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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

22अक्टूबर /2026 /गुरुवार

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 22 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की संभावित शुरुआत राहत भरी खबर हो सकती है। दक्षिण पश्चिम रेलवे की ओर से 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर इस मार्ग पर उद्घाटन विशेष सेवा शुरू करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, नियमित परिचालन, अंतिम समय-सारणी, ठहराव और किराये को लेकर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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  • महाराष्ट्र LPG सिलेंडर हादसा: बाढ़ में बह गए हजारों सिलेंडर, प्रशासन ने जारी की सख्त चेतावनी

    रायगढ़ के HPCL प्लांट में बाढ़ का कहर, पातालगंगा नदी में बहते दिखे हजारों एलपीजी सिलेंडर; लोगों से दूर रहने और तुरंत सूचना देने की अपील। बाढ़ के पानी में बहते LPG सिलेंडर, HPCL पातालगंगा प्लांट या रायगढ़ बाढ़ का प्रतीकात्मक दृश्य। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)रायगढ़ (महाराष्ट्र) | 09 जुलाई, 2026 रायगढ़। महाराष्ट्र LPG सिलेंडर हादसा उस समय गंभीर रूप ले गया जब लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण रायगढ़ जिले के चावणे गांव स्थित HPCL पातालगंगा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में बाढ़ का पानी घुस गया। तेज बहाव में करीब 3,000 एलपीजी सिलेंडर बहकर पातालगंगा नदी तक पहुंच गए। घटना के बाद जिला प्रशासन ने लोगों के लिए सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि नदी, समुद्र तट या आसपास कहीं भी सिलेंडर दिखाई दें तो उन्हें छूने, उठाने या घर ले जाने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे बड़ा हादसा हो सकता है। जानकारी के अनुसार, बाढ़ का पानी अचानक प्लांट में भर गया, जिससे कर्मचारियों को सिलेंडरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। तेज जलधारा के सामने भारी-भरकम सिलेंडर भी टिक नहीं पाए और बहते चले गए। इनमें गैस से भरे और खाली दोनों प्रकार के सिलेंडर शामिल बताए जा रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक, लगभग 1,200 खाली सिलेंडर भी बह गए, जिनमें गैस नहीं भरी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यदि इन सिलेंडरों में गैस भरी होती तो आपस में टकराने से गैस रिसाव, आग या विस्फोट जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती थीं। रायगढ़ के जिला कलेक्टर किशन जावले ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी स्थान पर बहकर आया सिलेंडर दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहर से देखकर यह पता लगाना संभव नहीं है कि सिलेंडर भरा हुआ है या खाली तथा उसकी स्थिति सुरक्षित है या नहीं। इस घटना के बाद HPCL और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से नदी और आसपास के क्षेत्रों में बहकर गए सिलेंडरों की तलाश कर रहे हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच भी जारी है ताकि नुकसान का सही आकलन किया जा सके और भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई लोगों ने औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए औद्योगिक इकाइयों के लिए आपदा प्रबंधन योजनाओं को और अधिक मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। इसी बीच मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के कई जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा किसी भी संदिग्ध स्थिति की तुरंत सूचना देने की अपील की है।

  • बेंगलुरु दूसरा हवाई अड्डा: हारोहल्ली बना नया दावेदार, सीएम डीके शिवकुमार का बड़ा संकेत

