फाइल गुम, बादाम से विरोध
- धन्ना राम चौधरी

- 18 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
बिलासपुर। सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों और लापरवाही के खिलाफ विरोध के कई तरीके देखे गए हैं, लेकिन बिलासपुर में एक युवक का अनोखा प्रदर्शन इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अपनी संपत्ति के उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) की फाइल एक साल से अधिक समय से गायब होने से परेशान युवक ने विरोध जताने के लिए अधिकारी की मेज पर बादाम बिखेर दिए—ताकि “याददाश्त बेहतर हो सके”।
यह मामला शहर के हाउसिंग बोर्ड कार्यालय का है, जहां शिकायतकर्ता तरुण साहू पिछले एक वर्ष से अपनी फाइल के लिए लगातार चक्कर काट रहे हैं। साहू ने बताया कि उन्होंने पुनर्विक्रय के जरिए एक ईडब्ल्यूएस फ्लैट खरीदा था, लेकिन आवश्यक फाइल के गुम हो जाने के कारण म्यूटेशन प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके चलते वे अपने मकान का वैध स्वामित्व प्राप्त करने से वंचित हैं। साहू का आरोप है कि हर बार कार्यालय पहुंचने पर उन्हें एक ही जवाब मिलता है—“फाइल नहीं मिल रही।” लगातार हो रही इस अनदेखी और देरी से नाराज होकर उन्होंने विरोध का यह अनोखा तरीका अपनाया।
प्रतीकात्मक विरोध ने खींचा ध्यान
सोमवार को साहू अपने साथ बादाम लेकर कार्यालय पहुंचे और उप-पंजीयक अधिकारी की मेज पर उन्हें बिखेर दिया। आमतौर पर याददाश्त बढ़ाने के प्रतीक माने जाने वाले बादाम के जरिए उन्होंने विभाग की कार्यशैली पर तंज कसा। उनका कहना था कि शायद इससे अधिकारियों को फाइल “याद” आ जाए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कार्यालय में मौजूद कर्मचारी और अन्य लोग हैरान रह गए। कुछ ही देर में यह दृश्य चर्चा का विषय बन गया और वहां मौजूद लोगों ने इसे मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया।
सोशल मीडिया पर छाया मामला
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद आम लोगों ने सरकारी दफ्तरों में होने वाली देरी और जवाबदेही पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई यूजर्स ने इसे आम नागरिकों की पीड़ा का प्रतीक बताया, जो वर्षों तक अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
तरुण साहू ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी गुम हुई फाइल को जल्द से जल्द खोजा जाए और म्यूटेशन प्रक्रिया पूरी की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वे और कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। यह घटना एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करती है, जहां आम नागरिक की समस्या अक्सर फाइलों के ढेर में कहीं खो जाती है।
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