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बाबा साहेब के विजन को साकार करती बढ़ती महिला भागीदारी: ओम बिरला

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 15
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है और यह के समतामूलक समाज के सपने को साकार कर रही है। वे अंबेडकर जयंति के अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।


लोकसभा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब का जीवन और उनके विचार आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि आंबेडकर का विजन केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक ऐसे समाज की परिकल्पना करते थे, जहां हर वर्ग—विशेषकर वंचित, दलित और पिछड़े तबकों—को समान अधिकार और अवसर मिलें। उन्होंने कहा, “बाबा साहेब के सिद्धांत आज भी सामाजिक न्याय, समानता और परिवर्तन की दिशा में मार्गदर्शन कर रहे हैं। यदि समाज में आत्मविश्वास, साहस और सेवा की भावना विकसित करनी है, तो हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करना होगा।” बिरला ने बाबा साहेब के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए उच्चतम शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग कर राष्ट्र निर्माण को प्राथमिकता दी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण से हर चुनौती को पार किया जा सकता है।


इस अवसर पर ओम बिरला ने इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा प्रकाशित ‘बाल संविधान पुस्तक श्रृंखला’ का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को संविधान के मूल्यों और प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है। बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से ही संविधान की समझ देना जरूरी है, ताकि वे जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान आधारित शिक्षा ही एक मजबूत, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

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