    कनकपुरा के हारोहल्ली क्षेत्र पर फिर शुरू हुआ मंथन, सस्ती जमीन और बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ी दूसरे ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की उम्मीदें। हारोहल्ली क्षेत्र का हवाई दृश्य, डीके शिवकुमार की बैठक, या बेंगलुरु एयरपोर्ट/ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का प्रतीकात्मक चित्र। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com )बेंगलुरु | 09 जुलाई, 2026 बेंगलुरु। बेंगलुरु दूसरा हवाई अड्डा परियोजना को लेकर कर्नाटक सरकार ने एक नया संकेत दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने विधानसभा क्षेत्र कनकपुरा के अंतर्गत आने वाले हारोहल्ली को दूसरे ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के संभावित स्थल के रूप में दोबारा परखने का सुझाव दिया है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो हारोहल्ली बेंगलुरु के भविष्य के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक का केंद्र बन सकता है। बुधवार को मुख्यमंत्री ने अवसंरचना विकास मंत्री एम.बी. पाटिल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में दूसरे हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण, तकनीकी व्यवहार्यता और भविष्य की कनेक्टिविटी पर विस्तार से चर्चा हुई। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से हारोहल्ली क्षेत्र का पुनर्मूल्यांकन करने को कहा, क्योंकि यहां भूमि अपेक्षाकृत सस्ती है और अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है। फिलहाल सरकार के पास सोमनहल्ली, चूडाहल्ली और नेलमंगला-कुनिगल क्षेत्र जैसे विकल्प मौजूद हैं। हालांकि हारोहल्ली के सामने आने से परियोजना की दिशा बदल सकती है। अधिकारियों का मानना है कि यहां बड़े पैमाने पर गांवों के विस्थापन की आवश्यकता कम होगी, जिससे परियोजना सामाजिक रूप से भी अधिक स्वीकार्य बन सकती है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार ऐसे स्थान की तलाश में है जहां तकनीकी दृष्टि से एयरपोर्ट बनाना संभव हो, जमीन समतल हो, लागत कम आए और ग्रामीणों को न्यूनतम परेशानी हो। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव को उजाड़ना सरकार का उद्देश्य नहीं है और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, हारोहल्ली भविष्य में नम्मा मेट्रो ग्रीन लाइन विस्तार, सैटेलाइट टाउन रिंग रोड (STRR) और कनकपुरा कॉरिडोर से जुड़ सकता है। यही वजह है कि इसकी कनेक्टिविटी अन्य प्रस्तावित स्थानों की तुलना में अधिक मजबूत मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को हारोहल्ली का तकनीकी और हवाई क्षेत्र संबंधी अध्ययन करना होगा। वहीं मीन्हार्ट-केपीएमजी कंसोर्टियम आर्थिक, यातायात और तकनीकी व्यवहार्यता पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सितंबर 2026 तक राज्य सरकार को सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर दूसरे एयरपोर्ट के अंतिम स्थान की घोषणा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हारोहल्ली को मंजूरी मिलती है तो दक्षिण बेंगलुरु में निवेश, रोजगार, रियल एस्टेट, उद्योग और परिवहन के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • कर्नाटक नदी प्रदूषण नियंत्रण: 40 नए सीवेज संयंत्रों से जल गुणवत्ता सुधार की बड़ी पहल

    रकार ने सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेज किए कदम, नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एसटीपी परियोजनाओं का विस्तार। कर्नाटक में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), नदी, जल शोधन संयंत्र या स्वच्छ नदी का दृश्य। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 09 जुलाई, 2026 । कर्नाटक नदी प्रदूषण नियंत्रण को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नदियों की गिरती जल गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से सरकार ने 40 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) प्रस्तावित किए हैं, जिससे 112.85 एमएलडी अतिरिक्त सीवेज उपचार क्षमता विकसित होगी। इसके साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं में भी तेजी लाई गई है, जिससे राज्य की प्रमुख नदियों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के समक्ष दायर हलफनामे में बताया कि नदी प्रदूषण को कम करने के लिए सीवेज प्रबंधन अवसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। प्रस्तावित परियोजनाओं के अतिरिक्त निर्माणाधीन 14 नए एसटीपी से 174.025 एमएलडी उपचार क्षमता और जुड़ने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, हसन जिले में 10 एमएलडी क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी चालू कर दिया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर गंदे पानी के उपचार में उल्लेखनीय सुधार होगा। गौरतलब है कि जनवरी 2024 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया था कि कर्नाटक की 12 में से 9 नदियों की जल गुणवत्ता चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई थी। रिपोर्ट में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अनियोजित विकास, बिना उपचारित सीवेज के सीधे नदी में छोड़े जाने और औद्योगिक प्रदूषण को इसके प्रमुख कारण बताया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित विभागों से जवाब मांगा था। सरकार ने न्यायाधिकरण को बताया कि सीवेज उपचार परियोजनाओं के अलावा औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, ठोस एवं खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन, उपचारित जल के पुनः उपयोग तथा प्रदूषित नदी क्षेत्रों के संरक्षण के लिए भी कई योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो कर्नाटक की नदियों की जल गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लाखों लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

