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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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  • सेवपुरी में जिंदा कीड़ा, हल्दीराम पर सवाल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई। शहर के मालाड पश्चिम स्थित इंफिनिटी मॉल में संचालित मशहूर फूड ब्रांड Haldiram's के एक आउटलेट पर फूड सेफ्टी को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया गया है कि यहां एक ग्राहक को परोसी गई सेवपुरी में जिंदा कीड़ा मिला, जिससे हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह घटना 17 अप्रैल 2026 की है, जब एक ग्राहक ने सेवपुरी ऑर्डर की। जैसे ही प्लेट सामने आई, उसमें एक कीड़ा रेंगता हुआ दिखाई दिया। इस अप्रत्याशित दृश्य को देखकर न सिर्फ ग्राहक बल्कि आसपास बैठे लोग भी स्तब्ध रह गए। मौके पर मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो बना लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ग्राहक अन्य लोगों को प्लेट दिखाते हुए इस गंभीर लापरवाही पर सवाल उठा रहा है। कई लोगों ने मौके पर ही इसे “चौंकाने वाला” और “अस्वीकार्य” बताया। ग्राहक का कहना था कि भले ही आउटलेट का इंटीरियर आकर्षक और साफ-सुथरा दिखता हो, लेकिन असली कसौटी भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता है। घटना के बाद सबसे अधिक नाराजगी आउटलेट के स्टाफ के रवैये को लेकर सामने आई। आरोप है कि शिकायत करने पर कर्मचारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और केवल डिश बदलने का प्रस्ताव दिया। न तो औपचारिक माफी मांगी गई और न ही किसी प्रकार की जांच या सुधारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इस उदासीन रवैये ने ग्राहकों के आक्रोश को और बढ़ा दिया। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उपभोक्ताओं ने इसे फूड सेफ्टी नियमों की खुली अनदेखी बताते हुए संबंधित अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की है। कई यूजर्स ने कहा कि ऐसे मामलों में भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए या संबंधित आउटलेट को अस्थायी रूप से बंद किया जाना चाहिए। अब इस मामले में निगाहें Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) और स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल उपभोक्ता सुरक्षा बल्कि बड़े ब्रांड्स की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि नाम और ब्रांड वैल्यू के भरोसे परोस जा रहे खाद्य पदार्थों की वास्तविक गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी कितनी प्रभावी है।

  • दिल्ली के द्वारका में पुलिस मुठभेड़, लगरपुरिया गैंग के दो शूटर गिरफ्तार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात लगरपुरिया गैंग के दो सक्रिय शूटरों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई द्वारका के श्याम विहार इलाके में की गई, जहां पुलिस और बदमाशों के बीच हुई गोलीबारी में एक आरोपी घायल हो गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि विकास गुलिया उर्फ लगरपुरिया गैंग के दो शूटर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के इरादे से इलाके में आने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत रणनीति बनाकर मौके पर जाल बिछाया। जैसे ही संदिग्ध बदमाश वहां पहुंचे, पुलिस टीम ने उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए चेतावनी दी, लेकिन आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक बदमाश के पैर में गोली लग गई। घायल आरोपी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। दूसरे आरोपी को भी मौके से दबोच लिया गया। पुलिस ने दोनों के पास से हथियार भी बरामद किए हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी हाल ही में द्वारका इलाके में हुई एक फायरिंग की घटना में भी शामिल थे। पुलिस अब इनसे पूछताछ कर गैंग के नेटवर्क, सहयोगियों और संभावित आपराधिक योजनाओं की जानकारी जुटा रही है। यह पूरी कार्रवाई डीसीपी कुशल पाल सिंह के नेतृत्व में चलाए जा रहे “ऑपरेशन लंगड़ा” के तहत की गई। इस विशेष अभियान का उद्देश्य राजधानी में बढ़ती गैंगवार, टारगेट किलिंग और संगठित अपराध पर लगाम लगाना है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। गौरतलब है कि लगरपुरिया गैंग का सरगना विकास गुलिया हरियाणा के झज्जर-बहादुरगढ़ क्षेत्र का कुख्यात अपराधी है, जिस पर हत्या, लूट, रंगदारी और गैंगवार के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह गुरुग्राम में हुई करीब 30 करोड़ रुपये की लूट का मास्टरमाइंड भी रह चुका है। वर्ष 2022 में उसे दुबई से डिपोर्ट कर भारत लाया गया था, और हाल ही में एक अदालत ने उसे मकोका के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालांकि सरगना जेल में बंद है, लेकिन उसका नेटवर्क अभी भी सक्रिय बना हुआ है। पुलिस का मानना है कि गैंग के शूटर विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इसी को देखते हुए पुलिस लगातार सतर्क है और समय-समय पर ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। राजधानी में हुई इस ताजा कार्रवाई को संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

  • जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में क्यूआर कोड से सुरक्षा मजबूत

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पहलगाम (जम्मू-कश्मीर)। देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शुमार पहलगाम में अब पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा और आधुनिक कदम उठाया गया है। पिछले वर्ष हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा को लेकर बने भय और अविश्वास के माहौल को खत्म करने के लिए प्रशासन ने क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब पर्यटक किसी भी सेवा प्रदाता की पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी एक स्कैन में हासिल कर सकेंगे। प्रशासन द्वारा शुरू किए गए इस विशेष अभियान का लक्ष्य करीब 25 हजार स्थानीय सेवा प्रदाताओं को एकीकृत पहचान प्रणाली से जोड़ना है। फिलहाल लगभग 7 हजार लोगों को क्यूआर कोड जारी किए जा चुके हैं, और यह प्रक्रिया लगातार जारी है। स्कैन करते ही पूरी जानकारी उपलब्ध इस प्रणाली के तहत पंजीकरण के लिए सेवा प्रदाताओं को पहले विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसमें दस्तावेजों की जांच, पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक शामिल है। जांच में साफ पाए जाने पर ही संबंधित व्यक्ति को यूनिक क्यूआर कोड दिया जाता है। यह क्यूआर कोड स्कैन करते ही उस व्यक्ति की पूरी जानकारी सामने आ जाती है, जिसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार विवरण, रजिस्ट्रेशन स्थिति और पुलिस सत्यापन जैसी अहम जानकारियां शामिल होती हैं। हर सेवा प्रदाता होगा दायरे में नई व्यवस्था के तहत पोनी राइड संचालक, फोटोग्राफर, दुकानदार, हॉकर्स और बाहरी विक्रेताओं सहित सभी टूरिज्म सेवा प्रदाताओं को इस सिस्टम में शामिल किया जा रहा है। इससे अनधिकृत और फर्जी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। हमले के बाद सुरक्षा पर फोकस गौरतलब है कि पिछले साल आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों द्वारा किए गए हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनी संचालक की मौत हो गई थी। इस घटना ने न केवल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि पहलगाम की पर्यटन छवि को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया था। पर्यटकों का बढ़ेगा भरोसा अधिकारियों का कहना है कि यह क्यूआर कोड प्रणाली पारदर्शिता और सुरक्षा को एक साथ मजबूत करेगी। पर्यटक अब किसी भी सेवा प्रदाता से जुड़ने से पहले उसकी पहचान सत्यापित कर सकेंगे, जिससे उनका विश्वास बढ़ेगा और वे अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे। स्थानीय लोगों ने किया स्वागत इस पहल को स्थानीय सेवा प्रदाताओं का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। उनका मानना है कि इससे उनकी पहचान प्रमाणिक होगी और पर्यटकों के बीच भरोसा बढ़ेगा। स्थानीय सेवा प्रदाता गुलाम हसन ने बताया कि सभी को दस्तावेज सत्यापन के बाद ही क्यूआर कोड दिए गए हैं और समय-समय पर सुरक्षा एजेंसियां इनकी जांच भी करती हैं। सुरक्षा के साथ रोजगार को भी सहारा प्रशासन का मानना है कि यह पहल न केवल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी नई मजबूती देगी। बाहरी विक्रेताओं की भी सख्त जांच सुनिश्चित की गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षित और व्यवस्थित पर्यटन वातावरण तैयार किया जा सके। कुल मिलाकर, पहलगाम में लागू की गई यह क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली सुरक्षा और विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम साबित हो सकती है।

