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कमजोर मानसून के बीच बेंगलुरु में पेयजल उपयोग पर सख्त प्रतिबंध

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 6 जुल॰
  • 2 मिनट पठन
Two outdoor metal water taps with white handles on rusty pipes, blurred garden background, no water flowing.
BWSSB का बड़ा फैसला: स्विमिंग पूल, वाहन धुलाई और निर्माण कार्यों में पीने के पानी के उपयोग पर रोक

बेंगलुरु में जल संकट की आशंका के बीच पानी बचाने को लेकर BWSSB की सख्त कार्रवाई

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 06 जुलाई, 2026 कमजोर मानसून और अल नीनो के प्रभाव के चलते बेंगलुरु में संभावित जल संकट को देखते हुए बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। BWSSB ने गैर-जरूरी कार्यों के लिए पीने के पानी के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अब स्विमिंग पूल भरने, वाहन धोने, सड़क और भवन निर्माण कार्यों तथा सजावटी फव्वारों में पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। शहर में जल संरक्षण को लेकर यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


4 जुलाई को जारी परिपत्र में BWSSB ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए उपयोग किए जाने वाले स्विमिंग पूलों को सीमित छूट दी गई है, लेकिन इसके लिए भी बोर्ड से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा बड़े अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, मॉल, होटल, सरकारी भवन, रेस्तरां और धार्मिक संस्थानों को 31 जुलाई तक सभी नलों और पानी के आउटलेट्स पर फ्लो रिस्ट्रिक्टर या एरेटर लगाना अनिवार्य किया गया है ताकि पानी की खपत को नियंत्रित किया जा सके।


BWSSB के अनुसार बेंगलुरु को वर्तमान में कावेरी नदी से प्रतिदिन लगभग 1,950 मिलियन लीटर पानी और भूजल स्रोतों से करीब 800 मिलियन लीटर पानी प्राप्त हो रहा है। हालांकि कमजोर मानसून के कारण जलाशयों में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से घट रहा है। 4 जुलाई तक कर्नाटक के प्रमुख जलाशय अपनी कुल क्षमता के केवल 23 प्रतिशत तक ही भरे हुए थे, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए BWSSB ने अभी से एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। बोर्ड ने आवश्यकता पड़ने पर काबिनी और हेमावती जलाशयों से अतिरिक्त पानी लाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।


BWSSB की अध्यक्ष मंजुला एन. ने कहा कि यदि हेमावती या काबिनी जलाशयों से पानी छोड़ा जाता है, तो उसे लगभग 155 किलोमीटर तक बहकर आना होगा और इस दौरान पानी की सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति गंभीर होती है तो वैकल्पिक जल स्रोतों को सक्रिय करना जरूरी होगा।


शहर में बढ़ती आबादी और कमजोर मानसून के बीच यह फैसला आने वाले समय में जल संरक्षण के महत्व को और अधिक उजागर करता है।

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