  • संभल सूर्यकुंड तीर्थ का होगा भव्य कायाकल्प, योगी सरकार ने जारी किए ₹4.32 करोड़

    अयोध्या-काशी की तर्ज पर विकसित होगा ऐतिहासिक सूर्यकुंड तीर्थ, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं और धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम। संभल स्थित प्राचीन सूर्यकुंड तीर्थ की तस्वीर भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) संभल (उत्तर प्रदेश) | 8 जुलाई, 2026 संभल सूर्यकुंड तीर्थ अब धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले सूर्यकुंड तीर्थ के जीर्णोद्धार एवं सुंदरीकरण के लिए ₹4.32 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दे दी है। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने इस योजना की पहली किस्त के रूप में ₹3.24 करोड़ जारी कर दिए हैं, जिससे जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य सूर्यकुंड की प्राचीन धार्मिक पहचान को संरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना है। योजना के तहत लाल बलुआ पत्थर से दो भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, जो तीर्थ की भव्यता को और बढ़ाएंगे। वर्तमान में मौजूद पुराने प्रवेश द्वार जर्जर हो चुके हैं और उनकी जगह नए आकर्षक स्वागत द्वार तैयार किए जाएंगे। परियोजना में श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मल्टीपर्पज हॉल, यात्री शेड, आधुनिक शौचालय, पुरुष एवं महिला चेंजिंग रूम, कोटा स्टोन फ्लोरिंग, बेहतर लाइटिंग, सोलर प्लांट और हरित विकास (हॉर्टिकल्चर रिनोवेशन) जैसे कार्य शामिल किए गए हैं। इन सुविधाओं से तीर्थ परिसर अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगा। धार्मिक दृष्टि से सूर्यकुंड तीर्थ संभल के सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में गिना जाता है। यह नगर के 68 प्राचीन तीर्थों और 19 पौराणिक कूपों में शामिल है। वर्षभर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सरकार का मानना है कि आधुनिक सुविधाओं के विकास से संभल धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान बनाएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इससे पहले वर्ष 2019 में भी मुख्यमंत्री द्वारा ₹75.31 लाख की लागत से यहां यात्री शेड, चारदीवारी और इंटरलॉकिंग जैसे कार्य कराए गए थे। अब नई परियोजना के माध्यम से सूर्यकुंड का व्यापक विकास किया जाएगा। इसी क्रम में वंश गोपाल तीर्थ के जीर्णोद्धार एवं सुंदरीकरण के लिए भी ₹4.50 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से ₹3.37 करोड़ की पहली किस्त जारी हो चुकी है। यहां भी स्वागत द्वार, मल्टीपर्पज हॉल, यात्री शेड, शौचालय, चेंजिंग रूम, कोटा स्टोन फर्श और स्टेनलेस स्टील रेलिंग जैसी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

  • बरुईपुर रेप-मर्डर केस: जांच में मानव तस्करी का एंगल, 5 FIR और 25 गिरफ्तारियां

    पश्चिम बंगाल के बरुईपुर कांड में जांच का दायरा बढ़ा, पुलिस मानव तस्करी की साजिश, हिंसा और आरोपी की मुठभेड़ समेत कई पहलुओं की कर रही जांच। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता (पश्चिम बंगाल) | 8 जुलाई, 2026 बरुईपुर रेप-मर्डर केस की जांच में नए खुलासों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच एजेंसियां अब इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि नाबालिग पीड़िता को पहले मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के लिए निशाना बनाया गया था। पुलिस के अनुसार, यह पहलू पूछताछ के दौरान सामने आया है और इसकी स्वतंत्र रूप से जांच की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। मामले से जुड़े घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में हुई हिंसा, आगजनी और पुलिस पर हमलों के संबंध में अब तक पांच एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने बताया कि शुरुआती चार मामलों में 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह भी देखा जा रहा है कि क्या पीड़िता को पहले से किसी तस्करी गिरोह द्वारा निशाना बनाया गया था या यह सीमित स्तर के अपराधियों की साजिश थी। इस दिशा में उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस ने अभी तक किसी बड़े नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दक्षिण 24 परगना का बरुईपुर क्षेत्र पहले भी मानव तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता रहा है। विभिन्न सरकारी और जांच एजेंसियों की पूर्व रिपोर्टों में इस क्षेत्र को संवेदनशील कॉरिडोर बताया गया है। इसी कारण पुलिस इस मामले में सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है। इस बीच, मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल की पुलिस मुठभेड़ में मौत भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्टल छीनने और भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना को लेकर भी अलग से कानूनी प्रक्रिया और जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों से बचें तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। मामले की जांच अभी जारी है और आगे नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

