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होर्मुज में तनाव, भारतीय जहाजों पर फायरिंग से हड़कंप

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 19
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

पश्चिम एशिया के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र Strait of Hormuz में शनिवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरानी बलों ने दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में न तो किसी प्रकार का नुकसान हुआ और न ही किसी क्रू मेंबर के घायल होने की सूचना है।

जहाज सुरक्षित, सरकार सतर्क

शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, जिन दो जहाजों को निशाना बनाया गया, उनकी पहचान सनमार हेराल्ड (कच्चे तेल का टैंकर) और जग अर्नव (बल्क कैरियर) के रूप में हुई है। दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तभी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की नौकाओं द्वारा कथित तौर पर गोलीबारी की गई। घटना के बाद जहाजों को एहतियातन वापस मोड़ दिया गया। भारत सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और सभी भारतीय जहाजों तथा उनके कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया। विदेश मंत्रालय की ओर से विस्तृत बयान का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के अनुसार भारत इस मामले को गंभीरता से ले रहा है, क्योंकि होर्मुज मार्ग भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बयानबाज़ी

इस घटनाक्रम पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ईरान पर निशाना साधते हुए कहा कि होर्मुज को बार-बार बंद करने की धमकी देना “रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश” है। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत जारी है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।

ईरान का इनकार

वहीं भारत में ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस घटना से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी फायरिंग की जानकारी नहीं है और भारत-ईरान संबंध “मजबूत और स्थिर” हैं। इलाही ने भरोसा दिलाया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापारिक और ऊर्जा संबंध रहे हैं और भारतीय जहाज पहले भी सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजरते रहे हैं।

रणनीतिक महत्व और बढ़ती चिंता

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन जाती है। हालांकि इस घटना में कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इससे एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि पश्चिम एशिया में हालात कितने संवेदनशील बने हुए हैं। भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह अपने समुद्री हितों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखे।

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