बंगाल चुनाव: ‘जीतने की काबिलियत’ बनाम साफ छवि
- धन्ना राम चौधरी

- 19 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण ने लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक दलों की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी पारदर्शिता पर नजर रखने वाली संस्था Association for Democratic Reforms (ADR) और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट बताती है कि राज्य की राजनीति में ‘विनिंग एबिलिटी’ यानी जीतने की क्षमता, साफ-सुथरी छवि पर भारी पड़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण की 152 सीटों में से 66 सीटें (43%) ‘रेड अलर्ट’ श्रेणी में हैं। इन सीटों पर कम से कम तीन या उससे अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह स्थिति मतदाताओं के सामने विकल्पों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
दागी उम्मीदवारों की बड़ी हिस्सेदारी
कुल 1475 उम्मीदवारों में से 345 (23%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जबकि 294 (20%) पर गंभीर आरोप दर्ज हैं। इनमें हत्या के 19 और हत्या के प्रयास के 105 मामले शामिल हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े 98 मामलों का सामने आना चुनावी परिदृश्य को और चिंताजनक बनाता है।
पार्टीवार तस्वीर भी चिंताजनक
प्रमुख दलों के उम्मीदवारों का विश्लेषण भी कम चिंताजनक नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, Bharatiya Janata Party के 70%, All India Trinamool Congress के 43%, Communist Party of India (Marxist) के 44% और Indian National Congress के 26% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह संकेत देता है कि लगभग सभी दल टिकट वितरण में जीत की संभावना को प्राथमिकता दे रहे हैं, भले ही उम्मीदवारों की छवि विवादित क्यों न हो।
धनबल और चुनावी समीकरण
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 309 उम्मीदवार (21%) करोड़पति हैं, जबकि औसत संपत्ति 1.34 करोड़ रुपये आंकी गई है। 10 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले 35 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। वहीं 539 उम्मीदवार (37%) ने देनदारियों की जानकारी दी है। यह आंकड़े चुनाव में धनबल के बढ़ते प्रभाव को भी रेखांकित करते हैं।
महिलाओं की भागीदारी सीमित
चुनावी मैदान में महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी महज 11% (167 उम्मीदवार) है, जो राजनीतिक प्रतिनिधित्व में लैंगिक असंतुलन को उजागर करता है।
मतदाता के सामने कठिन परीक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आंकड़े लोकतांत्रिक गुणवत्ता के लिए चुनौती हैं। जब बड़ी संख्या में उम्मीदवारों पर आपराधिक आरोप हों, तो मतदाताओं के सामने स्वच्छ छवि वाले विकल्प सीमित हो जाते हैं। ऐसे में मतदाता को छवि, संसाधन और जीत की संभावना के बीच संतुलन बनाते हुए निर्णय लेना पड़ता है। पहले चरण के ये संकेत स्पष्ट करते हैं कि पश्चिम बंगाल का चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक शुचिता की भी परीक्षा बन गया है।
_edited.jpg)



टिप्पणियां