  • कर्नाटक मानसून फूड: बारिश आते ही स्वादों से सज जाते हैं उत्तर कर्नाटक के बाजार

    जंगली मशरूम, केकड़े, कदुबु और जोलड़ा रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजनों के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं फूड लवर्स। उत्तर कर्नाटक के मानसून फूड मार्केट / जंगली मशरूम और पारंपरिक व्यंजनों की तस्वीर भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 8 जुलाई, 2026 कर्नाटक मानसून फूड का मौसम शुरू होते ही उत्तर कर्नाटक के पारंपरिक बाजारों की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। पहली अच्छी बारिश के साथ ही यहां के बाजारों में ऐसे दुर्लभ और पारंपरिक स्वाद पहुंचने लगते हैं, जिनका स्थानीय लोग पूरे साल इंतजार करते हैं। जंगलों, खेतों और नदियों से सीधे आने वाले ताजे खाद्य पदार्थ न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देशभर से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उत्तर कर्नाटक के मानसून बाजार केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और खानपान का जीवंत उत्सव बन जाते हैं। यहां मिट्टी की सौंधी खुशबू, ताजे मसालों की महक और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है। बारिश शुरू होते ही सबसे अधिक मांग जंगली मशरूम (कुम्मु) की होती है। पहली बारिश के बाद जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले इन मशरूम से बनने वाली कुम्मु पल्य उत्तर कर्नाटक की प्रसिद्ध पारंपरिक डिश मानी जाती है। वहीं आलंदी कुम्मु सीमित समय के लिए उपलब्ध होने वाला विशेष मशरूम है, जिसे स्थानीय परिवार मानसून की अनमोल सौगात मानते हैं। मानसून में नदियों और नालों से मिलने वाले ताजे केकड़े भी बाजारों की खास पहचान हैं। सड़क किनारे भोजनालयों में इन्हें पारंपरिक मसालों के साथ तैयार किया जाता है। मसालेदार केकड़ा करी और भुने हुए केकड़ों का स्वाद बारिश की ठंडी शाम को और भी यादगार बना देता है। इसी मौसम में केम्बु सुली भी लोगों की पसंदीदा डिश बन जाती है। अरबी (टारो) के कोमल डंठलों से तैयार यह पारंपरिक व्यंजन ग्रामीण परिवारों की रसोई की पहचान माना जाता है। मानसून की एक और खास डिश कदुबु है। हल्दी की सुगंधित पत्तियों में खीरा, कद्दू और कटहल जैसी मौसमी सामग्री भरकर इसे भाप में पकाया जाता है। हल्दी की पत्तियों की प्राकृतिक खुशबू इस व्यंजन को अनोखा स्वाद देती है। उत्तर कर्नाटक का पारंपरिक भोजन जोलड़ा रोटी के बिना अधूरा माना जाता है। ज्वार के आटे से बनी यह रोटी बादनकेई एन्नेगई, झुणका और शेंगा चटनी पुड़ी जैसे स्थानीय व्यंजनों के साथ परोसी जाती है। यही पारंपरिक स्वाद उत्तर कर्नाटक को देश के प्रमुख फूड डेस्टिनेशन में शामिल करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पारंपरिक व्यंजन स्थानीय कृषि, वन उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाते हैं। यही कारण है कि मानसून के दौरान उत्तर कर्नाटक के बाजार किसी फूड फेस्टिवल से कम नहीं दिखाई देते।

  • Life Tree लॉन्च: दुनिया का पहला डिजिटल विरासत प्लेटफ़ॉर्म, परिवारों की यादें अब रहेंगी हमेशा सुरक्षित

