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आरोपी का नाम उजागर करना गलत नहीं: सिक्किम हाईकोर्ट

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 15 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

गंगटोक। सिक्किम हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में मीडिया की भूमिका और उसकी सीमाओं को स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी आरोपी के नाम का खुलासा करना कानूनन गलत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर की सामग्री को रिपोर्ट करना “मीडिया ट्रायल” की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह प्रेस के कर्तव्यों का हिस्सा है।

यह फैसला जस्टिस भास्कर राज प्रधान की एकल पीठ ने ‘रबदेन शेरपा बनाम सिक्किम राज्य’ मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और समाज के प्रहरी के रूप में अपराध से संबंधित सटीक और तथ्यात्मक जानकारी जनता तक पहुंचाना उसका दायित्व है।


याचिका का आधार

मामले में याचिकाकर्ता रबदेन शेरपा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं—68, 75, 64 और 351—के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शेरपा ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि एक स्थानीय समाचार पत्र ने पुलिस की डेली सिचुएशन रिपोर्ट के आधार पर उनके और उनके नाबालिग पुत्र का नाम प्रकाशित कर उनकी निजता का उल्लंघन किया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की थी कि पुलिस को जांच से संबंधित सामग्री मीडिया को साझा करने से रोका जाए और संबंधित समाचार को हटाने का निर्देश दिया जाए।


कोर्ट का स्पष्ट रुख

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर एक सार्वजनिक दस्तावेज है। एक बार जब कोई अपराध सार्वजनिक क्षेत्र में आ जाता है, तो आरोपी की निजता का अधिकार सीमित हो जाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर की सामग्री पर आधारित रिपोर्टिंग को “मीडिया ट्रायल” नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित समाचार में आरोपी के बेटे का पत्र भी प्रकाशित किया गया था, जिससे मामले के दोनों पक्ष सामने आए। इसे अदालत ने संतुलित और निष्पक्ष पत्रकारिता का उदाहरण माना।


मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। अपराध से जुड़ी सच्ची और प्रमाणिक जानकारी जनता तक पहुंचाना मीडिया का अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है। इस फैसले को मीडिया की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है।

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