top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

कर्नाटक मानसून फूड: बारिश आते ही स्वादों से सज जाते हैं उत्तर कर्नाटक के बाजार

लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
धन्नाराम चौधरी
8 जुल॰
2 मिनट पठन
Rainy outdoor market with women in colorful saris serving food and produce as elderly men walk under string lights.
जंगली मशरूम, केकड़े, कदुबु और जोलड़ा रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजनों के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं फूड लवर्स।

उत्तर कर्नाटक के मानसून फूड मार्केट / जंगली मशरूम और पारंपरिक व्यंजनों की तस्वीर

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 8 जुलाई, 2026 कर्नाटक मानसून फूड का मौसम शुरू होते ही उत्तर कर्नाटक के पारंपरिक बाजारों की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। पहली अच्छी बारिश के साथ ही यहां के बाजारों में ऐसे दुर्लभ और पारंपरिक स्वाद पहुंचने लगते हैं, जिनका स्थानीय लोग पूरे साल इंतजार करते हैं। जंगलों, खेतों और नदियों से सीधे आने वाले ताजे खाद्य पदार्थ न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देशभर से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं।


उत्तर कर्नाटक के मानसून बाजार केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और खानपान का जीवंत उत्सव बन जाते हैं। यहां मिट्टी की सौंधी खुशबू, ताजे मसालों की महक और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है।


बारिश शुरू होते ही सबसे अधिक मांग जंगली मशरूम (कुम्मु) की होती है। पहली बारिश के बाद जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले इन मशरूम से बनने वाली कुम्मु पल्य उत्तर कर्नाटक की प्रसिद्ध पारंपरिक डिश मानी जाती है। वहीं आलंदी कुम्मु सीमित समय के लिए उपलब्ध होने वाला विशेष मशरूम है, जिसे स्थानीय परिवार मानसून की अनमोल सौगात मानते हैं।


मानसून में नदियों और नालों से मिलने वाले ताजे केकड़े भी बाजारों की खास पहचान हैं। सड़क किनारे भोजनालयों में इन्हें पारंपरिक मसालों के साथ तैयार किया जाता है। मसालेदार केकड़ा करी और भुने हुए केकड़ों का स्वाद बारिश की ठंडी शाम को और भी यादगार बना देता है।


इसी मौसम में केम्बु सुली भी लोगों की पसंदीदा डिश बन जाती है। अरबी (टारो) के कोमल डंठलों से तैयार यह पारंपरिक व्यंजन ग्रामीण परिवारों की रसोई की पहचान माना जाता है।


मानसून की एक और खास डिश कदुबु है। हल्दी की सुगंधित पत्तियों में खीरा, कद्दू और कटहल जैसी मौसमी सामग्री भरकर इसे भाप में पकाया जाता है। हल्दी की पत्तियों की प्राकृतिक खुशबू इस व्यंजन को अनोखा स्वाद देती है।


उत्तर कर्नाटक का पारंपरिक भोजन जोलड़ा रोटी के बिना अधूरा माना जाता है। ज्वार के आटे से बनी यह रोटी बादनकेई एन्नेगई, झुणका और शेंगा चटनी पुड़ी जैसे स्थानीय व्यंजनों के साथ परोसी जाती है। यही पारंपरिक स्वाद उत्तर कर्नाटक को देश के प्रमुख फूड डेस्टिनेशन में शामिल करता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पारंपरिक व्यंजन स्थानीय कृषि, वन उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाते हैं। यही कारण है कि मानसून के दौरान उत्तर कर्नाटक के बाजार किसी फूड फेस्टिवल से कम नहीं दिखाई देते।

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें
bottom of page