    ब्लू रोज़ टेक्नोलॉजीज़ ने पेश किया प्राइवेट 'डिजिटल विरासत' प्लेटफ़ॉर्म, परिवारों की कहानियों, वंशावली और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने की अनूठी पहल। Life Tree लॉन्च कार्यक्रम की तस्वीर / Life Tree प्लेटफ़ॉर्म का आधिकारिक विजुअल भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 7 जुलाई, 2026 Life Tree डिजिटल विरासत प्लेटफ़ॉर्म के लॉन्च के साथ बेंगलुरु स्थित ब्लू रोज़ टेक्नोलॉजीज़ ने डिजिटल दुनिया में परिवारों की विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कंपनी का दावा है कि Life Tree दुनिया का पहला समर्पित प्राइवेट डिजिटल विरासत प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे परिवारों की कहानियों, वंशावली, सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों की अनमोल यादों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। तेजी से बदलती जीवनशैली, वैश्विक माइग्रेशन और संयुक्त परिवारों के विघटन के दौर में पारिवारिक इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों के खोने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसी चुनौती को देखते हुए ब्लू रोज़ टेक्नोलॉजीज़ के सह-संस्थापक एवं CEO विनीत जैन और सह-संस्थापक एवं COO तुलसीदासप्पा ने Life Tree की परिकल्पना की। यह प्लेटफ़ॉर्म परिवारों को अपने पूर्वजों की जानकारी, पारिवारिक कहानियों, फोटो, वीडियो, दस्तावेज़, पारंपरिक व्यंजन, सांस्कृतिक विरासत और जीवन की महत्वपूर्ण यादों को सुरक्षित रखने की सुविधा देता है। Life Tree की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह प्राइवेट और सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम है। यह किसी सार्वजनिक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की तरह कार्य नहीं करता। इसमें न तो विज्ञापन हैं, न डेटा बेचने का मॉडल और न ही एल्गोरिदम आधारित फ़ीड। इससे उपयोगकर्ताओं का निजी डेटा पूरी तरह परिवार के नियंत्रण में रहता है। प्लेटफ़ॉर्म पर परिवार विस्तृत इंटरैक्टिव फैमिली ट्री तैयार कर सकते हैं, दुनिया भर में फैले रिश्तेदारों को जोड़ सकते हैं तथा दादा-दादी और पूर्वजों की कहानियों को ऑडियो, वीडियो और दस्तावेज़ों के रूप में आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित कर सकते हैं। कंपनी का मानना है कि यह पहल आधुनिक तकनीक के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का नया अध्याय साबित होगी। CEO विनीत जैन ने कहा कि तकनीक ने लोगों को दुनिया से जोड़ा है, लेकिन परिवारों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है। वहीं COO तुलसीदासप्पा ने कहा कि Life Tree का उद्देश्य केवल एक ऐप बनाना नहीं, बल्कि परिवारों की पहचान और इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना है। 25 देशों में आईटी सेवाएं प्रदान करने वाली ब्लू रोज़ टेक्नोलॉजीज़ का कहना है कि Life Tree डिजिटल संरक्षण, डेटा गोपनीयता और पारिवारिक जुड़ाव का नया वैश्विक मानक स्थापित करेगा।

  • पतंजलि मेगा स्टोर हुबली पहुंचे MLC लिंगराज पाटिल, बोले— शहरवासियों के लिए वरदान