  • दिल्ली एंट्री महंगी, ट्रांसपोर्ट पर बोझ

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक वाहनों के लिए अब सफर पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करते हुए ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। इस फैसले का सीधा असर माल ढुलाई लागत पर पड़ेगा, जिसका भार अंततः आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने की आशंका है। भारी वाहनों पर बढ़ा शुल्क एमसीडी के नए आदेश के अनुसार, दिल्ली में प्रवेश करने वाले विभिन्न श्रेणी के ट्रकों पर ईसीसी शुल्क में भारी वृद्धि की गई है। Two XL (दो एक्सल) ट्रक: पहले ₹1400, अब ₹2000, Three & Four XL (तीन और चार एक्सल) ट्रक: पहले ₹2600, अब ₹4000 यह बढ़ोतरी उन हजारों ट्रांसपोर्टरों के लिए चिंता का विषय बन गई है, जो रोजाना दिल्ली में माल की आपूर्ति करते हैं। हर दिन हजारों वाहनों की आवाजाही आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में प्रतिदिन बड़ी संख्या में कमर्शियल वाहन प्रवेश करते हैं। लगभग 3500 दो एक्सल ट्रक, करीब 1500 तीन और चार एक्सल ट्रक कुल मिलाकर करीब 70,000 वाणिज्यिक वाहन (कैब और टैक्सी सहित) NCR से दिल्ली में प्रवेश करते हैं। ऐसे में शुल्क बढ़ोतरी का व्यापक प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। क्या है ECC और क्यों जरूरी? पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) एक तरह का ‘ग्रीन टैक्स’ है, जिसे वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती देने के उद्देश्य से वसूला जाता है। यह शुल्क टोल नाकों पर लिया जाता है और इसकी राशि दिल्ली सरकार के विशेष पर्यावरण कोष में जमा की जाती है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, पैकर्स एंड मूवर्स और थोक व्यापार से जुड़े कारोबारियों की लागत बढ़ेगी। ईंधन, टोल और अन्य खर्चों के साथ यह अतिरिक्त भार व्यवसायों की लागत संरचना को प्रभावित करेगा। उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा असर बढ़ी हुई लागत का असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। माल ढुलाई महंगी होने से जरूरी सामानों की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। पर्यावरण बनाम आर्थिक दबाव एक ओर जहां यह कदम प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे ट्रांसपोर्टरों और व्यवसायियों पर आर्थिक दबाव बढ़ना तय है। अब देखना होगा कि सरकार इस संतुलन को बनाए रखने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।

  • बंगाल चुनाव से पहले ED की बड़ी रेड, ममता के करीबी अफसर के घर छापा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजधानी कोलकाता में ताबड़तोड़ छापेमारी कर सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। रविवार सुबह एजेंसी की टीम ने कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (DCP) शांतनु सिन्हा का आवास भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, ED की टीम सुबह करीब 7 बजे बालीगंज के फर्न रोड स्थित सिन्हा के घर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई दक्षिण कोलकाता में चर्चित ही‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ मामले से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें अवैध निर्माण और वसूली नेटवर्क के आरोप सामने आए हैं। शांतनु सिन्हा पहले कालीघाट थाने के प्रभारी रह चुके हैं, जो मुख्यमंत्री के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी ED ने इसी कड़ी में बेहाला इलाके में कारोबारी जॉय कामदार के आवास पर भी छापा मारा। जॉय कामदार रियल एस्टेट प्रमोशन से जुड़े बताए जा रहे हैं और उनका नाम पहले भी इस सिंडिकेट से जुड़ी जांच में सामने आ चुका है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, बेहाला स्थित उनके घर से नकदी बरामद होने की भी जानकारी है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। बताया जा रहा है कि ED द्वारा पहले दो बार समन जारी किए जाने के बावजूद जॉय कामदार पूछताछ में शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद एजेंसी ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके ठिकाने पर सीधे कार्रवाई की। दरवाजा खुलने में हुई देरी छापेमारी के दौरान बेहाला स्थित आवास पर ED टीम को अंदर प्रवेश करने में देरी का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने कई बार दस्तक देने के बाद आखिरकार घर का दरवाजा खुलवाया और तलाशी शुरू की। इस घटनाक्रम ने कार्रवाई को और अधिक संवेदनशील बना दिया। मुख्य आरोपी अब भी फरार इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी ‘सोना पप्पू’ उर्फ बिस्वजीत पोद्दार अब तक फरार है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और सार्वजनिक रूप से नजर आने के बावजूद कानून की पकड़ से बाहर है, जिससे जांच एजेंसियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ED इससे पहले भी इस मामले में एक IPS अधिकारी से पूछताछ कर चुकी है। हाल के दिनों में कोलकाता में अवैध निर्माण और सिंडिकेट से जुड़े मामलों में कई स्थानों पर छापेमारी की गई है। इसके अलावा, चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास पर भी ED की कार्रवाई हो चुकी है। वहीं आयकर विभाग ने हाल ही में टीएमसी नेता देबाशीष कुमार के घर पर भी छापा मारा था। चुनाव से पहले बढ़ी सियासी तपिश गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में प्रस्तावित हैं, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी। चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता ने राज्य के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। विपक्ष जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रहा है। इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी ने चुनावी माहौल में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर और भी स्पष्ट होने की संभावना है।

