी मांगें उठाईं। राज्य सरकार, जिसकी अगुवाई योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं, का दावा है कि कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उद्योग प्रबंधन की भूमिका स्पष्ट नहीं रही।


प्रशासन की अपील: अफवाहों से रहें दूर

जिला प्रशासन ने श्रमिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार, कंपनियों के साथ हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं—

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन

शिकायत पेटियों की व्यवस्था

हर महीने 10 तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित करना

कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार को प्राथमिकता देना

प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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