    एक ही स्थान पर हजारों पतंजलि उत्पाद, निःशुल्क आयुर्वेदिक हेल्थ चेक-अप और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा की सराहना। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) डेटलाइन | 8 जुलाई, 2026 | हुबली (कर्नाटक) पतंजलि मेगा स्टोर हुबली एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया, जब कर्नाटक विधान परिषद के नवनिर्वाचित सदस्य श्री लिंगराज पाटिल ने बुधवार सुबह केशवपुर स्थित रमेश भवन रोड पर संचालित पतंजलि मेगा स्टोर का दौरा किया। उन्होंने स्टोर में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, आयुर्वेदिक दवाइयों और स्वदेशी उत्पादों का विस्तार से अवलोकन किया तथा इसकी व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की। निरीक्षण के बाद श्री लिंगराज पाटिल ने कहा कि पतंजलि मेगा स्टोर हुबली में एक ही छत के नीचे शुद्ध देसी पतंजलि के हजारों उत्पाद उपलब्ध हैं। यहां दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर आयुर्वेदिक दवाइयों तक हर आवश्यक सामग्री आसानी से मिलती है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात की प्रशंसा की कि यहां पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार से प्रशिक्षित वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क हेल्थ चेक-अप एवं परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे आधुनिक और सुव्यवस्थित आयुर्वेदिक केंद्र का हुबली-धारवाड़ में स्थापित होना क्षेत्रवासियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। इससे लोगों को गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उपचार, प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा और स्वदेशी उत्पादों तक आसान पहुंच मिलेगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने में योगदान दें। इस अवसर पर पतंजलि योग समिति, कर्नाटक राज्य के प्रभारी श्री भवरलाल आर्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री विश्वनाथ, भाजपा नेता श्री जयतीर्थ कट्टी, उमेश जोशी, वीरेश संगलाद, संदीप भूदिहाल, बसवराज कुंदगोलमठ, डॉ. मीनाक्षी जैन, स्टोर मैनेजर श्री किरण गुरुजी, बसवराज हीरेमठ सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने पतंजलि द्वारा आयुर्वेद, स्वदेशी उत्पादों और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मेगा स्टोर के माध्यम से उन्हें गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उत्पाद, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह और निःशुल्क स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। यह पहल न केवल स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा दे रही है बल्कि स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों का विश्वास भी मजबूत कर रही है।

  • मुंबई मॉनसून का कड़वा सच: समुद्र ने लौटाया इंसानों का फेंका ‘जहर’

    मरीन ड्राइव से जुहू चौपाटी तक प्लास्टिक का पहाड़, हाई टाइड ने खोली महानगर की गंदगी की पोल भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई | 7 जुलाई, 2026 मुंबई में मॉनसून की रिकॉर्डतोड़ बारिश ने जहां शहर की रफ्तार थाम दी है, वहीं समुद्र से लौटकर आए टनों प्लास्टिक कचरे ने महानगर के सामने खड़े पर्यावरणीय संकट की भयावह तस्वीर भी उजागर कर दी है। मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, दादर बीच और कई समुद्री किनारों पर फैला कचरे का अंबार अब सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही का खतरनाक सबूत बन चुका है। समुद्र ने मानो इंसानों द्वारा फेंका गया “जहर” वापस लौटाकर चेतावनी दी है कि प्रकृति अब जवाब देने लगी है। मुंबई में लगातार हो रही बारिश और हाई टाइड के कारण समुद्र में बहाया गया प्लास्टिक और ठोस कचरा वापस समुद्र तटों पर जमा हो गया। इससे शहर के ड्रेनेज सिस्टम की कमजोरियां और पर्यावरण संरक्षण की नाकामी खुलकर सामने आ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई रोजाना लगभग 6000 से 6500 मीट्रिक टन ठोस कचरा पैदा करता है, जिसमें 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा केवल प्लास्टिक कचरे का होता है। डिजास्टर कंट्रोल रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई हर दिन 600 से 750 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। इसमें सिंगल यूज प्लास्टिक, बोतलें, पैकेजिंग मटेरियल और प्लास्टिक बैग प्रमुख हैं। यह कचरा शहर के नालों, नदियों और क्रीक के जरिए सीधे अरब सागर में पहुंचता है। मॉनसून के दौरान जब समुद्र में हाई टाइड आता है, तो यही कचरा लहरों के साथ वापस तटों पर लौट आता है। पर्यावरणविदों और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (NIO) की रिपोर्ट के अनुसार, मीठी नदी, पोइसर नदी और ओशिवारा जैसे जलमार्ग हर साल हजारों टन प्लास्टिक समुद्र में पहुंचाते हैं। बारिश के मौसम में यह समस्या कई गुना बढ़ जाती है। मुंबई का पुराना ब्रिटिशकालीन स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम प्लास्टिक कचरे के कारण जाम हो जाता है, जिससे भारी बारिश में शहर के कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं। सबसे चिंताजनक पहलू माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता खतरा है। समुद्र में मौजूद प्लास्टिक धूप और लहरों से टूटकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाता है, जिन्हें समुद्री जीव निगल लेते हैं। यही माइक्रोप्लास्टिक सी-फूड के जरिए इंसानों की फूड चेन में पहुंचकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। स्थिति से निपटने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने कई कदम उठाए हैं। प्रमुख नालों और नदियों पर ट्रैश बूम और लोहे के जाल लगाए गए हैं ताकि कचरा समुद्र तक न पहुंचे। जुहू, वर्सोवा, गिरगांव और दादर चौपाटी पर बीच क्लीनिंग मशीनें भी तैनात की गई हैं। महाराष्ट्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है और नियम तोड़ने वालों पर 5000 से 25000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके बावजूद प्लास्टिक कचरे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक घर-घर कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग और सख्त जागरूकता अभियान नहीं चलाए जाएंगे, तब तक मुंबई का समुद्र इसी तरह कचरा लौटाकर चेतावनी देता रहेगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा खुलासा! चंपत राय के आरोपों से मचा हड़कंप