  • महिला आरक्षण पर सियासत तेज, भाजपा का कांग्रेस पर हमला

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उसने इस महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन न करके देश की करोड़ों महिलाओं के साथ “धोखा” किया है। भाजपा के राज्य कार्यालय ‘जगन्नाथ भवन’ में आयोजित प्रेस वार्ता में वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का विफल होना महज एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति उपेक्षा और विरोधी मानसिकता का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को संवैधानिक अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया, लेकिन कांग्रेस ने इसका समर्थन नहीं कर महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ दिया। अशोक ने कहा कि यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित होना चाहिए था, ताकि संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। “कांग्रेस के रुख के कारण महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का सपना अधूरा रह गया,” उन्होंने कहा। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी वर्षों से महिलाओं के अधिकारों पर केवल भाषण देती रही है, लेकिन उसे लागू करने का साहस नहीं दिखाया। “कांग्रेस महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है और उनके वास्तविक सशक्तिकरण में बाधा बन रही है,” उन्होंने कहा। इस दौरान अशोक ने कांग्रेस को सलाह देते हुए कहा कि यदि पार्टी वास्तव में महिलाओं के हितों के प्रति गंभीर है, तो उसे आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस को अपने महिला प्रकोष्ठ के अस्तित्व पर भी पुनर्विचार करना चाहिए। भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार महिलाओं को मुफ्त योजनाओं के माध्यम से घर तक सीमित रखने की नीति अपना रही है और उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने से रोक रही है। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है और इसका बोझ आम जनता पर डाला जा रहा है। “बिजली दरों में वृद्धि और विभिन्न करों के जरिए जनता पर अतिरिक्त भार डाला जा रहा है,” उन्होंने आरोप लगाया। अशोक ने विश्वास जताया कि आगामी चुनावों में जनता कांग्रेस को करारा जवाब देगी। इस अवसर पर विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मालविका अविनाश तथा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सी. मंजुला सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

