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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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अलवर शिशु अस्पताल में अव्यवस्था, एक बेड पर कई मासूम

लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
धन्ना राम चौधरी
19 अप्रैल
2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

अलवर। जिले के राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां उजागर हो रही हैं। अस्पताल के सामान्य वार्ड में हालात इतने बदतर हैं कि एक ही बेड पर दो से तीन शिशुओं को भर्ती करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी, उमस और दुर्गंध के बीच चल रहा यह इलाज मासूम मरीजों और उनके परिजनों के लिए किसी पीड़ा से कम नहीं है।


अस्पताल में बेड की भारी कमी के चलते स्थिति दिन-ब-दिन विकट होती जा रही है। आधिकारिक रूप से 22 बेड स्वीकृत होने के बावजूद पहले 20 अतिरिक्त बेड जोड़कर कुल 42 बेड की व्यवस्था की गई थी, लेकिन जर्जर घोषित किए गए 20 बेड वाले वार्ड के बंद होने के बाद अब केवल 32 बेड ही उपयोग में हैं। दूसरी ओर, भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या अक्सर 50 से अधिक पहुंच जाती है। ऐसे में शाम होते-होते हर बेड पर दो से तीन मासूमों को भर्ती करना मजबूरी बन जाती है। वार्ड में भीड़भाड़ के कारण न तो परिजनों को खड़े होने की पर्याप्त जगह मिल पा रही है और न ही चिकित्सा कर्मी शिशुओं की समुचित निगरानी कर पा रहे हैं। उमस और बदबू से भरे माहौल में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अभिभावकों की चिंता और गहरा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इस अव्यवस्था का सबसे अधिक असर पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में समुचित इलाज न मिलने के कारण कई परिजन मजबूर होकर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

दो साल से बंद वार्ड, निर्माण अधूरा

अस्पताल का 20 बेड वाला वार्ड और उससे जुड़ी गैलरी पिछले दो वर्षों से बंद पड़ी है। जर्जर घोषित किए जाने के बाद इसे ध्वस्त कर नए निर्माण की घोषणा की गई थी। करीब चार महीने पहले निर्माण कार्य शुरू होने का दावा किया गया, लेकिन अब तक केवल पिलर खड़े किए जा सके हैं। सुस्त निर्माण कार्य ने अस्पताल की क्षमता को सीमित कर दिया है और मरीजों की परेशानियों को बढ़ा दिया है।

प्रशासन मौन, हालात चिंताजनक

भीषण गर्मी के इस दौर में यदि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रोजाना अस्पताल पहुंचने वाले परिजन बेड की कमी और अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनहीनता स्थिति को और बिगाड़ रही है। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मांग की है कि जल्द से जल्द बंद वार्ड का निर्माण पूरा कर अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जाए, ताकि मासूम मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल सके।

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