PM के संबोधन पर सियासी घमासान, खड़गे का हमला
- धन्ना राम चौधरी

- 19 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। कांग्रेस ने इस संबोधन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनका संबोधन एक “राजनीतिक भाषण” था, जिसमें तथ्यों से अधिक आरोप और विरोधियों पर निशाना साधने की कोशिश दिखी। खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री को “हताश और निराश” बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया। खड़गे ने कहा कि जब देश में आचार संहिता लागू है, तब इस तरह का संबोधन सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का उदाहरण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस का बार-बार उल्लेख किया, जबकि महिलाओं के मुद्दे पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया, जिससे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने अपनी पुरानी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वर्ष 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया गया था। खड़गे के अनुसार, कांग्रेस ने 2023 में लाए गए विधेयक का भी समर्थन किया, लेकिन इसे लागू करने में देरी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए और इसे परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखा जाए। खड़गे का कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना अनावश्यक देरी का कारण बन रहा है। इस बीच, कांग्रेस ने भाजपा पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले अधिक सामने आते हैं, और कई चर्चित घटनाओं में पीड़ितों को न्याय दिलाने में भी देरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने पर खेद जताते हुए विपक्ष को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष की राजनीति इस दिशा में बाधा बन रही है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच जारी यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है, जिससे संसद से लेकर चुनावी मैदान तक राजनीतिक तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।
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