  • अलवर शिशु अस्पताल में अव्यवस्था, एक बेड पर कई मासूम

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) अलवर। जिले के राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां उजागर हो रही हैं। अस्पताल के सामान्य वार्ड में हालात इतने बदतर हैं कि एक ही बेड पर दो से तीन शिशुओं को भर्ती करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी, उमस और दुर्गंध के बीच चल रहा यह इलाज मासूम मरीजों और उनके परिजनों के लिए किसी पीड़ा से कम नहीं है। अस्पताल में बेड की भारी कमी के चलते स्थिति दिन-ब-दिन विकट होती जा रही है। आधिकारिक रूप से 22 बेड स्वीकृत होने के बावजूद पहले 20 अतिरिक्त बेड जोड़कर कुल 42 बेड की व्यवस्था की गई थी, लेकिन जर्जर घोषित किए गए 20 बेड वाले वार्ड के बंद होने के बाद अब केवल 32 बेड ही उपयोग में हैं। दूसरी ओर, भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या अक्सर 50 से अधिक पहुंच जाती है। ऐसे में शाम होते-होते हर बेड पर दो से तीन मासूमों को भर्ती करना मजबूरी बन जाती है। वार्ड में भीड़भाड़ के कारण न तो परिजनों को खड़े होने की पर्याप्त जगह मिल पा रही है और न ही चिकित्सा कर्मी शिशुओं की समुचित निगरानी कर पा रहे हैं। उमस और बदबू से भरे माहौल में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अभिभावकों की चिंता और गहरा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इस अव्यवस्था का सबसे अधिक असर पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में समुचित इलाज न मिलने के कारण कई परिजन मजबूर होकर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। दो साल से बंद वार्ड, निर्माण अधूरा अस्पताल का 20 बेड वाला वार्ड और उससे जुड़ी गैलरी पिछले दो वर्षों से बंद पड़ी है। जर्जर घोषित किए जाने के बाद इसे ध्वस्त कर नए निर्माण की घोषणा की गई थी। करीब चार महीने पहले निर्माण कार्य शुरू होने का दावा किया गया, लेकिन अब तक केवल पिलर खड़े किए जा सके हैं। सुस्त निर्माण कार्य ने अस्पताल की क्षमता को सीमित कर दिया है और मरीजों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। प्रशासन मौन, हालात चिंताजनक भीषण गर्मी के इस दौर में यदि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रोजाना अस्पताल पहुंचने वाले परिजन बेड की कमी और अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनहीनता स्थिति को और बिगाड़ रही है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मांग की है कि जल्द से जल्द बंद वार्ड का निर्माण पूरा कर अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जाए, ताकि मासूम मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल सके।

  • तमिलनाडु में 72 घंटे पहले नायडू का हाई-वोल्टेज दौरा, सियासत गरमाई

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तमिलनाडु। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। इसी बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का 20 और 21 अप्रैल 2026 का प्रस्तावित दो दिवसीय तूफानी दौरा सियासी गलियारों में हलचल तेज कर रहा है। चुनाव से महज 72 घंटे पहले होने वाला यह दौरा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिससे विपक्षी दलों की चिंता बढ़ गई है। नायडू का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब उन्होंने हाल ही में संविधान के प्रस्तावित 131वें संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। इस विधेयक में परिसीमन, लोकसभा सीटों में संभावित वृद्धि और संसद व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे अहम प्रावधान शामिल हैं। नायडू ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रहा है। कोयंबटूर से चेन्नई तक जोरदार अभियान दौरे के पहले दिन नायडू कोयंबटूर में बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे होसुर और थल्ली में सभाएं करेंगे। शाम को वे चेन्नई पहुंचकर अवाडी में भव्य रोड शो के जरिए जनता से सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान उनका फोकस विकास, सुशासन और केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना रहेगा। दूसरे दिन मदुरै और सत्तूर में कार्यक्रम अपने दौरे के दूसरे दिन नायडू मदुरै और सत्तूर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे स्थानीय समुदायों के नेताओं से मुलाकात कर चुनावी समीकरण मजबूत करने की कोशिश करेंगे। दो दिन के व्यस्त कार्यक्रम के बाद वे शाम को अमरावती लौट जाएंगे। ‘हाई-एनर्जी कैंपेन’ की रणनीति नायडू का यह दौरा एनडीए के ‘हाई-एनर्जी कैंपेन’ का हिस्सा है, जिसमें सीमित समय में अधिकतम जनसंपर्क पर जोर दिया जा रहा है। रैलियों, रोड शो और सामुदायिक बैठकों के जरिए मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाने की रणनीति अपनाई गई है। खासतौर पर दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एनडीए इस बार आक्रामक प्रचार अभियान चला रही है। परिसीमन पर विपक्ष को घेरा नायडू ने परिसीमन को लेकर विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इससे लोकसभा सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि बढ़ेंगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संबंध में स्पष्ट आश्वासन दे चुके हैं। नायडू के मुताबिक, दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय की बात पूरी तरह निराधार है और परिसीमन की प्रक्रिया पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय से ही स्थापित नियमों के तहत चल रही है। चुनावी मुकाबले में बढ़ेगा रोमांच 23 अप्रैल 2026 को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले नायडू का यह दौरा एनडीए के लिए ऊर्जा भरने वाला कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल प्रचार से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है तथा अंतिम समय में मतदाताओं के रुझान पर भी असर पड़ सकता है।

  • महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश का वार, भाजपा की मंशा पर उठाए सवाल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में बिल का पारित न हो पाना भाजपा की “गलत नीयत” की हार और विपक्ष की एकजुटता की बड़ी जीत है। पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की मंशा शुरुआत से ही संदेह के घेरे में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण देने के बजाय राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लाया गया था। उन्होंने कहा कि लोकसभा में बिल का पास न होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार की रणनीति और इरादे दोनों ही त्रुटिपूर्ण थे। सपा प्रमुख ने विपक्षी दलों की एकता की सराहना करते हुए इसे लोकतंत्र की मजबूती का संकेत बताया और कहा कि सभी दलों ने मिलकर “भाजपा की कथित साजिश” को विफल कर दिया। अखिलेश यादव ने बिल में शामिल परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रावधानों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार, इन शर्तों ने भाजपा के राजनीतिक गणित को उजागर कर दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि विधेयक के पीछे चुनावी रणनीति छिपी हुई थी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण के नाम पर महिलाओं को एकजुट करने के बजाय विभाजित करने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, विपक्ष की सतर्कता और एकजुटता के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो सका। सपा प्रमुख ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के लिए सत्ता में बने रहने का नैतिक आधार कमजोर हुआ है और जनता के सामने उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि समाजवादी पार्टी महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के पक्ष में है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। राजनीतिक हलकों में इस बयान के बाद महिला आरक्षण बिल को लेकर बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

  • हाइवे किनारे अवैध ढाबों पर सख्ती, 60 दिन में हटाने का आदेश

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए व्यापक और सख्त अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ कहा कि तेज रफ्तार वाले हाईवे प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था के कारण “खतरे का गलियारा” नहीं बन सकते। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे में आने वाले सभी अवैध अतिक्रमण—जैसे ढाबे, भोजनालय और अन्य व्यावसायिक ढांचे—को हटाने का आदेश देते हुए जिला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों की समयसीमा तय की है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि सड़क किनारे अनियंत्रित निर्माण और गैरकानूनी पार्किंग हादसों को बढ़ावा देती हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुरक्षा को बताया मौलिक अधिकार कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सुरक्षित यात्रा का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों को सुरक्षित और व्यवस्थित सड़क अवसंरचना उपलब्ध कराए। बिना मंजूरी नहीं मिलेगा लाइसेंस अदालत ने भविष्य के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश तय करते हुए कहा कि अब बिना एनएचएआई या लोक निर्माण विभाग की अनुमति के कोई भी लाइसेंस, ट्रेड अप्रूवल या एनओसी जारी नहीं की जाएगी। साथ ही, मौजूदा लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर समीक्षा करने का आदेश दिया गया है, ताकि नियमों के उल्लंघन को तुरंत रोका जा सके। हादसों के बाद सख्ती यह मामला राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में नवंबर 2023 में हुए भीषण सड़क हादसों के बाद सामने आया था, जिनमें 34 लोगों की जान गई थी। अदालत ने इन घटनाओं को गंभीर प्रशासनिक चूक का परिणाम बताते हुए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। ब्लैकस्पॉट की पहचान और निगरानी कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि 45 दिनों के भीतर दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट की सूची जारी की जाए। इन स्थानों पर पर्याप्त लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और चेतावनी संकेत अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे। हर 75 किमी पर एंबुलेंस और क्रेन हाईवे सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एनएचएआई को 60 दिनों के भीतर हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, वे-साइड सुविधाओं में विश्राम स्थल, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पार्किंग और स्पष्ट संकेतक विकसित करना अनिवार्य होगा। आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम लागू होगा सभी 4 और 6 लेन हाईवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे यातायात की निगरानी और दुर्घटनाओं की रोकथाम को तकनीकी आधार मिल सके। अंतरराज्यीय समन्वय पर रिपोर्ट कोर्ट ने केंद्र सरकार को अंतरराज्यीय समन्वय समिति के गठन और कार्यप्रणाली पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, ताकि विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित हो सके। सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश न केवल अवैध अतिक्रमण पर रोक लगाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं, बल्कि देश की सड़कों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की व्यापक पहल भी माने जा रहे हैं।

