top of page
भारतार्थ-logo

महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 19 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनके रुख ने देश को एक “ऐतिहासिक अवसर” से वंचित कर दिया।


जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन “जोरदार और स्पष्ट” था, जिसमें विपक्ष के “महिला विरोधी और विभाजनकारी चेहरे” को उजागर किया गया। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, कांग्रेस, डीएमके, सपा और टीएमसी जैसे दलों की सोच महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। इस मुद्दे पर राजनीतिक समर्थन भी खुलकर सामने आया। पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनके संदेश ने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलने की प्रक्रिया अब तेज़ होगी। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को पारित न होने देना “दुर्भाग्यपूर्ण” है। उन्होंने इसे देश की नारी शक्ति के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा झटका बताया और आरोप लगाया कि विपक्ष ने अपनी “वास्तविक मानसिकता” उजागर कर दी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष ने “नारी शक्ति की उड़ान रोक दी।” उन्होंने महिलाओं से क्षमा मांगते हुए कहा कि सरकार के प्रयासों के बावजूद यह ऐतिहासिक विधेयक पारित नहीं हो सका।


गौरतलब है कि महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है। सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ विपक्ष की बाधा बता रहा है, जबकि विपक्ष अपनी अलग दलीलें दे रहा है। महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आगामी चुनावी राजनीति का एक बड़ा केंद्र बिंदु बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस बहस का कोई सर्वसम्मत समाधान निकल पाता है या यह मुद्दा राजनीतिक टकराव को और गहरा करेगा।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page