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हाइवे किनारे अवैध ढाबों पर सख्ती, 60 दिन में हटाने का आदेश

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 19 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए व्यापक और सख्त अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ कहा कि तेज रफ्तार वाले हाईवे प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था के कारण “खतरे का गलियारा” नहीं बन सकते। अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे में आने वाले सभी अवैध अतिक्रमण—जैसे ढाबे, भोजनालय और अन्य व्यावसायिक ढांचे—को हटाने का आदेश देते हुए जिला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों की समयसीमा तय की है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि सड़क किनारे अनियंत्रित निर्माण और गैरकानूनी पार्किंग हादसों को बढ़ावा देती हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुरक्षा को बताया मौलिक अधिकार

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सुरक्षित यात्रा का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। राज्य की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों को सुरक्षित और व्यवस्थित सड़क अवसंरचना उपलब्ध कराए।

बिना मंजूरी नहीं मिलेगा लाइसेंस

अदालत ने भविष्य के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश तय करते हुए कहा कि अब बिना एनएचएआई या लोक निर्माण विभाग की अनुमति के कोई भी लाइसेंस, ट्रेड अप्रूवल या एनओसी जारी नहीं की जाएगी। साथ ही, मौजूदा लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर समीक्षा करने का आदेश दिया गया है, ताकि नियमों के उल्लंघन को तुरंत रोका जा सके।

हादसों के बाद सख्ती

यह मामला राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में नवंबर 2023 में हुए भीषण सड़क हादसों के बाद सामने आया था, जिनमें 34 लोगों की जान गई थी। अदालत ने इन घटनाओं को गंभीर प्रशासनिक चूक का परिणाम बताते हुए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

ब्लैकस्पॉट की पहचान और निगरानी

कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि 45 दिनों के भीतर दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट की सूची जारी की जाए। इन स्थानों पर पर्याप्त लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और चेतावनी संकेत अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे।

हर 75 किमी पर एंबुलेंस और क्रेन

हाईवे सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एनएचएआई को 60 दिनों के भीतर हर 75 किलोमीटर पर एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, वे-साइड सुविधाओं में विश्राम स्थल, स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित पार्किंग और स्पष्ट संकेतक विकसित करना अनिवार्य होगा।

आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम लागू होगा

सभी 4 और 6 लेन हाईवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे यातायात की निगरानी और दुर्घटनाओं की रोकथाम को तकनीकी आधार मिल सके।

अंतरराज्यीय समन्वय पर रिपोर्ट

कोर्ट ने केंद्र सरकार को अंतरराज्यीय समन्वय समिति के गठन और कार्यप्रणाली पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, ताकि विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित हो सके। सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश न केवल अवैध अतिक्रमण पर रोक लगाने की दिशा में निर्णायक कदम हैं, बल्कि देश की सड़कों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की व्यापक पहल भी माने जा रहे हैं।

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