  • महिला आरक्षण पर घमासान, विपक्ष पर बरसे अनुराग ठाकुर

    भारतार्थ खबर, बेंगलुरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने ‘इंडिया’ गठबंधन की पार्टियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “महिला विरोधी मानसिकता” वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि देश की माताएं और बहनें महिला आरक्षण बिल की राह में रोड़ा अटकाने वाली पार्टियों को कभी माफ नहीं करेंगी। रविवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय ‘जगन्नाथ भवन’ में आयोजित प्रेस वार्ता में ठाकुर ने कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन दलों ने पांचवीं बार महिला आरक्षण का रास्ता रोका है। उन्होंने कहा कि जब संसद में इस बिल पर दो दिन तक चर्चा हुई और इसे समर्थन मिलने की उम्मीद थी, तब विपक्षी दलों ने अपने रुख से पीछे हटकर महिलाओं के साथ “धोखा” किया। ठाकुर ने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी उनका नैसर्गिक अधिकार है, लेकिन विपक्षी दलों की नीतियां इसे टालने वाली रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिवारवाद से संचालित पार्टियां महिलाओं के अवसरों को सीमित करती हैं और चयनित चेहरों को ही आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने परिसीमन (डिलिमिटेशन) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण जरूरी है, जिससे सभी राज्यों और वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। उनके अनुसार, इससे महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा और लोकतांत्रिक संतुलन मजबूत होगा। ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि सीटों की बढ़ोतरी से दक्षिण भारत के राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा। कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आपातकाल जैसे “काले अध्याय” की जिम्मेदार पार्टी आज संविधान की बात कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए जीएसटी सुधार, अनुच्छेद 370 हटाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही “एक देश, एक चुनाव” की अवधारणा को चुनावी खर्च कम करने की दिशा में अहम बताया। इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ति रावत भारद्वाज ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को नीति निर्माण में अधिक भागीदारी देना चाहते हैं, लेकिन विपक्षी दलों ने इस दिशा में बाधाएं खड़ी कीं। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर लाखों महिलाओं ने अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है, फिर भी उन्हें संसद और विधानसभाओं में समान अवसर देने में देरी की जा रही है। प्रेस वार्ता में विधान परिषद सदस्य भारती शेट्टी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मालविका अविनाश, प्रदेश प्रवक्ता सुरभि होडिगेरे और महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष विजयलक्ष्मी आनंद सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। महिला आरक्षण को लेकर जारी इस सियासी टकराव ने आने वाले चुनावी परिदृश्य में नए समीकरणों के संकेत दे दिए हैं।

  • महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनके रुख ने देश को एक “ऐतिहासिक अवसर” से वंचित कर दिया। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन “जोरदार और स्पष्ट” था, जिसमें विपक्ष के “महिला विरोधी और विभाजनकारी चेहरे” को उजागर किया गया। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, कांग्रेस, डीएमके, सपा और टीएमसी जैसे दलों की सोच महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। इस मुद्दे पर राजनीतिक समर्थन भी खुलकर सामने आया। पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनके संदेश ने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलने की प्रक्रिया अब तेज़ होगी। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को पारित न होने देना “दुर्भाग्यपूर्ण” है। उन्होंने इसे देश की नारी शक्ति के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा झटका बताया और आरोप लगाया कि विपक्ष ने अपनी “वास्तविक मानसिकता” उजागर कर दी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष ने “नारी शक्ति की उड़ान रोक दी।” उन्होंने महिलाओं से क्षमा मांगते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों के बावजूद यह ऐतिहासिक विधेयक पारित नहीं हो सका। गौरतलब है कि महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है। सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ विपक्ष की बाधा बता रहा है, जबकि विपक्ष अपनी अलग दलीलें दे रहा है। महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आगामी चुनावी राजनीति का एक बड़ा केंद्र बिंदु बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस बहस का कोई सर्वसम्मत समाधान निकल पाता है या यह मुद्दा राजनीतिक टकराव को और गहरा करेगा।

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