    SIT जांच में बैंक व्यवस्था, सुरक्षा नियम और पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा पर उठे गंभीर सवाल भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) अयोध्या | 7 जुलाई, 2026 अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित घोटाले और अनियमितताओं के मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय द्वारा स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के सामने दिए गए बयान ने पूरे मामले में सनसनी फैला दी है। चंपत राय ने ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा, बैंक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके दावों के बाद अब राम मंदिर चढ़ावा विवाद राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। चंपत राय ने SIT को दिए बयान में दावा किया कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में तय नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक के साथ हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) में कई तरह की अनियमितताएं थीं। उनके अनुसार, इस प्रकार के महत्वपूर्ण समझौते पर उनके हस्ताक्षर आवश्यक थे, लेकिन उनकी जानकारी और सहमति के बिना ही MOU को अंतिम रूप दे दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 6 फरवरी 2025 के जिस दिशा-निर्देश पत्र का हवाला दिया जा रहा है, उस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उन्हें इस दस्तावेज की जानकारी 13 जून 2026 को मिली। चंपत राय ने स्पष्ट किया कि अगस्त 2020 से जून 2026 तक बैंक के साथ हुए सभी प्रमुख समझौतों पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन इस दिशा-निर्देश पत्र पर हस्ताक्षर न होना पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है। पूर्व महासचिव ने बैंक की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चढ़ावे की गिनती जैसे संवेदनशील कार्य में कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले विशेष कपड़े अनिवार्य होने चाहिए थे ताकि किसी भी प्रकार की चोरी या अनियमितता की संभावना खत्म हो सके। लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल की कथित तौर पर अनदेखी की गई। चंपत राय ने आरोप लगाया कि बैंक ने चढ़ावे की गिनती के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ का उपयोग किया, जो निर्धारित प्रक्रिया के खिलाफ है। उनके मुताबिक ऐसे कार्य के लिए प्रशिक्षित और अधिकृत कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक थी। उन्होंने कहा कि या तो बैंक अधिकारियों को नियमों की जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। उन्होंने यह भी बताया कि 9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ हुए MOU के अनुसार गणना कक्ष में CCTV कैमरे, लोहे की सलाखों वाले सुरक्षित दरवाजे और अन्य सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए थे, लेकिन वास्तविकता इससे अलग दिखाई दी। उन्होंने जांच एजेंसी से पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। फिलहाल SIT की जांच जारी है और चंपत राय के इन आरोपों के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे विवाद की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

  • खामेनेई के अंतिम संस्कार में कर्नाटक के 100 लोग पहुंचे, ‘मिनी ईरान’ से जुड़ा है 46 साल पुराना रिश्ता

