खामेनेई के अंतिम संस्कार में कर्नाटक के 100 लोग पहुंचे, ‘मिनी ईरान’ से जुड़ा है 46 साल पुराना रिश्ता
- धन्नाराम चौधरी

- 7 जुल॰
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कर्नाटक के अलीपुर गांव और ईरान के बीच भावनात्मक संबंध ने दुनिया का खींचा ध्यान
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु/तेहरान | 7 जुलाई, 2026 ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में जहां दुनिया भर से लाखों लोग पहुंचे हैं, वहीं कर्नाटक के विजयपुर जिले के छोटे से अलीपुर गांव ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस गांव से करीब 100 लोग तेहरान पहुंचे हैं, जो खामेनेई के प्रति अपनी गहरी भावनात्मक आस्था और दशकों पुराने रिश्ते को दर्शाता है। कर्नाटक का यह गांव अब “मिनी ईरान” के नाम से भी चर्चा में है।
अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में हुआ था। उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई को मशहद में संपन्न होगी, जहां उन्हें इमाम रजा के मकबरे के पास सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान लाखों की संख्या में लोग ईरान पहुंचे हैं और इसे हालिया इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक शोक सभाओं में गिना जा रहा है।
कर्नाटक के विजयपुर (बीजापुर) जिले का अलीपुर गांव लंबे समय से शिया मुस्लिम समुदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। लगभग 30 हजार की आबादी वाले इस गांव में 90 प्रतिशत से अधिक लोग शिया मुस्लिम हैं। गांव और ईरान के बीच संबंधों की शुरुआत 1981 में मानी जाती है, जब अयातुल्ला खामेनेई ने स्वयं अलीपुर गांव का दौरा किया था।
बताया जाता है कि 1980 के दशक में खामेनेई ने गांव में स्थापित “इमाम खुमैनी अस्पताल” का उद्घाटन भी किया था, जिसे ईरानी सरकार की सहायता से बनाया गया था। इसके बाद से अलीपुर और ईरान के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत होते गए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अलीपुर गांव के करीब 100 लोग चुपचाप इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान रवाना हुए। इनमें कई लोग पहले से ईरान में धार्मिक विद्वान, मेडिकल छात्र, डॉक्टर और व्यापारी के रूप में रह रहे हैं। भारत-ईरान वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर के अध्यक्ष सैयद हकीम रजा ने बताया कि कई लोग बेंगलुरु से मुंबई होते हुए चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए तेहरान पहुंचे।
अलीपुर निवासी फैजान रजा ने कहा कि खामेनेई को गांव में पिता समान सम्मान दिया जाता था। उनके निधन से गांव में गहरा शोक व्याप्त है। यही कारण है कि अंतिम विदाई में शामिल होना लोगों ने अपना नैतिक दायित्व समझा।
खामेनेई के निधन के बाद अलीपुर गांव में तीन दिन का शोक मनाया गया। गांव की अधिकांश दुकानें बंद रहीं, मस्जिदों और घरों पर काले झंडे लगाए गए तथा विशेष धार्मिक सभाओं का आयोजन किया गया। ग्रामीणों ने इसे अपनी श्रद्धांजलि और सम्मान का प्रतीक बताया।
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