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तमिलनाडु में ‘स्वाभिमान बनाम नियंत्रण’ की सियासी जंग तेज

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 19
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

तमिलनाडु। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। एक ओर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा महिला आरक्षण और विकास को प्रमुख मुद्दा बना रही है, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी और डीएमके गठबंधन इसे राज्य के स्वाभिमान और पहचान की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।


कोयंबटूर में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस और डीएमके पर तीखा हमला बोला। उन्होंने संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करने को लेकर विपक्ष को घेरा और कहा कि यदि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित हो जाता तो तमिलनाडु की कई महिलाओं को विधानसभा और संसद में प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि काले कपड़े पहनकर विरोध करने वाली डीएमके ने महिलाओं के अधिकारों को बाधित किया है। प्रधानमंत्री ने डीएमके सरकार पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की जगह “परिवार की राजनीति” हावी है, जहां सत्ता का लाभ कुछ खास लोगों तक सीमित है। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं में बढ़ती नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया। मोदी ने दावा किया कि तमिलनाडु में इस बार बदलाव की लहर है और जनता एनडीए को मौका देने के लिए तैयार है।


वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर पलटवार करते हुए केंद्र सरकार पर तमिलनाडु को “नियंत्रित करने” की कोशिश का आरोप लगाया। पोंनेरी और रानीपेट में चुनावी सभाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन राज्य की जनता की आवाज हैं और वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। राहुल गांधी ने भाजपा की नीतियों को तमिल पहचान के लिए खतरा बताते हुए कहा कि “एक राष्ट्र, एक भाषा, एक नेता” की सोच दक्षिण भारत की विविधता के खिलाफ है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक हस्तक्षेप करार देते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता अपनी भाषा, संस्कृति और स्वाभिमान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि डीएमके-कांग्रेस गठबंधन राज्य में भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन को पराजित करेगा। राहुल गांधी के अनुसार यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि “संस्कृति और स्वाभिमान” की रक्षा का चुनाव है, जिसमें जनता निर्णायक भूमिका निभाएगी। तमिलनाडु में इस बार का चुनावी मुकाबला विकास बनाम पहचान, और केंद्र बनाम राज्य के अधिकारों की बहस के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जनता किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाती है—विकास के दावों पर या स्वाभिमान की राजनीति पर।

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