    कर्नाटक के अलीपुर गांव और ईरान के बीच भावनात्मक संबंध ने दुनिया का खींचा ध्यान भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु/तेहरान | 7 जुलाई, 2026 ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में जहां दुनिया भर से लाखों लोग पहुंचे हैं, वहीं कर्नाटक के विजयपुर जिले के छोटे से अलीपुर गांव ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस गांव से करीब 100 लोग तेहरान पहुंचे हैं, जो खामेनेई के प्रति अपनी गहरी भावनात्मक आस्था और दशकों पुराने रिश्ते को दर्शाता है। कर्नाटक का यह गांव अब “मिनी ईरान” के नाम से भी चर्चा में है। अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में हुआ था। उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई को मशहद में संपन्न होगी, जहां उन्हें इमाम रजा के मकबरे के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान लाखों की संख्या में लोग ईरान पहुंचे हैं और इसे हालिया इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक शोक सभाओं में गिना जा रहा है। कर्नाटक के विजयपुर (बीजापुर) जिले का अलीपुर गांव लंबे समय से शिया मुस्लिम समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। लगभग 30 हजार की आबादी वाले इस गांव में 90 प्रतिशत से अधिक लोग शिया मुस्लिम हैं। गांव और ईरान के बीच संबंधों की शुरुआत 1981 में मानी जाती है, जब अयातुल्ला खामेनेई ने स्वयं अलीपुर गांव का दौरा किया था। बताया जाता है कि 1980 के दशक में खामेनेई ने गांव में स्थापित “इमाम खुमैनी अस्पताल” का उद्घाटन भी किया था, जिसे ईरानी सरकार की सहायता से बनाया गया था। इसके बाद से अलीपुर और ईरान के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत होते गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, अलीपुर गांव के करीब 100 लोग चुपचाप इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान रवाना हुए। इनमें कई लोग पहले से ईरान में धार्मिक विद्वान, मेडिकल छात्र, डॉक्टर और व्यापारी के रूप में रह रहे हैं। भारत-ईरान वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर के अध्यक्ष सैयद हकीम रजा ने बताया कि कई लोग बेंगलुरु से मुंबई होते हुए चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए तेहरान पहुंचे। अलीपुर निवासी फैजान रजा ने कहा कि खामेनेई को गांव में पिता समान सम्मान दिया जाता था। उनके निधन से गांव में गहरा शोक व्याप्त है। यही कारण है कि अंतिम विदाई में शामिल होना लोगों ने अपना नैतिक दायित्व समझा। खामेनेई के निधन के बाद अलीपुर गांव में तीन दिन का शोक मनाया गया। गांव की अधिकांश दुकानें बंद रहीं, मस्जिदों और घरों पर काले झंडे लगाए गए तथा विशेष धार्मिक सभाओं का आयोजन किया गया। ग्रामीणों ने इसे अपनी श्रद्धांजलि और सम्मान का प्रतीक बताया।

  • शरद पवार NDA में जाएंगे? महाराष्ट्र राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल

    विजय वडेट्टीवार के बयान से बढ़ी हलचल, जयंत पाटील-भाजपा नेताओं की बैठक चर्चा में भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई | 7 जुलाई, 2026 महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शरद पवार गुट वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संभावित रूप से NDA के साथ जाने की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के बयान के बाद यह मुद्दा और भी गर्मा गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि शरद पवार गुट NDA का समर्थन करता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। दरअसल, देश में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भाजपा रणनीतिक रूप से अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी हुई है। इसी बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल बढ़ी है, जहां टीएमसी और उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसदों के NDA के करीब जाने की चर्चाएं सामने आई हैं। ऐसे माहौल में शरद पवार गुट के रुख पर सबकी नजरें टिक गई हैं। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा किया कि शरद पवार गुट वाली राकांपा के पास 10 विधायक और 8 सांसद हैं, जो सत्ता समीकरणों में “मैजिक फिगर” साबित हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शरद पवार को प्रगतिशील महाराष्ट्र की विचारधारा को ध्यान में रखना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के साथ सत्ता में शामिल होने को लेकर राकांपा के भीतर गतिविधियां तेज हो गई हैं। चर्चा यह भी है कि पार्टी सीधे सत्ता में शामिल होगी या बाहर से समर्थन देगी। इसी बीच राकांपा नेता जयंत पाटील और भाजपा नेता विनोद तावड़े की एक पंचतारांकित होटल में हुई कथित बैठक ने अटकलों को और हवा दे दी है। हालांकि राकांपा विधायक रोहित पवार ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, विधानसभा में कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने आरटीओ विभाग में कथित भ्रष्टाचार और गैरकानूनी वसूली का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार चल रहा है और कुछ अधिकारियों को जानबूझकर एसीबी के जाल में फंसाया जा रहा है। उन्होंने सदन में कुछ अधिकारियों के नाम और ऑडियो क्लिप भी प्रस्तुत किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की घोषणा की। IPS अधिकारी प्रियंका ननावरे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT आगामी एक माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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