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मुंबई मॉनसून का कड़वा सच: समुद्र ने लौटाया इंसानों का फेंका ‘जहर’

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 7 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Trash-covered Mumbai beach with a person in red by the surf, skyline in back, and Hindi text मुंबई का सच overhead

मरीन ड्राइव से जुहू चौपाटी तक प्लास्टिक का पहाड़, हाई टाइड ने खोली महानगर की गंदगी की पोल

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई | 7 जुलाई, 2026 मुंबई में मॉनसून की रिकॉर्डतोड़ बारिश ने जहां शहर की रफ्तार थाम दी है, वहीं समुद्र से लौटकर आए टनों प्लास्टिक कचरे ने महानगर के सामने खड़े पर्यावरणीय संकट की भयावह तस्वीर भी उजागर कर दी है। मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, दादर बीच और कई समुद्री किनारों पर फैला कचरे का अंबार अब सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि इंसानी लापरवाही का खतरनाक सबूत बन चुका है। समुद्र ने मानो इंसानों द्वारा फेंका गया “जहर” वापस लौटाकर चेतावनी दी है कि प्रकृति अब जवाब देने लगी है।


मुंबई में लगातार हो रही बारिश और हाई टाइड के कारण समुद्र में बहाया गया प्लास्टिक और ठोस कचरा वापस समुद्र तटों पर जमा हो गया। इससे शहर के ड्रेनेज सिस्टम की कमजोरियां और पर्यावरण संरक्षण की नाकामी खुलकर सामने आ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई रोजाना लगभग 6000 से 6500 मीट्रिक टन ठोस कचरा पैदा करता है, जिसमें 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा केवल प्लास्टिक कचरे का होता है।


डिजास्टर कंट्रोल रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई हर दिन 600 से 750 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। इसमें सिंगल यूज प्लास्टिक, बोतलें, पैकेजिंग मटेरियल और प्लास्टिक बैग प्रमुख हैं। यह कचरा शहर के नालों, नदियों और क्रीक के जरिए सीधे अरब सागर में पहुंचता है। मॉनसून के दौरान जब समुद्र में हाई टाइड आता है, तो यही कचरा लहरों के साथ वापस तटों पर लौट आता है।


र्यावरणविदों और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (NIO) की रिपोर्ट के अनुसार, मीठी नदी, पोइसर नदी और ओशिवारा जैसे जलमार्ग हर साल हजारों टन प्लास्टिक समुद्र में पहुंचाते हैं। बारिश के मौसम में यह समस्या कई गुना बढ़ जाती है। मुंबई का पुराना ब्रिटिशकालीन स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम प्लास्टिक कचरे के कारण जाम हो जाता है, जिससे भारी बारिश में शहर के कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं।


सबसे चिंताजनक पहलू माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता खतरा है। समुद्र में मौजूद प्लास्टिक धूप और लहरों से टूटकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाता है, जिन्हें समुद्री जीव निगल लेते हैं। यही माइक्रोप्लास्टिक सी-फूड के जरिए इंसानों की फूड चेन में पहुंचकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।


स्थिति से निपटने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने कई कदम उठाए हैं। प्रमुख नालों और नदियों पर ट्रैश बूम और लोहे के जाल लगाए गए हैं ताकि कचरा समुद्र तक न पहुंचे। जुहू, वर्सोवा, गिरगांव और दादर चौपाटी पर बीच क्लीनिंग मशीनें भी तैनात की गई हैं।


महाराष्ट्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है और नियम तोड़ने वालों पर 5000 से 25000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके बावजूद प्लास्टिक कचरे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक घर-घर कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग और सख्त जागरूकता अभियान नहीं चलाए जाएंगे, तब तक मुंबई का समुद्र इसी तरह कचरा लौटाकर चेतावनी देता रहेगा।

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