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लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ाने की तैयारी, महिला आरक्षण 2029 से लागू संभव

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 15
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देश की चुनावी राजनीति में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिए हैं। लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने, महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार संविधान संशोधन सहित तीन अहम विधेयक लाने जा रही है। इसके लिए संसद की विशेष बैठक भी बुलाई गई है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सरकार द्वारा सांसदों को भेजे गए विधेयकों के प्रारूप के अनुसार, प्रस्तावित 131वां संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़ा है, जबकि अन्य दो विधेयक परिसीमन आयोग के गठन से संबंधित हैं। विपक्ष ने जहां पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार इसे जनसंख्या बदलाव और महिला सशक्तिकरण की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।


2011 की जनगणना बनेगी आधार

विधेयक में एक बड़ा बदलाव यह प्रस्तावित किया गया है कि परिसीमन के लिए 2026 के बाद होने वाली नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की अंतिम प्रकाशित जनगणना को आधार बनाया जाएगा। इससे महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी, जो अन्यथा कई वर्षों तक टल सकती थी।


लोकसभा सीटों का ऐतिहासिक विस्तार

स्वतंत्रता के बाद से लोकसभा सीटों की संख्या में कई बार वृद्धि हुई है। 1950 में यह संख्या 489 थी, जो समय-समय पर बढ़ते हुए 1973 में 545 तक पहुंची। बाद में एंग्लो-इंडियन सदस्यों के मनोनयन समाप्त होने के बाद यह संख्या 543 रह गई। अब प्रस्तावित संशोधन के तहत इसे बढ़ाकर 850 करने की तैयारी है, जो अब तक का सबसे बड़ा विस्तार होगा।


संविधान में प्रमुख बदलाव प्रस्तावित

प्रस्तावित संशोधन के तहत अनुच्छेद 81 में बदलाव कर राज्यों से अधिकतम 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्यों का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट किया जाएगा कि संसद द्वारा निर्धारित और प्रकाशित जनगणना के आंकड़े ही आधार होंगे। इसके अलावा परिसीमन आयोग को सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का अधिकार दिया जाएगा, जिससे प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाया जा सके।


महिला आरक्षण: 15 साल के लिए लागू

महिला आरक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। यह आरक्षण प्रारंभिक रूप से 15 वर्षों के लिए लागू होगा, जिसे संसद आवश्यकता अनुसार आगे बढ़ा सकती है। आरक्षित सीटों का निर्धारण रोटेशन प्रणाली के तहत किया जाएगा, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों को समय-समय पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके। अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए आनुपातिक कोटा सुनिश्चित किया जाएगा।


पूर्वोत्तर राज्यों में भी बदलाव

विधेयक में अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण मानदंडों में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे स्थानीय जनसंख्या संरचना के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।


जनसांख्यिकीय बदलाव बना आधार

सरकार का तर्क है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों को फ्रीज करने का उद्देश्य उस समय जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करना था, लेकिन अब देश की जनसांख्यिकीय स्थिति में बड़ा बदलाव आ चुका है। ऐसे में नई वास्तविकताओं के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है।


राजनीतिक असर गहरा होगा

लोकसभा सीटों में इतनी बड़ी वृद्धि और महिला आरक्षण के लागू होने से देश की राजनीति में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जहां एक ओर राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बदलेगा, वहीं महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में संसद में इन विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया देश की राजनीति की दिशा तय करेगी।

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